गुजरात मे इस साल के अंत मे विधानसभा चुनाव होने को है सत्ता पक्ष और विपक्ष एक दूसरे को मात देने की पूरी तैयारी में है। वही अगर हम बात राजनीतिक दलों की करे तो वह सत्ता के स्वाद को चखने के लिए प्रत्येक पैतरा अपनाने को तैयार है। राजनीतिक दल भाषा , लिंग, जाति, धर्म के नाम पर जनता को लुभाने की हर सम्भव कोशिश करते हैं और उनके वोट बैंक पर अपना आधिपत्य स्थापित करना चाहते हैं। वही अगर हम बात गुजरात चुनाव की करे तो इस बार यह कयास लगाए जा रहे हैं कि राजनीतिक दल दलित वोट के साथ खेलने की तैयारी में है।
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क्या है गुजरात मे अनुसूचित जातियों का डेटा:-
अगर हम गुजरात में अनुसूचित जातियों की बात करें तो यह महज 7 फीसदी है। लेकिन इसमे 36 जातियां और समूह रहते हैं। हालांकि अभी तक गुजरात मे अनुसूचित जाति पर राजनीति उतनी विकसित नहीं हुई है जितनी अन्य राज्यों में विकसित है लेकिन गुजरात मे राजनीति तो काफी विकसित हुई है और इस बार यह उम्मीद है कि गुजरात की राजनीति में बड़ा परिवर्तन होगा और राजनीतिक दलों को गुजरात वोट बैंक की ओर झुकते हुए देखा जाएगा।
गुजरात मे दलित के मध्य भी जातिवाद;-
गुजरात मे दलित के मध्य भी जातिवाद देंखने को मिल जाएगा। वैसे तो यह अनुसूचित जातियों के लोग स्वयं को अंबेडकर के नक्से कदम पर चलने वाला बताते हैं लेकिन इनके अंदर भी आपसी मतभेद ओर ऊंच नीच की भावना देंखने को मिलती है। जो लोगों को बड़े और छोटे समाज मे विभक्त है। आज गुजरात मे ऐसे दलित समुदाय है जिनका शोषण किसी ब्राह्मण या उच्च वर्ग के समुदाय द्वारा नहीं होता है बल्कि उन्हीं के समाज की उपजातियों द्वारा होता है।
2017 में किस पार्टी की ओर झुका था गुजरात का दलित;-
अगर पिछली बार के चुनाव की बात करें तो दलित वोट बैंक भाजपा की ओर झुकाव दिखा रहा था। भाजपा ने विपक्ष की सभी नीतियों कुचलते हुए दलित वोट बैंक हासिल किया था। उनका यह सनर्थन कही न कही राजनीति में बड़ा परिवर्तन है और अन्य दल की दलित को आकर्षित करने की रणनीति भारी पड़ने वाला तुरुप का इक्का।

