सीएसआईआर-सीडीआरआई ने सिद्ध की अपनी महत्ता: डॉ. हर्षवर्धन

हेल्थसीएसआईआर-सीडीआरआई ने सिद्ध की अपनी महत्ता: डॉ. हर्षवर्धन

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सीएसआईआर-सीडीआरआई ने सिद्ध की अपनी महत्ता: डॉ. हर्षवर्धन

लखनऊ: सीएसआईआर-सीडीआरआई, लखनऊ ने 17 फरवरी, 2021 को अपना 70 वां वार्षिक दिवस मनाया। इस अवसर पर दिवंगत प्रधानमंत्रीअटल बिहारी बाजपेईजी के विज्ञान एवं सीएसआईआर-सीडीआरआई के प्रति उनके विजन की स्मृति में “अटल नेशनल कोलोक्वियम ऑन हेल्थकेयर एण्ड इन्नोवेशन (स्वास्थ्य विज्ञान एवं नवोन्मेष पर अटल राष्ट्रीय संवाद) शृंखला का शुभारम्भ केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन ने किया।

अपने उद्घाटन संबोधन में उन्होंने कहा, “सीएसआईआर-सीडीआरआई ने सेंट्रोक्रोमन (पहला गैर-स्टेरायडल मौखिक गर्भनिरोधक) और आर्टीथर (सेरेब्रल मलेरिया के लिए जीवनरक्षक दवा) जैसी सस्ती दवाओं की खोज के माध्यम से दुनिया भर में अपनी पहचान बना कर अपनी महत्ता सिद्ध की है। इस संस्थान ने न केवल दवाओं के क्षेत्र में, बल्कि मानव कल्याण हेतु गुणवत्तापूर्ण मौलिक अनुसंधान के साथ साथ उच्च कोटि के मानव संसाधन विकास के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

इसके अलावा उन्होंने डीएसआईआर और सीएसआईआर द्वारा संयुक्त रूप से समर्थित “कॉमन रिसर्च एंड टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट हब (सीआरटीडीएच)” का उद्घाटन किया। सीआरटीडीएच की स्थापना का मुख्य उद्देश्य (1) एक फार्मास्युटिकल फॉर्म्युलेशन डेवलपमेंट और नेशनल क्लिनिकल ट्रायल बैच प्रोडक्शन फैसिलिटी को स्थापित करना और संचालित करना है और (2) जीएलपी-कंप्लाईंट प्री-क्लिनिकल एंड क्लीनिकल बायोएनालिसिस (जैसे पीके, बीए, बीई ) और ड्रग परीक्षण (डीटीएल) के लिए एक यूनिट की स्थापना और संचालन करना है। यह सुविधा, एडवांस रिसर्च हेतु क्लिनिकल ट्रायल सेंटर, फार्मा इंडस्ट्री, एमएसएमई और एकेडमिया के लिए बेहद मददगार होगी।

समारोह के दौरान संस्थान द्वारा विकसित नवीन प्रोद्योगिकी का हस्तांतरण मेसर्स बायोटेक डेस्क प्राइवेट लिमिटेड (बीडीपीएल), हैदराबाद को किया गया। यह नवीन प्रोद्योगिकी, “फ्लोरेसेंट डाइ एवं क्वेंचर्स (प्रतिदीप्त रंजक एवं शामक) की आरटी-पीसीआर आधारित डायग्नोस्टिक किट के विकास और जीवन विज्ञान अनुसंधान में उनके उपयोगों” से संबन्धित है। यह नवीन प्रोद्योगिकी डॉ. अतुल गोयल के नेतृत्व में विकसित गई है जिसमें फ़्लोरोसेंट डाइज़ (प्रतिदीप्त रंगों) (CDRI-KD1, CDRI-KD1Az3) और क्वेंचर्स (शामकों) (CDRI-KQ3, CDRI-KQ4) के द्वारा आरटी-पीसीआर आधारित डायग्नोस्टिक किट विकसित की गई है।

इस विषय में निदेशक, प्रोफेसर तपस कुमार कुंडू ने कहा, सीडीआरआई ने कोविड के परीक्षण के लिए स्वदेशी आरआरटी-पीसीआर डायग्नोस्टिक किट के विकास के लिए फ्लोरोसेंट डाई और क्वांचर्स की तकनीक विकसित की है। उन्होंने कहा कि इन फ्लोरोसेंट डाइज़ और क्वेंचर्स के माध्यम से न केवल स्वदेशी कोविड परीक्षण किट तैयार की गई है बल्कि यह “आत्मानिर्भर भारत” की ओर एक पहल है। इस परियोजना को सीएसआईआर ने सार्वजनिक निजी भागीदारी योजना के तहत आरटी-पीसीआर डायग्नोस्टिक्स किट में भारत को आत्मनिर्भर बनाने और कोरोनावायरस के लिए सीरोलॉजिकल परीक्षण के लिए वित्त पोषित किया था।

डॉ अतुल गोयल और टीम ने जुलाई 2020 में इस तकनीक पर काम करना शुरू किया, जब COVID-19 के परीक्षण की लागत लगभग 4000-5000/- रुपये प्रति नमूना थी। डॉ अतुल गोयल ने बताया कि कोविड संक्रमण के लिए qRT-PCR परीक्षण का सबसे विश्वसनीय तरीका है, जिसमें परीक्षण के लिए महंगे आयातित TAQMAN प्रोब का उपयोग किया जाता है । फ्लोरोसेंट रंजक और शामक की हमारी भारतीय प्रौद्योगिकी विदेशी निर्माताओं से अभिकर्मकों और किट्स की आपूर्ति पर निर्भरता को कम करेगी। उन्होंने कहा कि हमारा बड़ा लक्ष्य भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए भारत के लिए क्षमता निर्माण है।
डॉ श्रद्धा गोयनका, एमडी, बायोटेक डेस्क ने कहा कि वह बहुत उत्साहित हैं क्योंकि उनकी कंपनी पूरी तरह से स्वदेशी कोविड-19 परीक्षण किट: इंडिफ्लोर-कोविड (INDIFLUOR-COVID) का उत्पादन करेगी।

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