चोट से उबरने के बाद मैदान पर उतरते ही ओलिंपिक चैंपियन ज्वेलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा ने इतिहास रच दिया था. चोट के कारण कॉमनवेल्थ गेम्स से बाहर रहे नीरज ने डायमंड लीग मीट के लुसाने चरण में खिताबी थ्रो फेंककर ऐसा करने वाले पहले भारतीय बन गए है. यहीं नहीं, नीरज ने इसी के साथ सितंबर में ज्यूरिख में होने वाले डायमंड लीग के फाइनल के लिए भी क्वालिफाई कर लिया है, साथ ही उन्होंने अगले साल हंगरी के बुडापेस्ट में होने वाले विश्व चैंपियनशिप के लिए भी क्वालिफाई कर लिया है.
नीरज ने यह खिताबी थ्रो पहले प्रयास में फेंका था, उन्होंने अपने कैरियर का तीसरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 89.08 मीटर दूर भाला फेंक डायमंड लीग का कोई खिताब जीतने वाले वो पहले भारतीय बन गए हैं. उनसे पहले डायमंड लीग मीट के टॉप 3 में जगह बनाने वाले इकलौते भारतीय थे चक्का फेंक खिलाड़ी विकास गौड़ा ही थे.
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बता दें कि विश्व चैंपियनशिप के फाइनल के दौरान नीरज चोपड़ा को चौथे थ्रो के दौरान ग्रोइन में खिंचाव आ गया था. हालाँकि उन्होंने इस वर्ल्ड चैंपियनशिप में उन्होंने रजत पदक जीतकर इतिहास रचा था. चोट के कारण नीरज अपने अंतिम दो थ्रो में गोल्ड के लिए वह दूरी हासिल नहीं कर पाए जो खिताब के लिए चाहिए थी. वर्ल्ड चैंपियनशिप में लगी इस चोट की वजह से नीरज को कॉमनवेल्थ गेम्स से भी बाहर होना पड़ा था, जिसका फायदा पाकिस्तानी ज्वेलिन थ्रोअर अरशद नदीम ने उठाया और 90 मीटर से ज़्यादा दूरी तय कर गोल्ड मैडल हासिल किया।

