Life of Lata Mangeshkar: डायमंड से लेकर गाड़ियों तक की शौकीन थी सुर सामग्री लता मंगेशकर, 92 साल की उम्र में दुनिया को कहा अलविदा

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Life of Lata Mangeshkar: डायमंड से लेकर गाड़ियों तक की शौकीन थी सुर सामग्री लता मंगेशकर, 92 साल की उम्र में दुनिया को कहा अलविदा

छोटी सी उम्र में ही संगीत की थी बेहतरीन समझ, अपने शिष्य को सिखाते देख पिता ने देनी शुरू की थी संगीत की तालीम

अमित बिश्‍नोई

Life of Lata Mangeshkar – भारत की स्वर कोकिला लता मंगेशकर 92 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह चली। रविवार सुबह उनका निधन हो गया। अपनी आवाज से दुनिया भर में पहचान बनाने वाली लता मंगेशकर को लोग लता दीदी के नाम से पुकारते थे। संगीत जगत में लता दीदी के तमाम सुने अनसुने किस्से मौजूद है। कम ही लोग जानते हैं कि उन्हें डायमंड और गाड़ियों का बेहद शौक था। उनके पास गाड़ियों का भी बेहतरीन कलेक्शन था। फ़िल्म ‘वीर-जारा’ में उनके गाए गानों के लिए यश चोपड़ा ने उन्हें एक खूबसूरत सी लग्जरी कार मर्सिडीज़ उपहार स्वरूप दी थी। इस गाड़ी को उन्होंने लंबे समय तक प्रयोग किया। कहा जाता है कि लता दीदी ने सबसे पहले अपने लिए लगभग 8 हजार रुपये की एक ग्रे रंग की हिलमैन गाड़ी खरीदी थी। 1964 के बाद उन्होंने इस गाड़ी को बेचा और अपने लिए ‘शेवरोले’ कार खरीदी थी। लता दीदी को सोने से ज्यादा डायमंड का शौक था 1948 में उन्होंने अपने लिए हीरे से जड़ित अंगूठी बनवाई थी।

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अपने शिष्य को सिखाते देख हैरान रह गए थे पिता

Lata Mangeshkar Passes Away – पूरी दुनिया में लता दीदी की आवाज उनकी पहचान बने और अमर हो जाए यह कुदरत ने बहुत पहले से ही तय कर रखा था। लता मंगेशकर के पिता दीनानाथ मंगेशकर भी बड़े गायक थे। लता दीदी पर लिखी किताब’ लता इन हर ऑन वॉइस’ में उनके गायकी को लेकर तमाम किस्से साझा किए गए हैं। इस किताब के अनुसार लता दीदी को उनके पिता दीनानाथ मंगेशकर ने एक बार अपने शिष्य को राग समझाते हुए देखा। 5 साल की उम्र में संगीत की ऐसी समझ और परख देखकर वह हैरान रह गए। किस्सा कुछ यूं है कि दीनानाथ मंगेशकर एक बार अपने शिष्य को राग पूरिया धनाश्ररी सिखा रहे थे। लता दीदी उस वक्त 5 वर्ष की थी। उन्हें संगीत में खासी दिलचस्पी थी। हालांकि अपने पिता के सामने उनकी गायन की हिम्मत नहीं थी। जिस कमरे में पिता अपने शिष्य को राख सिखा रहे थे, लता दीदी वहां से कुछ दूरी पर ही खेल रही थी। पिता किसी काम से उठकर बाहर गए और उन्होंने शिष्य को गलत ढंग से राग गाते हुए देखा। उनसे रहा नहीं गया और वह उन्हें सिखाने पहुंच गई। पिता जब कमरे में पहुंचे तो बेटी को गाते देखकर बाहर रुक गए और दरवाजे की ओट से सुनने लगे। लता दीदी की गायकी देखकर वह हैरान रह गए। अगले दिन उन्होंने उन्हें संगीत की तालीम देना शुरू कर दिया और इसकी शुरुआत राग पुरिया धनाश्ररी से ही की।

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आवाज के साथ पाककला में भी थी निपुण

Lata Mangeshkar news – लता दीदी के गले में साक्षात सरस्वती का वास था, तो उनके हाथों में भी अन्नपूर्णा का आशीर्वाद था। लता दीदी सिर्फ आवाज की धनी नहीं थी। उनके खाने में भी गजब का स्वाद होता था। बताया जाता है कि जो एक बार उनके हाथ का मटन पसंदा खा ले वह उस स्वाद को कभी भूल नहीं सकता था। इसके अलावा लता दीदी को हलवा बनाने में भी महारत हासिल थी। दीदी को मिठाइयों का भी काफी शौक था। इंदौर के गुलाब जामुन, जलेबी उन्हें बहुत पसंद है। कीमे वाले समोसे प्रॉन और गोविन फिश करी भी उन्हें काफी लुभाती थी। उनके बारे में यह भी प्रचलित है कि जासूसी उपन्यास पढ़ने का उन्हें जबरदस्त शौक था। शेरलॉक होम्स का पूरा कलेक्शन उनके पास मौजूद था। लता दीदी को क्रिकेट से भी खासा लगाव था।

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