Gujarat chunavi dangal:- गुजरात मे होने वाले सियासी द्वंद के लिए सभी राजनीतिक दलों ने अपने अपने अस्त्र शस्त्र धारण कर।लिए है और यह मैदान में जनता का दिल जीतने के लिए उतर चुके हैं। गुजरात मे इस साल के अंत मे विधानसभा चुनाव होने को है वही अगर हम गुजरात के राजनीतिक समीकरण को समझे तो पिछले 25 साल से गुजरात मे भाजपा का दबदबा बना हुआ है और सत्ता में भगवा सरकार की धाक जमी हुई है। वही मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस गुजरात विजय का सपना सजाए हुए यहां पिछले 27 वर्ष से वनवास काट रही है। हालाकि वर्ष 2017 में कांग्रेस ने भाजपा को कांटे की टक्कर दी थी और मुख्य दल के रूप के उभर कर आई थी।
Gujarat chunavi dangal:- कौन बनेगा गुजरात का राजा , यह तय करता है केवल एक वोट बैंक
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अगर हम 2022 चुनाव की बात करें तो इसमे भाजपा को मोदी मैजिक पर विश्वास है और वह इसी मैजिक के बलबूते पर सत्ता में वापसी की तैयारी में है। वही कांग्रेस को इस बार अपने वोट बैंक पर काफी उम्मीदें हैं। कांग्रेस का जो वोट बैंक भाजपा में अपने खेमे में किया था कांग्रेस उसे पुनः पाने की कोशिश में जुट गई है। इस बार वह मुस्लिम को केंद्र में लेकर चल रही है। जहां भाजपा मोदी से विजय तक जाने की उम्मीद में है वही कांग्रेस मुस्लिम वोट बैंक के।बलबूते पर सत्ता का स्वाद चखने की लालसा में है।
गुजरात मे मुस्लिम वोट बैंक की अहम भूमिका है यह वह वोट बैंक है जो यह तय करता है कि आखिर गुजरात मे कौन सी सरकार राज करेगी। क्योंकि गुजरात की 25 विधानसभा सींटो पर मुस्लिम की बहुलता है। करोड़ों की जनसंख्या वाले गुजरात मे 10 फीसदी मुस्लिम वोट बैंक है। जो जिस पार्टी की ओर अपना झुकाव रखता है उसे जीत प्राप्त हो जाती है। अगर हम वर्ष 2017 की बात करे तो गुजरात मे 6 मुस्लिम प्रत्याशी को कांग्रेस की ओर से मैदान में उतारा गया जिसमें से चार को दमदार जीत हासिल हुई। लेकिन भाजपा की रणनीति के चलते 2017 में मुस्लिम वोट बैंक का झुकाव भगवा पार्टी की ओर हुआ और 1 फीसदी के अंतर से भाजपा को जीत हासिल हुई।
2017 में कांग्रेस के खेमें में 6 फीसदी मुस्लिम वोट गया वही भाजपा के खेमे में 7 फीसदी मुस्लिम वोट गया। लेकिन इस समय देश का जो माहौल बना हुआ है हिन्दू मुस्लिम की राजनीति हो रही है इससे कही न कही मुस्लिम भाजपा से रुष्ट है जिसका फायदा गुजरात मे कांग्रेस उम्दा रणनीति का उपयोग कर उठा सकती है।
बता दें गुजरात एक ऐसा राज्य है जहां 10 फीसदी मुस्लिम वोट बैंक होने के बाबजूद भी यह कोई राज्य की विधानसभा में मुस्लिम मंत्री नहीं है जो काफी ताज्जुब की बात है।

