गुजरात चुनावी दंगल: मौके पर चौका मारना चाहते हैं वाघेला

गुजरात चुनावगुजरात चुनावी दंगल: मौके पर चौका मारना चाहते हैं वाघेला

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चुनावों के दौरान नेताओं का पार्टी और आस्थाएं बदलना एक आम बात है. भारतीय राजनीति में आस्था और विचारधारा की बात भले ही की जाती रही हो मगर यह भी हक़ीक़त है कि आरएसएस से निकला आदमी कांग्रेसी बन जाता है और कांग्रेसी विचारधारा का नेता आरएसएस की आईडियालोजी को अपना लेता है, यहाँ बात हो रही है गुजरात चुनाव को लेकर एक खबर की जिसके मुताबिक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से निकलने वाले शंकर सिंह वाघेला जनसंघ, भाजपा, कांग्रेस और दूसरी राजनीतिक पार्टियों में अपना राजनीतिक भविष्य तलाशने के बाद अब एकबार फिर कांग्रेस में जाने की बात कह रहे हैं, शर्त बस इतनी है कि कांग्रेस पार्टी यह वादा करे कि सत्ता में आने के बाद वह शराबबंदी कानून को खत्म करने को तैयार है. 

शंकर सिंह वाघेला गुजरात के बड़े नेताओं में गिने जाते हैं, मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं. चूँकि इन दिनों शराब से हुई मौतों पर गुजरात में बवाल मचा हुआ है. कांग्रेस और आम आदमी पार्टी शराब माफियों को लेकर गुजरात सरकार पर लगातार हमले बोल रही है और सवाल कर रही कि इन माफियाओं को संरक्षण कौन दे रहा है. कल ही राहुल गाँधी ने इस मुद्दे पर भाजपा पर ज़ोरदार हमला बोला है. शराब से हुई मौतों को मुद्दा बनाकर अब वाघेला भी अपनी सियासत को चमकाना चाहते हैं और इसके लिए वह कांग्रेस के प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करना चाहते हैं. हालाँकि कांग्रेस में जाने की बात वह पहले से करते आ रहे हैं लेकिन कांग्रेस पार्टी ने उनके ऑफर का अभी तक कोई जवाब नहीं दिया है.  

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राजनीती भी क्या रंग दिखाती है, गुजरात की पॉलिटिक्स में कभी शंकर सिंह वाघेला एक बहुत बड़ा नाम हुआ करते थे लेकिन आज राजनीति के अखाड़े से बाहर हैं, संभवतः मुख्यधारा की राजनीति से अलग हटने के कारण अब अप्रभावी हो चुके हैं। पिछले एक दशक में तेज़ी से बदलती हुई राजनीति में खुद को एडजेस्ट नहीं कर पा रहे हैं। पर वो नेता ही क्या जो हार मान ले, चुनावी वर्ष में वाघेला एकबार फिर अपनी अहमियत जताने के प्रयास में जुटे हुए हैं. शराब कांड को लेकर वह एक जन अभियान छेड़ना चाहते हैं जिससे वह लोगों का ध्यान अपनी ओर आकृष्ट करा सकें और कांग्रेस पार्टी को मजबूर कर सकें कि उन्हें पार्टी में उचित स्थान देकर उनका सम्मान करे.

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