कभी खुशी-कभी गम में बीते योगी के चार साल

उत्तर प्रदेशकभी खुशी-कभी गम में बीते योगी के चार साल

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कभी खुशी-कभी गम में बीते योगी के चार साल

कार्यकाल का अंतिम वर्ष भी लेगा सीएम योगी की परीक्षा

सुनील शर्मा

न्यूज डेस्क। साल 1998 में योगी आदित्यनाथ पहली बार लोकसभा के लिए चुनकर सबसे युवा सांसद बने थे। बतौर सांसद 5 बार जीत हासिल करने वाले योगी आदित्यनाथ भाजपा के बड़े नेताओं में शुमार हो गये। 2017 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत से जीत हासिल करने के बाद भाजपा ने योगी आदित्यनाथ को बतौर सीएम पेश कर सबको चैंका दिया था। एक योगी, किसी पीठ के महंत को देश के सबसे बड़े राज्य का मुख्यमंत्री बनाने की किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। तब माना जा रहा था कि योगी टाइम पास सीएम हैं और जल्द ही किसी और को सीएम बना दिया जायेगा। मगर यूपी के 24वें सीएम के रूप में शपथ लेने वाले योगी आदित्यनाथ ने बतौर यूपी का मुख्यमंत्री चार साल का कार्यकाल पूरा कर लिया है। वह पहले ऐसे भाजपा मुख्यमंत्री हैं जो उत्तर प्रदेश के सीएम पद पर चार साल तक काबिज रहे हैं। मगर सीएम योगी का चार साल का कार्यकाल काफी उतार-चढ़ाव वाला रहा।

गुंडों-बदमाशों के लिये काल बने सीएम योगी
साधु-संतों जैसे कपड़े पहन कर सात्विक जीवन जीने वाले सीएम योगी आदित्यनाथ यूपी के गुंडों-बदमाशों के लिये काल बन गये। ऐसा पहली बार देखने को मिला जब नामी अपराधी प्रदेश छोड़कर भाग निकले। अपराधियों के घरों से लेकर अवैध निर्माणों को जमींदोज होते देखने की कल्पना भी किसी न नहीं की थी। मुख्तार अंसारी जैसे नामी बदमाश दूसरे प्रदेशों की जेलों में शरण ले चुके हैं। वहीं योगी राज में पुलिस ने ताबड़तोड़ इनकाउंटर कर बदमाशों में अपना खौफ फिर से कायम किया। पिछले चार साल के योगी सरकार के कार्यकाल में कुल 135 अपराधी पुलिस के साथ मुठभेड़ में मारे गए। योगी राज के चार साल में पुलिस के साथ मुठभेड़ में सबसे ज्यादा 18 अपराधी मेरठ जिले में मारे गए। इसके अलावा मुजफ्फरनगर जिले में 13, सहारनपुर जिले में 10, अलीगढ़ जिले में नौ, आजमगढ़ जिले में आठ, गौतमबुद्धनगर (नोएडा) कमिश्नरेट व शामली जिले में छह-छह, बाराबंकी जिले में पांच तथा लखनऊ कमिश्नरेट, कानपुर नगर, गाजियाबाद व बागपत में चार-चार अपराधी मारे गए। बुलंदशहर, बरेली, प्रयागराज, वाराणसी व अमरोहा में तीन-तीन अपराधी मारे गए। बिकरू कांड के बाद योगी सरकार के इकबाल पर विपक्ष ने घेराबंदी की तो विकास दुबे इनकाउंटर पर सवाल भले ही उठे हों लेकिन जनता ने योगी राज की सराहना ही की। जैसे को तैसा वाली नीति पर कार्य करने वाली योगी सरकार ने बदमाशों में खौफ कायम कर कानून का इकबाल बुलंद किया है।

स्वास्थ्य क्षेत्र में किया उल्लेखनीय कार्य
इंसेफेलाइटिस की बीमारी के कारण पूर्वांचल क्षेत्र में बड़े पैमाने पर लोगों की मृत्यु होती थी। गोरखपुर में इंसेफलाइटिस के खिलाफ युद्धस्तर पर मुहिम छेड़ने वाली योगी सरकार के सार्थक प्रयासों से इस आपदा पर नियंत्रण कर मृत्यू दर 91 प्रतिशत कम किया गया है। कोरोना संक्रमण को प्रदेश में रोकने के लिये सीएम योगी लगातार निगाह रखते हुए निर्देश जारी करते रहे। उस दौरान उनके पिता की मृत्यु होने के बाद भी वह अपने कर्तव्यों से विचलित नहीं हुए। सीएम योगी की सख्ती और अधिकारियों पर सीधा नियंत्रण, कोरोना की प्रतिदिन माॅनिटरिंग के चलते उत्तर प्रदेश में कोरोना के प्रसार को रोका जा सका।

प्रयागराज में कुंभ मेले का सफल आयोजन
काशी, प्रयागराज और अयोध्या के विकास में अहम योगदान करने वाली योगी सरकार ने 2019 में प्रयागराज में महाकुंभ का सफल आयोजन किया जिसमें 24 करोड़ श्रद्धालु आये थे। इस विशाल आयोजन में सुरक्षा, स्वच्छता और सुव्यवस्था की तारीफ देश से लेकर विदेश तक हुई। कुंभ मेले के सफल आयोजन को योगी सरकार की बड़ी सफलताओं में शुमार किया जाता है।

उत्तराखंड-यूपी सीमा विवाद को सुलझाया
उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने के साथ ही सीएम योगी आदित्यनाथ ने उत्तराखंड के तत्कालीन सीएम त्रिवेंद सिंह के साथ मिलकर उत्तराखंड-यूपी सीमा विवाद को सुलझाया। इस सीमा विवाद के चलते दोनोें प्रदेशों के विभागों में अक्सर टकराव की स्थिति बन जाती थी। वहीं कुछ इलाके विकास से अछूते रह जाते थे। मगर दोनों राज्यों मेें समझौता हो जाने से एक बड़ी समस्या का समाधान हो गया।

ईज ऑफ डूईंग बिजिनेस में यूपी का दूसरा नंबर
योगी सरकार में उत्तर प्रदेश में व्यापार-उद्योगो का भी विकास हुआ जिससे 35 लाख से अधिक युवाओं को रोजगार मिला है। विश्व बैंक ने भी ईज ऑफ डूईंग बिजिनेस में यूपी को दूसरा नंबर दिया है। यानि आंध्र प्रदेश के बाद उत्तर प्रदेश में उद्योग लगाना या कारोबार करना सबसे आसान है। इस तालिका में पहले यूपी 14वें स्थान पर था। वहीं वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश को जीएसटी के तहत 49 हजार करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ था, जो अब बढ़कर एक लाख करोड़ रूपए हो गया है।

महिलाओं के लिए पुलिस थानों में बनायी हेल्प डेस्क
महिलाओं के लिए 1500 से अधिक पुलिस थानों में मदद कक्ष स्थापित करने से लेकर उनकी सुरक्षा के लिये नये कानून बनाने का कार्य भी योगी सरकार में किया गया। हालांकि हाथरस प्रकरण जैसे मामलों में विपक्ष ने योगी सरकार पर सवाल उठाये और प्रदेश में आंदोलन भी हुए। मगर इन मामलों के अलावा योगी सरकार के अनेक फैसले महिलाओं केे हित में नजर आये।

आगे की राह नहीं आसान
चार साल सीएम रहने वाले योगी आदित्यनाथ के लिये आगे की राह आसान नहीं है। इस चुनावी वर्ष में उनके पास 8 से 10 महीने का ही कार्यकाल बचेगा क्योंकि आचार संहिता लग जाने के बाद वह कोई नयी योजना शुरू करने या कोई बड़ा निर्णय लेने की स्थिति में नहीं होंगे। वहीं अंतिम वर्ष में उन्हें कृषि कानूनों से नाराज किसानों को मनाने का मुश्किल कार्य भी अंजाम देना है। वहीं गन्ना मूल्य भुगतान और एमएसपी पर भी योगी सरकार को सार्थक कदम उठाने होंगे। हाथरस प्रकरण के बाद किसान आंदोलन के चलते एकजुट हुए विपक्ष से मुकाबला करना भी योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकता है। क्योंकि प्रदेश के मुद्दे यदि समय रहते नहीं सुलझाये गये तो आगामी विधानसभा चुनाव में यह भाजपा को मुश्किल में डाल सकते हैं। ऐसे में वर्तमान सीएम पद के अंतिम वर्ष के कार्यकाल में योगी आदित्यनाथ को सिर पर पहने कांटों के ताज के साथ अपने हर कदम को फूंक-फूंक कर उठाना होगा।

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