लाइफस्टाइल डेस्क। Delhi Famous Museum – दिल्ली में एन्जॉयमेंट करने के बहुत से ऑप्शन्स आपको मिल ही जाएंगे, यहां पार्टी करने से लेकर, पिकनिक मनाने तक, शॉपिंग करना हो या फिर स्ट्रीट फूड के मज़े सब यहां पर मौजूद हैं। लेकिन क्यों न इस बार कुछ अलग करे ,आप इस बार दिल्ली के इन यूनिक म्यूज़िम्स को देखने का प्लान करे। यकीन मानिए, यहां भी आपको मौजमस्ती करने को मिलेगी। चलिए जानते है।
रेल म्यूज़ियम

रेल म्यूज़ियम भारतीय रेलवे की प्राचीन विरासत दिखता है, ये 1 फरवरी, 1977 को स्थापित हुआ था। ये भारत की पुरानी रेलवे विरासत को संरक्षित करने के उदेश्य से बनाया गया था। यहां आपको भारतीय रेलवे के फर्नीचर समेत करीब 100 से भी ज्यादा चीज़ों को देखने का मौका मिलेगा। यहां आप मौज-मस्ती कर सकते है और चाहें तो ट्रेन की सवारी भी कर सकते हैं। ये सुबह 9.30 बजे से 5.30 बजे तक ही खुला होता है और सोमवार को यह बंद रहता है।
Read also: Best Travel Places For Girls: लड़कियों के लिए बेस्ट हैं ये जगहें, करे यहां ट्रिप प्लान!
डॉल म्यूजियम

डॉल म्यूजियम बच्चों को घुमाने के लिए परफेक्ट है, यहां उन्हें डॉल्स का कलेक्शन देखने को मिलेगा। 85 देशों की 6500 गुड़ियां इस म्यूज़ियम में हैं, साल 1965 में मशहूर कॉर्टूनिस्ट के. शंकर पिल्लई ने स्थापना की गई थी। बता दे, म्यूज़ियम के दो हिस्सों में गुड़ियां रखी गई हैं, जिसमे पहले में इग्लैंड, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और राष्ट्र मंडल देशों की गुड़ियां हैं और दूसरे में अफ्रीका, मध्यपूर्व और एशियाई देशों की गुड़ियां रखी हैं। ये सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक ही खुला होता है और सोमवार को यह बंद रहता है।
नेशनल हैंडीक्रॉफ्ट एंड हैंडलूम म्यूज़ियम

नेशनल हैंडीक्रॉफ्ट एंड हैंडलूम म्यूज़ियम दिल्ली-एनसीआर के सबसे बड़े क्रॉफ्ट म्यूज़ियम्स में से एक है, यहां लगभग 35,000 तरह के क्रॉफ्ट देखे जा सकते हैं। इसके अलावा, यहां पेंटिंग्स, कढा़ई, वुडन, क्ले वर्क और स्टोन क्रॉफ्ट की खूबसूरती देखने को मिल जाएगी। ये सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक ही खुला होता है और सोमवार को यह बंद रहता है।
Read also: देश का 52वां टाइगर रिजर्व बना Ramgarh Vishdhari Wildlife Sanctuary
टॉयलेट म्यूज़ियम

टॉयलेट म्यूज़ियम सन् 1992 में सामाजिक कार्यकर्ता, डॉक्टर बिंदेश्वर पाठक ने स्थापित किया था, इसमें 2500 ईसा पूर्व से आज तक के शौचालय के एतिहासिक विकास और तथ्यों का ब्यौरा मिलता है। यहां आपको शौचालय से जुड़े समाज के रीति-रिवाजों, शौचालय के शिष्टाचार और अलग-अलग तरह के शौचालयों से संबंधित घटनाओं के बारे में जानकारी मिलेगी। इसके अलावा, 1145 ईसवी से लेकर वर्तमान समय तक के निजीकरण, चैंबर पॉट्स, टॉयलेट फ़र्नीचर, बिडेट्स और वाटर क्लोसेट भी देखे जा सकते है। ये सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक ही खुला होता है और रविवार को यह बंद रहता है।

