59 साल बाद गणेश चौथ पर बन रहा बेहद विशेष योग, रवि और ब्रह्म योग में होगा पार्वती नन्दन का वंदन

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59 साल बाद गणेश चौथ पर बन रहा बेहद विशेष योग, रवि और ब्रह्म योग में होगा पार्वती नन्दन का वंदन

सर्वप्रथम पूजनीय, देवों के देव, पार्वती नंदन श्री गणेश की महिमा अपरंपार है। इनकी कृपा पाने के लिए देशभर में 10 सितंबर को गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्य और पंडितों के अनुसार इस साल गणेश चतुर्थी पर कई शुभ योग बन रहे हैं। जिसका सकारात्मक प्रभाव दिखाई देगा। ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि इस गणेश चतुर्थी पर वही योग बन रहे हैं जो अब से 59 साल पहले बने थे। 1962 में ऐसे ही योग में गणेश चतुर्थी पड़ी थी। इस बार चित्रा नक्षत्र का योग भी बन रहा है।

ब्रह्म और रवियोग में होगी स्थापना

इस साल गणेश चतुर्थी पर ब्रह्म और रवि योग बन रहे हैं। भगवान गणेश की स्थापना इन्हीं योगों में की जाएगी। ज्योतिष बताते हैं कि इस बार चित्रा नक्षत्र में चंद्रमा तुला राशि में शुक्र के साथ युति कर रहा है। गुरु व शनि कुम्भ राशि मे वक्री रहेंगे।

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चंद्रमा के दर्शन रहेंगे वर्जित

गणेश चतुर्थी या गणेश चौथ पर चंद्रमा के दर्शन वर्जित माने जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस दिन चंद्रमा के दर्शन करने से व्यक्ति किसी कलंक का शिकार हो सकता है। हालांकि ज्योतिष बताते हैं कि अगर गलती से चंद्रमा के दर्शन किसी के द्वारा कर लिए जाते हैं तो इसका उपाय भी है। चंद्रमा के दर्शन करने के बाद व्यक्ति अगर जमीन से कंकड़ उठा कर अपने सिर से पीछे की ओर फेंक दें तो वह इस कलंक दोष से मुक्त रहता है। गणेश चतुर्थी पर भगवान श्री गणेश की पूजा करते हुए यह भी ध्यान रखना चाहिए कि उन्हें भोग में तुलसी न अर्पित की जाए। ऐसी मान्यता है कि गणेश जी ने तुलसी को श्राप दिया था।

इस महूर्त में करें पूजा

गणेश चतुर्थी पर घर में या पंडालों में गणेश जी की स्थापना की जाती है। ज्योतिषियों के अनुसार इस साल दोपहर 12:00 बजे से लेकर 1:00 बजे के बीच स्थापना का शुभ मुहूर्त रहेगा। हालांकि चतुर्थी तिथि 9 सितंबर को ही रात 12 बजकर 18 मिनट से शुरू हो जाएगी। जबकि इसका समापन 10 सितंबर को रात 9:00 बजकर 57 मिनट पर होगा। पूजन करते समय भगवान श्री गणेश को लाल कपड़े पर स्थापित करना चाहिए। इसके बाद उन्हें फल,फूल,जनेऊ,सिंदूर , दूर्वा और मोदक का भोग लगाना चाहिए। बाद में विधि विधान से श्री गणेश कथा व चालीसा का पाठ कर आरती के साथ पूजा का समापन करना चाहिए।

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