भविष्य में भगवान् बद्रीविशाल, बद्रीनाथ में नहीं यंहा देंगे दर्शन, जानिए रहस्य

धर्मभविष्य में भगवान् बद्रीविशाल, बद्रीनाथ में नहीं यंहा देंगे दर्शन, जानिए रहस्य

Date:

चमोली।  उत्तराखंड की चारधाम यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण धाम बद्रीनाथ धाम में भगवान् विष्णु भविष्य में यंहा दर्शन नहीं देंगे। धार्मिक मान्यताओं की माने की जब जय और विजय पर्वत आपसे में मिल जायेंगे तो भगवान् बद्रीविशाल का दर्शन स्थान बहुत ही दुर्गम हो जायेगा. ऐसे में वंहा यात्रियों का पहुँचाना लगभग असंभव हो जायेगा। तब भगवान् बद्रीनारायण भविष्य बद्री में भक्तो को दर्शन देंगे। चमोली जिले में स्थित इस स्थान को भविष्य बद्री के नाम से जाना जाता है। आज हम आपको भविष्य बद्री का रहस्य और उससे जुडी हुई मान्यताओं के बारे में बताएँगे और बताएँगे भविष्य बद्री क्यों है सभी के आकर्षण का केंद्र।

भगवान् बद्रीविशाल

धार्मिक मान्यताओं के बीच भविष्य बद्री

बद्री को भविष्य का बदरीनाथ धाम माना जाता है. भविष्य बद्री को लेकर माना जाता है की कलयुग की शुरुआत में जोशीमठ नरसिंह की मूर्ति का कभी न नष्ट होने वाला हाथ अंततः गिर जाएगा. लोग बताते है की नरसिंह की मूर्ति की कलाई धीरे धीरे पतली होती जा रही है। इसके आलावा जब विष्णुप्रयाग के पास जय और विजय पर्वत एक हो जायेंगे। जिसके बाद बद्रीधाम जाने का रास्ता और भी दुर्गम हो जायेगा. ऐसे में भविष्य बद्री में बद्रीनाथ की पूजा की जाएगी विष्णु के अवतार कल्की कलयुग को समाप्त करेंगे तथा पुनः सतयुग की शुरुआत होगी इस समय बद्रीनाथ धाम को भविष्य बद्री में पुनार्स्तापित किया जायेगा। लोक मान्यताओं और sस्थानीय लोगों के अनुसार देवदार के घने जगलों के बीच स्थित मंदिर में दिव्य एवं आकर्षित रूप में भगवान् बद्रीनाथ की मूर्ति दृस्टिगत होने लगी है. स्थानीय लोगों का कहना है की लोक मान्यता में जो बात कही गई है वह समय के साथ स्पष्ट होती दिख रही है. शायद यही वजह है की हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए यंहा पहुंचते है।

Read also: आज है रंभा तृतीया व्रत, जानें पूजाविधि-

 कैसे पहुँचे भविष्य बद्री? 

चमोली जिले के जोशीमठ से करीब 17 किलोमीटर दूर, तपोवन से दूसरी तरफ है और धौलीगंगा नदी के ऊपर भविष्य बद्री का पवित्र स्थान है। घने जंगलो के बीच स्थित भविष्य बद्री  तक पहुँचने के लिए धौली नदी के किनारे के कठिन रास्ते को पार करना होता है। भविष्य बद्री उत्तराखंड के पंचबद्री बद्रीनाथ, योग-ध्यान बद्री, आदि बद्री, वृद्ध बद्री में शामिल है.जोशीमठ से सड़क मार्ग स तपोवन के पास रिंगी गाँव फिर वंहा से 5 किलोमीटर सलधार पहुँचाना है. वंहा पैदल करीब 6 किलोमीटर का सफर देवदार के घने जगलो से होते हुए मंदिर तक पहुँचाना होता है. घने जंगलो के बिच मंदिर की छटा अपने आप में अद्भुत दिखाई पड़ती है।

Share post:

Subscribe

Popular

More like this
Related