पंजाब और राजस्थान में पार्टी नेताओं की आपसी कलह का सामना कर रही कांग्रेस के लिए मुश्किलों का दौर अभी खत्म नहीं हुआ है। जम्मू-कश्मीर में होने वाले चुनाव से पहले कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद के समर्थक माने जा रहे कांग्रेस संगठन के पदाधिकारियों ने अपने-अपने पदों से इस्तीफा पार्टी के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
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घाटी में महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम में जीएम सरूरी जुगल किशोर शर्मा विकास विकार रसूल डाॅक्टर मनोहर लाल शर्मा गुलाब नबी मंगा मूंगा नरेश गुप्ता सुभाष गुप्ता अमित भट्ट अनवर भट्ट इनायत अली तथा अन्य नेताओं ने
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को लिखे पत्र में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीए मीर पर अनेक आरोप लगाए हैं। कांग्रेस अध्यक्ष को पत्र के माध्यम से बताया गया कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की अध्यक्षता में कांग्रेस संगठन लगातार पिछड़ता जा रहा है। पार्टी अध्यक्ष पर मनमानी करने का आरोप लगाते हुए इन नेताओं ने अनदेखी करने का आरोप भी लगाया है।
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गौरतलब है कि भाजपा सहित अन्य राजनीतिक दल घाटी में अपना वोट बैंक मजबूत करने में जुटे हैं। लेकिन चुनाव से पहले अंदरूनी कलह का सामना कर रही कांग्रेस के लिए यह मुश्किलों भरा दौर है। हाल ही में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के घाटी का दौरा किए जाने के बावजूद पार्टी की अंदरूनी कलह खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। कांग्रेस नेताओं के इस्तीफे ने पार्टी संगठन में हलचल मचा दी है। माना जा रहा है कि जल्द ही अन्य नेता भी इस्तीफा दे सकते हैं जिससे पार्टी की मुश्किलें और बढ़ेंगी।
खास बात यह है कि पार्टी संगठन के पदों से इस्तीफा देने वाले यह पदाधिकारी पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद के खेमे के हैं। ऐसे में संभावना है कि गुलाम नबी आजाद का समर्थन भी इन नेताओं को हो सकता है। यह चिंता पार्टी के लिए मुश्किलें बढ़ाने वाली है।

