लखनऊ। केंद्र सरकार ने 2022 का आम बजट पेश कर दिया है। पांच राज्यों में चुनावी मौसम को देखते हुए उम्मीद जताई जा रही थी कि इस बजट में आम आदमी के लिए बहुत कुछ होगा। लेकिन यह बजट बहुत ज्यादा उत्साह भरने वाला नहीं दिख रहा है। मध्यमवर्ग को उम्मीद थी कि आयकर में छूट मिलेगी कम से कम टैक्स स्लैब में बढ़ोतरी की जाएगी। लेकिन इस वजह से उन्हें निराशा ही हाथ लगी है। इसके अलावा खासकर सरकारी कर्मचारियों को उनकी उम्मीद के मुताबिक राहत नहीं मिली है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट पेश करते हुए कर्मचारियों को नेशनल पेंशन स्कीम में योगदान पर 14 परसेंट तक की टैक्स राहत देने का ऐलान किया है जो कि राज्य कर्मचारियों को जिस का 10 परसेंट लाभ मिल रहा था उसको भी बढ़ाकर 14% कर दिया गया है। इससे राज्य सरकार के कर्मचारियों को भी केंद्र की तरह एनपीएस योगदान पर टैक्स में छूट मिलेगी। हालांकि कर्मचारियों की उम्मीद थी कि पुरानी पेंशन को लेकर भी इसमें कुछ ऐलान किए जा सकते हैं लेकिन उन्हें निराशा हाथ लगी है।
Read also: केंद्रीय बजट सकारात्मक, स्वागतयोग्य : नीतीश
फार्मेसिस्ट फेडरेशन उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष और राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद यूपी के प्रमुख उपाध्यक्ष सुनील यादव ने कहा कि मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस, निजीकरण से कर्मचारी कल्याण संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि कोरोना की लहर के बीच जिस तरीके से स्वास्थ्य सेवाएं कोलैब्स हुई थी उसको देखते हुए स्वास्थ्य क्षेत्र को बढ़ावा देने की जरूरत थी लेकिन इस बजट में ऐसा कुछ दिखा नहीं है। उन्होंने कहा कि इतना ही नहीं फिर पुरानी पेंशन की आस भी टूटी है साथ ही आयकर में कोई राहत नहीं देने से कर्मचारियों का एक बड़ा वर्ग हताश भी हुआ है। सुनील यादव ने कहा कि अस्थाई पदों के सृजन करने की कोई योजना नहीं है, निजीकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है जो जनहित में तो कभी हो ही नहीं सकता। उन्होंने कहा कि फार्मा सेक्टर और स्वास्थ्य क्षेत्र को भी कोई विशेष बढ़ावा देने की योजना नहीं दिखाई दे रही है।
Read also: यूपी चुनाव : पार्टियां प्रचार के लिए बना रही है गाने
सुनील यादव ने कहा कि आयकर स्लैब में कोई बदलाव नहीं हुआ है, जो कि कर्मचारियों की मांग थी कि 10 लाख तक की आय को टैक्स फ्री किया जाए। लेकिन निराशा ही हाथ लगी है। इसके अलावा निजीकरण और आउटसोर्सिंग की जगह स्थाई रोजगार सृजन करने की मांग की जा रही थी, लेकिन सरकार ने निजी निवेश को बढ़ाने का फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का यह बजट साफ कहता है कि व कर्मचारियों को दोयम दर्जे का नागरिक मानती है यही कारण है कि इस बजट में उनके लिए कुछ भी विशेष प्लान नहीं है।

