‘सुपर अल नीनो’ का बढ़ता खतरा: भारत में कमजोर मानसून, दुनिया के कई हिस्सों में सूखा-बाढ़ का संकट गहराने के आसार

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प्रशांत महासागर में तेजी से बढ़ रही गर्मी ने बढ़ाई चिंता, मौसम वैज्ञानिकों ने जताई शक्तिशाली अल नीनो की आशंका।
खेती, खाद्य सुरक्षा और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है असर, भारत में बारिश घटने और महंगाई बढ़ने का खतरा।

वॉशिंगटन। दुनिया के मौसम पर असर डालने वाली अल नीनो प्रणाली एक बार फिर सक्रिय होती दिखाई दे रही है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशांत महासागर में तेजी से बढ़ रही समुद्री गर्मी आने वाले महीनों में एक शक्तिशाली अल नीनो का रूप ले सकती है, जिससे एशिया, अमेरिका और अफ्रीका समेत कई क्षेत्रों में मौसम का संतुलन बिगड़ सकता है। इसका असर भारत के मानसून, कृषि उत्पादन और खाद्य कीमतों तक पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

वैज्ञानिकों के अनुसार पिछले कुछ महीनों में भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर का तापमान लगातार बढ़ा है। उपग्रहों से मिले संकेत बताते हैं कि समुद्र के भीतर गर्म पानी की विशाल लहरें तेजी से पूर्व की ओर बढ़ रही हैं। यही स्थिति अल नीनो के मजबूत होने का प्रमुख संकेत मानी जाती है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि वर्ष 2027 तक यह घटना बेहद शक्तिशाली स्वरूप भी ले सकती है।

अल नीनो वह स्थिति है जब प्रशांत महासागर की सतह का तापमान सामान्य से काफी अधिक हो जाता है। इससे वैश्विक वायुमंडलीय परिसंचरण प्रभावित होता है और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में मौसम के चरम रूप देखने को मिलते हैं। कुछ क्षेत्रों में वर्षा सामान्य से बहुत कम होती है, जबकि कई इलाकों में अत्यधिक बारिश और बाढ़ की स्थिति पैदा हो जाती है।

भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता मानसून को लेकर है। अल नीनो का सीधा असर दक्षिण-पश्चिम मानसून पर पड़ता है और कई बार इसके कारण औसत से कम बारिश दर्ज की जाती है। यदि ऐसा होता है तो खरीफ फसलों के उत्पादन पर दबाव बढ़ सकता है। धान, दालों और तिलहन जैसी फसलें प्रभावित होने से खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका भी बढ़ जाएगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण-पूर्व एशिया और उत्तरी अमेरिका के कुछ हिस्सों में सूखे और जंगलों में आग की घटनाएं बढ़ सकती हैं, जबकि दक्षिण अमेरिका और पूर्वी अफ्रीका के कई क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है। इसके अलावा समुद्री सतह का तापमान बढ़ने से उष्णकटिबंधीय तूफानों की तीव्रता भी बढ़ सकती है।

जलवायु वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि अल नीनो अपेक्षा से अधिक मजबूत हुआ तो वैश्विक तापमान नए रिकॉर्ड बना सकता है। ऐसे में कृषि, जल संसाधन, ऊर्जा आपूर्ति और महंगाई पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। दुनिया पहले से ही कई आर्थिक और भू-राजनीतिक चुनौतियों से जूझ रही है, ऐसे में अल नीनो की संभावित दस्तक को गंभीर चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।

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