नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पीएम मोदी सरकार को घेरा; रायबरेली में कहा— आने वाले दिनों में युवाओं, किसानों और छोटे व्यापारियों पर पड़ेगी सबसे बड़ी चोट।
लखनऊ/रायबरेली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने रायबरेली दौरे के दौरान केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों पर बड़ा हमला बोलते हुए देश को “आने वाले आर्थिक झटके” के लिए आगाह किया। राहुल गांधी ने कहा कि महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक असमानता की स्थिति आने वाले महीनों में और गंभीर हो सकती है तथा इसका सबसे ज्यादा असर युवाओं, किसानों, मजदूरों और छोटे व्यापारियों पर पड़ेगा।
रायबरेली में आयोजित जनसंवाद कार्यक्रम में राहुल गांधी ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था ऐसे दौर में पहुंच रही है जहां आम आदमी की मुश्किलें और बढ़ेंगी। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा आर्थिक ढांचा कुछ चुनिंदा उद्योगपतियों को फायदा पहुंचा रहा है, जबकि मध्यम वर्ग और गरीब तबका लगातार दबाव में है। कांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार असली आर्थिक सवालों से ध्यान हटाने की कोशिश कर रही है।
राहुल गांधी ने कहा कि आने वाला संकट बड़े उद्योगपतियों को ज्यादा प्रभावित नहीं करेगा, लेकिन छोटे दुकानदार, मजदूर, किसान और नौकरी की तलाश में भटक रहे युवा इसकी सबसे बड़ी कीमत चुकाएंगे। उन्होंने बढ़ती ईंधन कीमतों, रोजमर्रा की वस्तुओं की महंगाई और रोजगार संकट को सरकार की “विफल आर्थिक नीति” का परिणाम बताया।
उन्होंने प्रधानमंत्री के विदेशी दौरों पर भी सवाल उठाए और कहा कि जब देश में महंगाई और बेरोजगारी बढ़ रही है तब सरकार को जनता की समस्याओं पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि आर्थिक चुनौतियों के बावजूद सरकार “इमेज मैनेजमेंट” में ज्यादा व्यस्त दिखाई देती है।
राहुल गांधी ने अपने संबोधन में युवाओं के रोजगार संकट का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि लाखों पढ़े-लिखे युवा नौकरी के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जबकि छोटे व्यापारी बाजार में टिके रहने की लड़ाई लड़ रहे हैं। उनके मुताबिक महंगाई और बेरोजगारी का संयुक्त असर आने वाले समय में सामाजिक और आर्थिक दबाव को और बढ़ा सकता है।
दौरे के दौरान राहुल गांधी ने रायबरेली में कई स्थानीय विकास कार्यों का उद्घाटन भी किया। उन्होंने सड़क परियोजनाओं और सामुदायिक विवाह भवन का लोकार्पण किया तथा स्थानीय नागरिकों और पार्टी कार्यकर्ताओं से मुलाकात की। बड़ा मंगल के अवसर पर उन्होंने चुरुवा हनुमान मंदिर में दर्शन भी किए।
उधर भाजपा ने राहुल गांधी के बयान को “नकारात्मक राजनीति” बताते हुए खारिज किया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था में तेजी से आगे बढ़ रहा है और सरकार निवेश, इंफ्रास्ट्रक्चर तथा रोजगार सृजन पर लगातार काम कर रही है। भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस जनता में डर पैदा करने की कोशिश कर रही है।
हालांकि विपक्षी दलों का कहना है कि महंगाई और बढ़ते घरेलू खर्च को लेकर आम लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। ऐसे माहौल में रायबरेली से राहुल गांधी की “आर्थिक संकट” वाली चेतावनी आने वाले राजनीतिक संघर्ष की नई दिशा तय कर सकती है।
बॉक्स स्टोरी
राहुल गांधी पहले भी क्यों उठाते रहे हैं महंगाई का मुद्दा?
राहुल गांधी पिछले कई वर्षों से महंगाई और बेरोजगारी को केंद्र सरकार के खिलाफ सबसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाते रहे हैं। भारत जोड़ो यात्रा के दौरान उन्होंने लगातार दावा किया था कि आम परिवारों की रसोई पर सबसे बड़ा हमला बढ़ती कीमतों ने किया है। उस समय राहुल गांधी ने गैस सिलेंडर, पेट्रोल-डीजल, खाद्य तेल और दालों की बढ़ती कीमतों को लेकर केंद्र सरकार को घेरा था।
संसद में भी राहुल गांधी कई बार यह कह चुके हैं कि नौकरी की कमी और महंगाई ने मध्यम वर्ग की कमर तोड़ दी है। उन्होंने नोटबंदी और जीएसटी को छोटे व्यापारियों के लिए नुकसानदायक बताते हुए कहा था कि इन फैसलों से छोटे कारोबारी कमजोर हुए जबकि बड़े कॉरपोरेट समूह मजबूत होते गए।
2024 और 2025 के चुनावी अभियानों में भी कांग्रेस ने “महंगाई और बेरोजगारी” को मुख्य मुद्दा बनाया। राहुल गांधी का लगातार यह आरोप रहा कि सरकार आर्थिक विकास के बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर आम आदमी की आमदनी और खर्च के बीच का अंतर तेजी से बढ़ रहा है।
रायबरेली से क्यों दिया गया बड़ा आर्थिक संदेश?
रायबरेली गांधी परिवार का पारंपरिक राजनीतिक गढ़ माना जाता है। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक राहुल गांधी ने यहां से आर्थिक संकट और महंगाई का मुद्दा उठाकर सीधे उत्तर प्रदेश के युवाओं, किसानों और छोटे व्यापारियों को साधने की कोशिश की है। आने वाले चुनावी मुकाबलों से पहले कांग्रेस आर्थिक मुद्दों को केंद्र में रखकर भाजपा को घेरने की रणनीति पर काम करती दिखाई दे रही है।

