नीरज चोपड़ा: वन्स इन ए जेनेरेशन एथलीट

आर्टिकल/इंटरव्यूनीरज चोपड़ा: वन्स इन ए जेनेरेशन एथलीट

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तौकीर सिद्दीक़ी
नीरज चोपड़ा कल पेरिस में गोल्ड नहीं जीत सके, बकौल नीरज कल अरशद नदीम का दिन था. नीरज ने अपना सीजन बेस्ट दिया जो उनके कैरियर बेस्ट के काफी करीब था जिसने उन्हें ओलम्पिक का सिल्वर मैडल दिलाया। नीरज की झोली में अब दो ओलम्पिक मेडल आ गए. टोक्यों में उन्होंने गोल्ड जीता था. पेरिस में उन्होंने टोक्यो से भी ज़्यादा डिस्टेंस कवर किया, इसके बावजूद वो सिल्वर तक पहुँच पाए क्योंकि पाकिस्तान के अरशद नदीम ने कल की रात कुछ ऐसा कर दिखाया जो एक खिलाड़ी अपनी लाइफ में एक दो बार ही कर पाता है. फासला इतना ज़्यादा था कि नीरज ही नहीं बल्कि दूसरे थ्रोअर भी टोक्यो से बेहतर प्रदर्शन करने के बावजूद काफी पीछे रह गए. बहरहाल अरशद नदीम को उनकी कामयाबी के लिए बधाई मगर जहाँ तक नीरज की बात है तो लगातार दो ओलम्पिक में मैडल जीतना कोई मज़ाक नहीं है. व्यक्तिगत स्पर्धाओं में गिने चुने एथलीट ही इस मुकाम पर पहुँच पाते हैं, पुरुषों में भारत से अबतक पहलवान सुशील कुमार ही पहुँच पाए हैं।

ओलम्पिक में मेडल जीतना ही बहुत बड़ी बात होती है और सिल्वर जीतना तो और भी बड़ी बात है. दरअसल नीरज के सिल्वर से देश में उतनी ज़्यादा ख़ुशी इसलिए भी नहीं दिखाई दे रही है क्योंकि हर कोई मान बैठा था कि नीरज चोपड़ा की टक्कर में कोई नहीं है और उसका गोल्ड मेडल जीतना पक्का है. दूसरे नीरज चोपड़ा ने पिछले कुछ सालों में इतने शानदार परफार्मन्स दिए हैं कि लोगों को उनसे गोल्ड की आदत सी पड़ गयी थी, यही वजह है कि जितना जश्न मनु भाकर के ब्रॉन्ज़ जीतने पर हुआ उतना नीरज के सिल्वर मेडल पर नहीं हुआ, कहीं न कहीं लोगों के दिलों में एक कसक सी है और वो कसक शायद इसलिए भी है क्योंकि स्वर्ण पदक पाकिस्तान के अरशद नदीम ले गए और किसी पाकिस्तानी खिलाड़ी के हाथों हारना हम भारतीय आसानी से स्वीकार नहीं कर पाते। हालाँकि नीरज चोपड़ा और अरशद नदीम में काफी गहरी दोस्ती है और दोनों एक दूसरे का काफी सम्मान करते हैं, अरशद तो नीरज को अपना आदर्श भी मानते हैं. दोनों के पीछे काफी अच्छी बॉन्डिंग रहती है, यही वजह है कि नीरज ने पोडियम पर दूसरी पायदान पर रहने पर अरशद के बारे में जो कहा उससे उनकी महानता और स्पोर्ट्समैनशिप झलकती है।

नीरज ने कहा कि कल अरशद का दिन था और बिलकुल सही कहा क्योंकि एक ही दिन में दो बार 90 मीटर से ज़्यादा थ्रो कोई ज्वेलिन थ्रोअर तभी फेंक सकता है जब वाकई में उसका दिन हो. ओलम्पिक रिकॉर्ड तोडना कोई मामूली बात नहीं होती, 16 साल बाद ओलम्पिक रिकॉर्ड टूटा है. नीरज की माँ ने भी अरशद की जीत पर जो बात कही वो सिर्फ एक माँ ही कह सकती है. जिस खिलाडी से बेटा हार गया उसे अपने बेटे जैसा बताना, सचमुच में बहुत बड़ी और बड़े दिल की बात है। इससे लगता है कि नीरज की परवरिश कितने अच्छे माहौल में हुई है और उसकी झलक नीरज के व्यवहार और बातचीत में भी साफ़ नज़र आती है। नीरज ने 26 की उम्र में बहुत कुछ हासिल कर लिया लेकिन अभी और भी बहुत कुछ हासिल करने की उनमें भूख बची हुई है। नीरज का मानना है कि अभी उनमें और दूर तक जाने की क्षमता बची हुई है।

पेरिस में नीरज गोल्ड से चूके और क्यों चूके इसकी वजह भी सामने आ चुकी है. पेरिस में पूरी तरह फिट नीरज नहीं पहुंचा था, इस बात का खुलासा खुद उसने किया कि वो इंजरी से जूझ रहा है, उसे थ्रो करने में परेशानी हो रही है और ये बात कल रात साफ़ नज़र आ रही थी क्योंकि 6 प्रयासों में उसके पांच प्रयास अयोग्य घोषित किये गए, नीरज बार बार लाइन के पार निकल रहे थे, दिख रहा था वो नियंत्रण में नहीं हैं और उनके चेहरे का गुस्सा इस बात की पुष्टि कर रहा था. नीरज ने जब अपने दूसरे प्रयास में 89.45 मीटर की दूरी तय की तब लगा कि वो इस बार 90 की बाधा पार कर लेंगे लेकिन उनकी लय बिगड़ती गयी और गोल्ड उनसे दूर होता गया.

अब उनकी लड़ाई खुद से शुरू हो चुकी है, नीरज के सामने अब लक्ष्य दूरी का है, मेडल का नहीं। दूरी मिलेगी तो मनचाहा मेडल भी मिलेगा। नीरज ने इस बात को कहा भी है कि वो दूरी बढ़ाने की तैयारी करेंगे जिसके लिए उन्हें अपनी फिटनेस पर ज़्यादा ध्यान देना होगा। पेरिस के लिए वो उतनी तैयारी करके नहीं गए थे. बेशक टोक्यो से उनका प्रदर्शन और बेहतर हुआ है लेकिन ये सबके साथ हुआ है. टोक्यो में जो डिस्टेंस पाकर नीरज ने गोल्ड जीता था, उस डिस्टेंस से ज़्यादा कई लोगों ने पेरिस में भाला फेंका मगर मेडल की रेस में भी नहीं पहुँच सके. नीरज को मालूम है कि 2028 के ओलम्पिक में सभी का स्तर और ऊंचा होगा शायद तीनों मेडल्स का फैसला 90 मीटर से ज़्यादा पर हो, ऐसे में उनकी पहली प्राथमिकता 90 मीटर के पार जाने की होगी जिसे वो अबतक पार नहीं कर पाए हैं। नीरज में ऐसा करने की पूरी क्षमता है क्यों वो वंस इन ए जेनेरशन वाले एथलीट हैं.

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