आए दिन अपने बयानों की वजह से विवादों में बने रहने वाले समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव स्वामी प्रसाद मौर्य ने भेदभाव का आरोप लगाते हुए समाजवादी पार्टी के महासचिव पद से इस्तीफ़ा दे दिया है. उन्होंने सपा प्रमुख अखिलेश यादव को एक लम्बा चौड़ा पत्र भेजा जिसमें इस बात का ज़िक्र किया उन्होंने इस्तीफ़ा क्यों दिया है. उन्होंने पार्टी में भेदभाव का आरोप लगाया। स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि पार्टी मेरे बयानों को निजी बता रही है. सच्चाई तो ये है कि मेरे बयानों से ही सपा का जनाधार बढ़ा है और जिन बयानों से पार्टी का जनाधार बढ़ा है वो सिर्फ मेरे निजी बयान कैसे हो सकते हैं। लोकसभा चुनाव से पहले स्वामी प्रसाद मौर्य का पार्टी पद छोड़ना सपा के लिए एक झटका माना जा रहा है. हालाँकि उन्होंने पार्टी में बने रहने की बात भी कही है.
स्वामी प्रसाद मौर्य ने दावा किया कि उनकी मेहनत की वजह से पिछले विधान सभा चुनाव में सपा कि 110 सीटें आयी वरना पहले तो सीटों की संख्या काफी नीचे जा चुकी थी. उन्होंने कहा कि वो पार्टी के महासचिव है तो फिर पार्टी के दूसरे नेता उनके बयानों को निजी क्यों बता रहे हैं. स्वामी प्रसाद मौर्य ने समाजवादी पार्टी में महासचिव पद को महत्वहीन भी बताया और कहा कि ऐसे पद पर बैठे रहना उनके लिए ठीक नहीं है. उन्होंने इसके अलावा ये आरोप भी लगाए कि उनके द्वारा दिए सुझावों पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है. उन्होंने पत्र में लिखा कि उनके सुझावों पर क्रियान्यवन का आश्वान तो दिया जाता है लेकिन होता नहीं है जिससे वो काफी दुखी हैं.
उन्होंने अपने पत्र में लिखा कि उन्होंने भाजपा के धार्मिक पाखंड को ज़ोरदार तरीके से उठाया। भाजपा के जाल में फंस रहे दलितों और आदिवासियों को बचाने का काम किया, उनके स्वाभिमान को जगाने का काम किया। उन्हें भाजपा के चगुल से निकालकर सपा की तरफ लेकर आये. इस सबके बावजूद पार्टी के अंदर ही लोग मेरा विरोध कर रहे हैं, मेरे बयानों को निजी बताकर पल्ला झाड़ रहे हैं।

