Rajasthan Election 2023:राजस्थान में दिलचस्प मतदान,दलों पर क्या भारी पड़ेंगे निर्दलीय?

आर्टिकल/इंटरव्यूRajasthan Election 2023:राजस्थान में दिलचस्प मतदान,दलों पर क्या भारी पड़ेंगे निर्दलीय?

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अमित बिश्‍नोई

पांच राज्यों के चुनावों में लोगों की सबसे ज़्यादा दिलचस्पी राजस्थान (Rajasthan Election 2023)को लेकर रही क्योंकि इस राज्य में पिछले तीस वर्षों से बदलाव की राजनीति होती आयी है और यहाँ का मतदाता हर बार सरकार बदल देता है , कभी भाजपा तो कभी कांग्रेस, किसी और पार्टी का यहाँ कोई स्थान नहीं हैं. कल राजस्थान में मतदान सम्पन्न हो चुका है. उम्मीदवारों और पार्टियों की किस्मत EVM में बंद हो चुकी है, तीन दिसंबर को नतीजा आएगा कि बदलाव की बयार जारी रहेगी या फिर अशोक गेहलोत कोई जादू दिखाने में कामयाब होकर इतिहास रचेंगे।

कल राजस्थान में चुनाव आयोग से मिली जानकारी के मुताबिक 74.13 प्रतिशत वोटिंग हुई जो कमोबेश 2018 के चुनाव जैसी ही रही, 2018 में जब वसुंधरा सरकार बदली थी तब 74.06 प्रतिशत पोलिंग हुई है ऐसे में दोनों ही तरफ से सरकार बनाने के दावे अभी से किये जाने लगे हैं. मतदान भले ही भारी हुआ है लेकिन इसमें कोई ज़्यादा बदलाव नहीं है ऐसे में वोटर किधर जा रहा है अंदाज़ लगाना काफी मुश्किल है।

कल जब शाम के समय पोलिंग बूथों पर लम्बी लम्बी लाइने देखी गयीं और बहुत सी जगह देर शाम तक पोलिंग हुई तब टीवी और सोशल मीडिया चीख चीखकर कह रहे थे कि इसबार पोलिंग 80 प्रतिशत से ज़्यादा हुई है ऐसे में बदलाव साफ़ नज़र आ रहा है. कहा जा रहा था कि बढ़ा हुआ वोट परसेंटेज गेहलोत सरकार के खिलाफ गया है वहीँ कांग्रेस खेमे से इस बढे हुए वोट परसेंटेज को गेहलोत सरकार की योजनाओं की लोकप्रियता से जोड़ा गया और बताया गया कि इतिहास बनने वाला है, बदलाव की परंपरा टूटने वाली है।

लेकिन रात में जब चुनाव आयोग की तरफ से मतदान के आंकड़े दिए गए तो चर्चा का विषय भी बदल गया और कहा जाने लगा कि मुकाबला कांटे का है और किसी को भी बहुमत शायद न मिले और सत्ता तक किसी भी दल को पहुँचने के लिए बागियों का सहारा लेना पड़े. जहाँ तक बागियों की बात है तो कांग्रेस और भाजपा दोनों ही पार्टियों की तरफ से भारी संख्या में बागी मैदान में उतरे हैं और जो खबरें आ रहीं कि जहाँ जहां बागी मैदान में थे वहां मतदान भी भारी हुआ है, कहीं कहीं पर 85 प्रतिशत तक मतदान पहुंचा है।

कल राजस्थान (Rajasthan Election 2023) में पोलिंग का जो रुझान देखा गया है उसे देखकर कहा जा सकता है कि इस बार कामयाब निर्दलीय उम्मीदवारों की संख्या काफी हो सकती है जो सरकार के गठन में किंग मेकर की भूमिका में दिखाई दे सकती है, दूसरे शब्दों में कहा जा सकता है कि सत्ता की चाभी इन बागी उम्मीदवारों के पास हो सकती है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार इनकी संख्या 20-25 तक हो सकती है जो 200 सदस्यीय राजस्थान विधानसभा में एक बड़ा आंकड़ा है. निर्दलीयों का चुनाव भी बड़ा दिलचस्प है. कल सम्पन्न हुए चुनाव में कांग्रेस के कई बागी भाजपा में गए तो कई भाजपा से कांग्रेस में, इसके अलाव भी कई बाग़ी अपनी ही पार्टियों के उम्मीदवार के खिलाफ हैं उनमें भी कहीं पर उन्हें पार्टी से अलग अपने क्षत्रप का अंदरूनी सहयोग मिला है तो कहीं पर उन्हें विरोधी दल के क्षत्रपों की अपरोक्ष रूप से मदद मिली है।

माना जाता है कि जब पिछली बार से ज़्यादा मतदान होता है तो कहीं न कहीं विपक्ष को फायदा होता है वहीँ मतदान का प्रतिशत अगर गिरता है तो सत्ता पक्ष की उम्मीदें बढ़ती हैं लेकिन इस बार जनता ने पिछली बार की तरह 74 प्रतिशत मतदान करके भाजपा और कांग्रेस दोनों को चौंका दिया है. चूँकि राजस्थान का चुनाव भाजपा बनाम कांग्रेस का न होकर मोदी बनाम गेहलोत हो गया था इसलिए दोनों की साख दांव पर लगी है. एक तरफ गेहलोत की वेलफेयर योजनाएं जो उन्होंने डिलीवर की हैं दूसरी तरफ मोदी की गारंटी, यहाँ ये कहना ज़रूरी है कि इस बार भाजपा की नहीं बल्कि मोदी की गारंटियों की बात हुई है, एक तरफ वो जिनका फायदा वर्तमान में राजस्थान के लोगों को मिल रहा है, दूसरी तरफ वो गारंटियां जो भविष्य में मिल सकती हैं. कर्नाटक की तरह राजस्थान का चुनाव भी प्रधानमंत्री मोदी ने अपने नाम पर लड़ा है, कर्नाटक में तो उन्हें मुंह की खानी पड़ी अब राजस्थान में क्या होगा, अभी पक्के तौर कहा नहीं जा सकता, लेकिन इतना तो पक्का है कि मोदी जी ने राजस्थान के चुनाव में छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश से कहीं ज़्यादा मेहनत की है।

पोलिंग के रुझानों को अगर देखें तो बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी ने जिन जिन सीटों पर जाकर चुनाव प्रचार किया है वहां पर वोटिंग परसेंटेज बढ़ा है, वहीँ राजस्थान में भाजपा क्षत्रप वसुंधरा के मामले में इसके उलट है, पूर्व मुख्यमंत्री ने जिन सीटों पर चुनाव प्रचार किया वहां तीन से चार प्रतिशत मतदान पिछले चुनाव की तुलना में कम हुआ, यही हालत गेहलोत और सचिन पायलट का भी रहा है, उनके चुनाव प्रचार वाले क्षेत्रों में मतदान का प्रतिशत गिरा है, जबकि राहुल और प्रियंका वाले क्षेत्रों में या तो पहले जैसा रहा या फिर थोड़ा इज़ाफ़ा हुआ।

ऐसे में मतदान के बाद भी राजस्थान (Rajasthan Election 2023) की तस्वीर साफ़ नज़र नहीं आ रही है, अगर कुछ साफ़ नज़र आ रहा है तो इतना कि विद्रोहियों का भाव बढ़ा है. ऐसे में कहा जा रहा है कि ये विद्रोही ही राजस्थान की किस्मत का फैसला करने वाले हैं. राजनीतिक पंडितों के मुताबिक भाजपा और कांग्रेस दोनों ही बहुमत से दूर रह सकते हैं, इस बात का दोनों को ही एहसास है और यही वजह है कि कल रात से ही इन विद्रोहियों से संपर्क साधने की कवायद दोनों ही मुख्य दलों की तरफ से शुरू हो चुकी है।

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