Chandrayaan-3: अंतरिक्ष के 400 बिलियन डॉलर कारोबार में भारत की एंट्री, मिलिट्री एंटी सेटेलाइट पर चीन को जवाब

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Chandrayaan-3: चंद्रयान 3 की चंद्रमा पर सफल लैंडिंग से भारत को आर्थिक लाभ होगा। इससे भारत के पास हैवी मिसाइल दागने का एक प्लेटफार्म उपलब्ध हो जाएगा। भारत की पे लोड की क्षमता बढ़ेगी और दुनिया के देश अपने उपग्रहों की लांचिंग के लिए भारत से संपर्क करेंगे। चंद्रयान-3 की कामयाबी भारत को पृथ्वी से बाहर यानी चंद्रमा पर एक सर्विस स्टेशन तैयार करने का मौका प्रदान करेगा।

भारत के लिए विकास की नई राहें

चंद्रमा के दक्षिण ध्रुव पर ‘चंद्रयान-3’ की सफल ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ कराने के बाद अब दुनिया में भारत का डंका बज रहा है। आने वाले समय में ऐसे देश भारत के अंतरिक्ष मिशन से कदम बढ़ाते नजर आएंगे। साढ़े छह सौ करोड़ रुपए की लागत वाले ‘चंद्रयान 3’ की सफलता के बाद भारत के लिए विकास की नई राहें खोली हैं। स्पेस कमीशन के सदस्य डॉ. किरण कुमार ने बताया कि दुनिया में ‘400’ बिलियन डॉलर के अंतरिक्ष कारोबार में अब भारत की दमदार एंट्री हो गई है। अभी तक इस कारोबार में भारत की हिस्सेदार महज पांच से सात प्रतिशत है। इससे ‘मिलिट्री’ और ‘एंटी-सैटेलाइट’ विकसित करने वाले चीन को अब भारत ने करारा जवाब दिया है। अपनी अंतरिक्ष ताकत का उपयोग भारत सैन्य मामलों में लगाएगा।

भारत ने लागू की स्पेस पॉलिसी

चंद्रयान 3 की कामयाबी महज विज्ञान, तकनीकी या दूसरे क्षेत्रों तक सीमित नहीं होगी। इसका आर्थिक तौर इस्तेमाल देश को नए आयामों तक ले जाएगी। ‘स्पेस इकॉनोमी‘ के 400 बिलियन डॉलर के कारोबार में भारत का कंट्रीब्यूशन 20 फीसद तक होगा। भारत, अंतरिक्ष के क्षेत्र में अमेरिका, रूस और इजरायल जैसे देशों के साथ नए समझौते करने में सक्षम होगा। इसरो के पूर्व डिप्टी डायरेक्टर डॉ. एस वैंक्टेशवर शर्मा ने बताया कि भारत ने स्पेस पॉलिसी लागू कर दी है। उसमें लचीलापन रखा है। इसका मकसद है कि निजी क्षेत्र, इसरो के लंबी अवधि के प्रोजेक्ट में शामिल हो।

मौजूदा समय में कई प्रोजेक्ट निजी क्षेत्र से पूरे कराए जा रहे हैं। निजी कंपनियों के अलावा कुछ संस्थान भी इसरो के साथ आए हैं। चूंकि अब अंतरिक्ष विज्ञान को केवल सरकार के बलबूते आगे ले जाना संभव नहीं है, इसलिए इसमें कई अन्य संस्थानों को शामिल किया जाएगा। अंतरिक्ष कार्यक्रम का वित्तीकरण हो रहा है। पब्लिक सर्विस के लिए सेटेलाइट जैसे मौसम की जानकारी, भूकंप अलर्ट आदि को लेकर निजी क्षेत्र उत्साहित है। ऐसे में वह निवेश के लिए आगे आ सकता है और भारत की मदद लेंगे।

भारत को होगा आर्थिक फायदा

वैज्ञानिक डॉ. एसके ढाका के अनुसार, चंद्रयान 3 की सफल लैंडिंग से भारत को आर्थिक फायदे होंगे। भारत के पास हैवी मिसाइल दागने का एक विश्वसनीय प्लेटफार्म उपलब्ध होगा। जब पे लोड की क्षमता बढ़ेगी तो दुनिया के देश अपने उपग्रहों की लांचिंग के लिए भारत से संपर्क करेंगे। ‘चंद्रयान-3’ की कामयाबी भारत को पृथ्वी से बाहर यानी चंद्रमा पर एक सर्विस स्टेशन तैयार करने का अवसर प्रदान करेगी।

भारत से अब दूसरे ग्रहों पर जाना आसान होगा। तीन साल पहले भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) को लेकर परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा था, भारत ने इस क्षेत्र में बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। अब निजी क्षेत्र को अंतरिक्ष यात्रा में भागीदार बनाया जाएगा। ‘इसरो’ द्वारा अपनी सुविधाएं, प्राइवेट क्षेत्र को उपलब्ध कराई जा सकेगी।

भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में प्राइवेट पार्टनरशिप

अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी को बढ़ाने और भारत के भीतर अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए इसरो, अंतरिक्ष गतिविधियों में निजी कंपनियों की भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए अब पूरी तरह से तैयार है। चंद्रयान 3 की सफलता से इसरो के लिए अपने उद्देश्य से अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी उद्योगों में खोलने का पूरक होगा। जिससे ‘आपूर्ति आधारित मॉडल’ से ‘डिमांड आधारित मॉडल’ के दृष्टिकोण को बदलने में मदद मिलेगी। भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र के माध्यम से अंतरिक्ष गतिविधियों को पूरा करने के लिए एक प्लेटफार्म संचालित होगा।

चंद्रयान 3 की सफलता के बाद अब इसरो नई प्रौद्योगिकियों और क्षमताओं के विकास के माध्यम से अंतरिक्ष डोमेन निर्माण करने और एनएसआईएल व एनजीपीई की सुविधाओं को साझा करने में सक्षम बनाने के लिए काम करेगा। सेटेलाइट से लेकर लॉन्चर व ग्राउंड स्टेशन तैयार करने जैसे काम प्राइवेट सेक्टर की कंपनियों को दिए जा सकेंगे।

सुरक्षा के मोर्चे पर भारत की ताकत

चंद्रयान 3 मिशन की सफलता से ‘स्पिन ऑफ’ तकनीक विकसित होंगी। उद्योगों में उन वस्तुओं और तकनीक का भरपूर इस्तेमाल होता है। नए पदार्थ, यूनिट और सॉफ्टवेयर आदि विकसित होते हैं। नासा ने इस तरह की सफल लॉंचिंग के बाद विभिन्न उपकरणों और तकनीक का उपयोग उद्योगों में किया है। कुछ ऐसा ही भारत चंद्रयान 3 की सफलता के बाद करेगा। अब लांचिंग क्षमता, पे लोड और सुरक्षा के मोर्चे पर भारत की ताकत बढ़ेगी।

भारत की मिसाइल तकनीक में इससे बड़ी मदद मिलेगी। उपग्रह भेजने के लिए भारत की क्षमता बढ़ेगी। मौसम की सटीक भविष्यवाणी करना अब आसान होगा। उपग्रह भेजने की क्षमता में अपेक्षित सुधार आएगा। इसके अलावा अंतरिक्ष की मैंपिंग के क्षेत्र में भी बड़े परिवर्तन देखने को मिलेंगे। प्राकृतिक संसाधनों की मैपिंग आसान होगी।

नजर में रहेंगी बॉर्डर पर चीन की हरकतें

चीन ने कई देशों के विरोध के बावजूद एंटी-सैटेलाइट (एएसएटी) मिसाइल का परीक्षण किया था। यह भारत के लिए सावधान रहने का अलर्ट था। चीन ने यह परीक्षण करने से पहले इसकी घोषणा नहीं की थी। बाद में इस परीक्षणों पर अनौपचारिक रोक लगी। गुप्त तौर पर ऐसे परीक्षण होते रहे है।

चंद्रयान 3 की सफल लांचिंग के बाद अब भारत को ऐसे परीक्षणों की जानकारी मिल सकेगी। अब भारत को भी इस दिशा में सोचने की जरूतर नहीं है। बॉर्डर पर निगरानी के लिए एक मजबूत खुफिया तंत्र और टोही क्षमता विकसित करने में भारत सक्षम होगा। चंद्रयान 3 की सफलता से अब भारत ऐसी तकनीक हासिल करेगा जो बॉर्डर पर चीन के मिलिट्री सेटेलाइट को जवाब देने में पूरी तरह से सक्षम होगा।

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