Exclusive – यूपी में आज भी 34 फीसदी महिलाएं घरेलू हिंसा की शिकार

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Exclusive – यूपी में आज भी 34 फीसदी महिलाएं घरेलू हिंसा की शिकार

नेशनल फैमिली एंड हेल्थ सर्वे की ताजा रिपोर्ट में आए चौंकाने वाले तथ्य सामने, बीते 5 सालों में भी नहीं आया सुधार

पारुल शुक्ला

चुनावी वर्ष में यूपी में राजनीतिक दलों में महिलाओं को लुभाने के लिए तमाम मुद्दे शामिल किए जा रहे हैं, लेकिन हकीकत इससे परे है। नेशनल फैमिली एंड हेल्थ सर्व-5 की रिपोर्ट में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। इस रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में आज भी 34 फीसदी महिलाओं की आबादी घरेलू हिंसा की शिकार है। रिपोर्ट के मुताबिक 18 से 49 साल की शादीशुदा महिलाओं पर हुए सर्वे के अनुसार वह अपने पतियों से शारीरिक व यौन शोषण द्वारा प्रताड़ित हुई हैं। बीते 5 साल में इस स्थिति में बहुत अधिक सुधार नहीं आया है आंकड़े प्रदेश में महिलाओं की दयनीय स्थिति की गवाही देते हैं।

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शहरी महिलाओ की स्थिति भी चिन्तानजक

परिवार एवं स्वास्थ्य कल्याण मंत्रालय द्वारा करवाए गए सर्वेक्षण 2019-21 की रिपोर्ट के अनुसार सिर्फ ग्रामीण ही नहीं बल्कि शहरी महिलाओं की भी स्थिति चिंताजनक है। ताजा आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में घरेलू हिंसा की शिकार 35.5 फ़ीसदी आबादी ग्रामीण इलाकों की है। वहीं 32.7 फीसदी आबादी शहरी इलाकों की है। 2015-16 में हुए सर्वे रिपोर्ट में जहां घरेलू हिंसा की शिकार महिलाओं की कुल आबादी 36.7 फीसदी थी, वहीं 5 साल बाद भी इस स्थिति में अधिक सुधार नहीं आया है।

3.7 फीसदी महिलाएं गर्भावस्था में झेल रही हिंसा

प्रदेश में गर्भावस्था के दौरान भी महिलाएं घरेलू हिंसा का शिकार हो रही हैं सर्वेक्षण 5 की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश भर में 3.7 फ़ीसदी महिलाए ऐसी सामने आई हैं। जिन्होंने माना कि गर्भावस्था के समय उन्हें शारीरिक यातनाएं झेलनी पड़ी हैं। शहर हो या गांव आधी आबादी आज भी भयंकर यातनाओं का शिकार है। 3.1 फ़ीसदी आबादी शहरों में जबकि 3.7 फ़ीसदी आबादी ग्रामीण इलाकों में यातनाएं झेल रही है। 2015-16 की रिपोर्ट में यह आंकड़ा 4.3 फीसदी था।

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लड़कियों के यौन शोषण के मामलों में आई गिरावट

सर्वे रिपोर्ट के अनुसार 18 से 29 साल की लड़कियों के साथ होने वाले यौन शोषण में भी मामूली गिरावट दर्ज हुई है। आंकड़ों के अनुसार 2015-16 में 1.1प्रतिशत लड़कियां यौन शौषण की शिकार हुई, वहीं 2019-21 में ये दर घटकर 0.7 फीसदी ही रह गयी है। शहरी इलाकों की 0.6 फीसदी लडकियों ने स्वीकार किया कि वह 18 साल की उम्र में उनके साथ यौन शोषण हुआ है।जबकि ग्रामीण इलाकों में ये आंकड़ा 0.7 फीसदी ही है।

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