Presidential Election: अगले महीने देश को नया राष्ट्रपति मिलेगा, सत्ता पक्ष और विपक्ष ने चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी हैं। सत्ता पक्ष का कुन्बा जहाँ एक तरह पूरी तरह एक जुट दिखाई दे रहा है वहीँ ममता बनर्जी की कोशिशों से एक जुट होने की कोशिश में जुटा विपक्ष अभी से एक होने से पहले बिखरने की बातें करने लगा है , कांग्रेस को लेकर कुछ क्षेत्रीय दल अपने राजनीतिक हितों के चलते संयुक्त विपक्ष के इस गठबंधन में कांग्रेस की मौजूदगी को गलत मान रहा है. इस मामले में आज तेलंगाना की सत्तारूढ़ पार्टी टीआरएस ने ममता की बैठक के बहिष्कार का एलान कर दिया है।
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बता दें पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस कोशिश में जुटी हुई हैं कि आगामी राष्ट्रपति के चुनाव में संयुक्त विपक्ष का उम्मीदवार एनडीए के संभावित उम्मीदवार को टक्कर दे। संयुक्त विपक्ष के उम्मीदवार के रूप में मराठा क्षत्रप और एनसीपी के प्रमुख शरद पवार का नाम लिया जा रहा है और जानकारी के अनुसार शिवसेना समेत सभी पार्टियां उनके नाम पर सहमत हैं। वैसे तो उम्मीदवारी के लिए शरद पवार भी राज़ी नज़र आ रहे हैं मगर अभी उन्होंने हामी नहीं भरी है। शरद पवार एक अनुभवी नेता हैं और उन्हें मालूम है कि विपक्ष में कई पार्टियां ऐसी है जो न बीजेपी को चाहती हैं और न कांग्रेस को। और शायद इसीलिए उन्होंने कहा है कि संख्या बल को देखकर ही वो इस बारे में फैसला करेंगे।
वहीँ आज ममता बनर्जी की बुलाई गई विपक्षी दलों की बैठक में सभी विपक्षी पार्टियों के नेताओं को बुलाया गया है जिसमें टीआरएस के अलावा AAP और बीजू जनता दल के आज भाग लेने की सम्भावना नहीं है। एजेंडे के मुताबिक आज की इस बैठक में एक विशेष कमिटी बनाने की बात है जो राष्ट्रपति चुनाव को लेकर उम्मीदवार के नाम पर सहमति बनाने और सभी विपक्षी दलों का समर्थन समेत ज़रूरी संख्या बल जुटाने पर काम करेगी।
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लेकिन बड़ा सवाल यह है कि बिना कांग्रेस के संयुक्त विपक्ष का क्या महत्व, टीआरएस कांग्रेस को नहीं चाहती क्योंकि राज्य में वो उसकी मुख्य विपक्षी है। तो क्या KCR सिर्फ नाम के लिए विपक्षी उम्मीदवार चाहते हैं. जहाँ तक आम आदमी पार्टी का सवाल है तो उनका कहना है कि पहले विपक्ष अपना उम्मीदवार तय करे फिर हम फैसला करेंगे। मतलब भाजपा से कोई सीधा पन्गा नहीं लेना चाहता। इन दलों को मालूम है कि विपक्षी एकता की यह कवायद बेमानी है. ममता बनर्जी जहाँ केंद्र की राजनीति में आने को आतुर हैं वही केजरीवाल के सपने तो और भी बड़े हैं और इसके लिए वह कई वर्षीय योजना के अंतर्गत काम कर रहे हैं, उन्हें अभी कोई जल्दी नहीं है लेकिन वह किसी की मदद करेंगे यह सोचना भी एक तरह से बेवकूफी ही कही जायेगी।

