ग्रामीण-कामकाजी महिलाओं से भेदभाव को मिटाने का किया प्रयास
मेरठ। माहवारी की बात होते ही लड़कियों और महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव की तस्वीर उभरने लगती है। खासकर ग्रामीण और कामकाजी महिलाओं को इस भेदभाव से दो-चार होना पड़ता है। हैरत की बात है कि आज के समय में भी इसके साथ सामाजिक कलंक और अज्ञानता जुड़ी है।
इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर चुप्पी तोड़ना तथा इनकी ओर समाज का ध्यान आकर्षित करना इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य है।
यह कार्यशाला लड़कों और लड़कियों के बीच शिक्षा के क्षेत्र में समानता लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
हमें शिक्षकों, नीति निमार्ताओं, मीडिया, गैर सरकारी संगठनों एवं निजी क्षेत्र को प्रोत्साहित करना होगा। उन्हें यह संदेश देना होगा कि वो शिक्षा की दृष्टि से लैंगिक समानता लाने के लिए प्रयास करें तथा लड़कियों को यौन शिक्षा एवं माहवारी स्वच्छता प्रबन्धन के बारे में शिक्षित करने की कोशिश करें।
रविवार को मित्रता दिवस के अवसर पर श्रुति की पाठशाला की संचालिका श्रुति रस्तोगी ने गरीब मलिन बस्ती में रहने वाली लड़कियों को माहवारी के संबंध में जागरूक कर सैनिटरी नैपकिन का निशुल्क वितरण किया।
श्रुति इससे पहले भी काफी बार मलिन बस्तियों में सेनेटरी नैपकिन का वितरण कर चुकी है। अब वह हर माह अभियान को आगे बढ़ाने पर विचार कर अलग अलग जगह और मलिन बस्तियों को चिन्हित कर उनमें निशुल्क सैनिटरी नैपकिन वितरित करेंगी। अगस्त माह के लिए सेनेटरी नैपकिन निर्माता कंपनी एवरटीन ने श्रुति की पाठशाला के लिए सैनिटरी नैपकिंस स्पॉन्सर किए।

