दिव्यांग आर्मी का हौंसला ही नहीं खाना भी है सबसे अलग

मेरठ रीजनदिव्यांग आर्मी का हौंसला ही नहीं खाना भी है सबसे अलग

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दिव्यांग आर्मी का हौंसला ही नहीं खाना भी है सबसे अलग

दिव्यांग चला रहे किचन प्वाईंट, करते हैं शहर में खाना सप्लाई
खाना बनाने से लेकर खाना परोसने और सप्लाई करने वाले भी हैं दिव्यांग

अमित बिश्‍नोई

न्यूज डेस्क। मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है, पंख से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है। जी हां, हौसला हो तो बिना पंखों के भी आसमां छुआ जा सकता है। यह सच कर दिखाया है दिव्यांग आर्मी ने जिनके पास आम आदमी की तरह पंख भले ही न हों लेकिन उनके हौसले ने उन्हें आसमां छूने की हिम्मत दी। आज वह न सिर्फ मिसाल बनकर खुद का कारोबार चला रहे हैं बल्कि अपने जैसे दिव्यांग भाईयों को भी जीने का हौसला दे रहे हैं। जी हां, बिना पंखों के, अपने हौंसलों के बलबूते आसमां छू रही दिव्यांग आर्मी को देख लोग जहां रोमांचित हो जाते हैं वहीं उनके आम्मनिर्भर बनने के जज्बे को सलाम करने से खुद को नहीं रोक पाते।

परतापुर रोड पर स्थित पंडितजी किचन एंड डिलीवरी प्वाइंट आज न सिर्फ लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है बल्कि दिव्यांगों को नयी राह दिखाकर प्रेरित करने का काम भी कर रहा है। क्योंकि इस पंडितजी किचन एंड डिलीवरी प्वाइंट पर काम करने वाले कुक और स्टाॅफ से लेकर डिलीवरी ब्वाॅय तक दिव्यांग है। कुदरत ने शरीर से भले ही इनके साथ नाइंसाफी की हो लेकिन उसकी भरपाई इन दिव्यांगों को हौसला देकर पूरी कर दी। क्योंकि शरीर से दिव्यांग होने के बावजूद उनके काम में न कहीं रूकावट आती है और न की कोई अपनी शारीरिक कमी का अहसास कर अपने काम में कोई कमी छोड़ता है। खाना बनाने से लेकर भोजन परोसने तक का कार्य प्रोफेशनल तरीके से किया जाता है। यहां तक तक पंडितजी किचन एंड डिलीवरी प्वाइंट से लोगों के घर-ऑफिसो तक में खाना सप्लाई किया जाता है। आने वाले समय में किचन प्वाईंट का खुद का ऐप भी होगा जहां लोग अपनी पसंद का खाना आर्डर कर सकेंगे।

दिव्यांग आर्मी का हौंसला ही नहीं खाना भी है सबसे अलग

समाज से मिली उपेक्षा तो दिव्यांग अमित ने बना दी मिसाल
ग्रेजुएशन और पाॅलिटेक्निक करने के बाद भी दिव्यांग अमित शर्मा काम के लिये भटकते रहे। कई बार उन्हें उपेक्षा मिली तो कई जगहों पर उनकी दिव्यांगता को देखकर उनके कार्य करने की क्षमता पर सवाल उठा दिये गये। पांच साल तक नौकरी की तलाश में भटकने के बाद अमित शर्मा को दिव्यांग होने पर सामने आने वाली परेशानियों का बखूबी अहसास हो गया। ऐसे में अमित शर्मा ने कुछ अलग करने की ठानी। कोरोना काल में लोगों को खाने के लिये परेशान होते देख अमित के मन में फूड प्वाईंट खोलने का विचार आया। अपने दोस्त गौतम चैधरी से मिले हौंसले के बाद उन्होंने पंडितजी किचन एंड डिलीवरी प्वाइंट की शुरूआत करने और उसमें दिव्यांग स्टाॅफ रखने का निर्णय कर लिया। अब उन्हें तलाश थी ऐसे दिव्यांगों की जो सम्मान के साथ और आत्मनिर्भर होकर जिंदगी जीना चाहते थे। दिव्यांग एसोसिएशन से जुड़े लोगों से भी इस बारे में वार्ता की। अमित को पैरो से दिव्यांग अनुज और गजेन्द्र का साथ मिला जो वाहन चलाना जानते थे। अमित ने उन्हें साथ लेने और उनसे खाना सप्लाई कराने की ठान ली। जल्द ही अकेले निकले अमित का कारवां बढ़ता गया और देखते ही देखते उनकी बनाइ दिव्यांग आर्मी में सात दिव्यांग शामिल हो गये। खाना बनाने वाली महिलाएं दिव्यांग हैं तो उनको खिलाने और डिलीवरी करने वाले लोग भी दिव्यांग हैं।

पंडितजी किचन एंड डिलीवरी प्वाइंट की शुरूआत करने वाले अमित शर्मा का कहना है दिव्यांग आर्मी का हौसला देखकर जहां लोग सराहना करते हैं वहीं उनका बनाया लजीज खाना खाकर लोग जमकर तारीफ भी करते हैं । अमित के अनुसार, दिव्यांग किसी पर बोझ नहीं बनना चाहते। मौका मिले तो दिव्यांग भी एक स्वस्थ व्यक्ति की भांति कार्य कर सकते हैं बस आवश्यकता है उन्हें एक अवसर देने की। आज किचन प्वाईंट में सात दिव्यांग व्यक्ति कार्य करते हैं। ईश्वर ने साथ दिया तो और भी दिव्यांग भाईयों को साथ जोड़कर कारोबार बढ़ाने की दिशा में कार्य किया जायेगा।

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