चार कंधे दिये नहीं, जमीन पर किया अंतिम संस्कार

मेरठ रीजनचार कंधे दिये नहीं, जमीन पर किया अंतिम संस्कार

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चार कंधे दिये नहीं, जमीन पर किया अंतिम संस्कार

सूरजकुंड श्मशान घाट पर कोरोना संक्रमितों के शव का जमीन पर हो रहा अंतिम संस्कार
कम पड़ रहे हैं अंतिम संस्कार को चार चबूतरे, अब छह नये चबूतरे बनाये जाने का कार्य शुरू किया

मेरठ। कोरोना संक्रमण से जान गंवाने वालों को जीते-जी अपनों से दूर होना पड़ा, मरने के बाद उन्हें परंपराओं के अनुसार चार कंधे भी नसीब नहीं हुए, वो अपने जिन्हें गोद में खिलाया था वो चेहरा देखने के लिये भी पास नहीं आये। और ऊपरवाले की शरण में जाने का समय आया तो शव को अंतिम संस्कार के लिये चबूतरा भी नसीब नहीं हुआ। जहां जमीन पर जगह मिली वहीं शव का अंतिम संस्कार किया जा रहा है। यह देखना बेहद दुःखद है कि हम कोरोना मरीज की जान तो बचा नहीं पाये और उसके शव को अंतिम विदाई भी सम्मानजनक तरीके से नहीं दे पा रहे हैं। अपनो के शव का अंतिम संस्कार जमीन पर होते देख परिवारजनों की आखों से आंसू बहते हैं, मन में अपार दुख चेहरे से झलकता है मगर सिस्टम के आगे लाचार वह बेबस खडे़ रह जाते हैं।

मेरठ महानगर में कोरोना संक्रमण तेजी से फैलता जा रहा है। इस बार कोरोना के चलते जान गंवाने वालों की संख्या में भी तेजी आ रही है। मेरठ के सूरजकुंड स्थित श्मशान घाट पर कोरोना संक्रमित मरीजों के अंतिम संस्कार की व्यवस्था की जाती है। यहां कोविड मरीजों के शवों के अंतिम संस्कार के लिये चार चबूतरे निर्धारित हैं। लेकिन कोरोना मरीजों की मौत होने के आंकड़ों में बढ़ोतरी के साथ यह चार चबूतरे कम पड़ने लगे हैं। अब तक 10 से अधिक कोरोेना संक्रमितों के शव का अंतिम संस्कार जमीन पर रखकर किया जा चुका है।

कोरोना मरीजों के शवों की संख्या में आयी तेजी के बाद अब सूरजकुंड श्मशान घाट पर छह नये चबूतरे तैयार किये जा रहे हैं। क्योंकि माना जा रहा है कि कोरोना की रफ्तार में बढ़ोतरी होने के साथ और चबूतरों की आवश्यकता होगी। अब देखना है कि कोरोना संक्रमितों के शवों का अंतिम संस्कार जमीन पर होते देख उनके परिजनों की आह्त होती भावनाओं को ध्यान में रखते हुए चबूतरों का निर्माण जल्द कराया जायेगा या सरकारी कार्य की तरह यह निर्माण कार्य भी ढूल-मुल रवैये के साथ आगे बढ़ेगा और शवों का अंतिम संस्कार जमीन पर किया जाता रहेगा।

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