एक बड़ा क्रिकेटर जब यह कहने लगे कि अब वो अपना हर मैच अंतिम समझकर खेलता है, या फिर ये कहे कि अब मैं हर मैच को मज़े के लिए खेलता हूँ तब यह मान लेना चाहिए कि उसे इस बात का ज्ञान हो चुका है अब उसके करियर का अंत उसे दिखने लगा है. विराट को भी शायद अब इस बात का एहसास हो चूका है कि अब उनका करियर बहुत लम्बा नहीं बचा तभी श्रीलंका के खिलाफ वो दार्शनिक होकर बोले कि अब मेरा हर एक मैच आखरी मैच की तरह होता है.
दार्शनिक बन गए विराट
कोहली ने यह बात शायद इसलिए कही कि टी 20 क्रिकेट से उन्हें साइडलाइन किये जाने की बात कही जा रही है. कप्तानी वो पहले ही छोड़ चुके हैं या उन्हें हटाया जा चूका है, अब नंबर रोहित शर्मा का है. नया नेतृत्व तैयार किया जा रहा है. कोहली ने मैच के बाद बड़ी दार्शनिक बातें कहीं जो अमूमन अपने करियर में सबकुछ या बहुत कुछ हासिल कर लेने वाले क्रिकेटर्स किया करते हैं. कोहली ने भी उसी लाइन पर अपनी बात कही, बिना डर और दबाव खेलने की बात, मैच को एन्जॉय करने की बात, टेंशनरहित क्रिकेट की बात, हताशा निराशा से ऊपर उठने की बात.
जाते जाते कुछ साबित करना चाहते हैं विराट
यानि कोहली ने कल जितनी भी बातें कहीं उससे तो साफ़ संकेत मिलता है कि वो जाते जाते और भी बहुत कुछ अचीव करना चाहते जो अभी बचा रह गया है. उन्हें मालूम है कि समय कम है, बकौल एक दिन सबको खेल छोड़ना पड़ता है, वो भी अलग होंगे लेकिन कब यह नहीं बताया। हालाँकि कुछ बड़े खिलाडी ऐसे भी गुज़रे हैं जिन्होंने चरम पर जाकर सन्यास लिया है। कोहली का यह चरम तो नहीं कहा जा सकता लेकिन बहुत बुरे दौर के बाद एक अच्छा दौर ज़रूर कहा जा सकता है. शायद जाते जाते कोहली बता देना चाहते हैं कि वो पहले जितने ही विराट हैं और जाने से पहले अपनी पुरानी विराट छवि छोड़ जाना चाहते हैं. कोहली की पिछली कुछ पारियां तो यही संकेत देती हैं जिसमें पाकिस्तान के खिलाफ उनकी वो अविस्मरणीय पारी शामिल है जिसने पाकिस्तान से उसके जबड़े मैच छीन लिया था, कुछ ऐसे शॉट्स भी उन्होंने उस पारी में लगाए थे जिनको वो लाइफटाइम शॉट्स बता रहे थे. बहरहाल कोहली में अभी काफी क्रिकेट बाकी है, देखना यह है कि टीम मैनेजमेंट उनपर कबतक और कितना विश्वास करती है.

