केंद्र की मोदी सरकार को आज उस समय बड़ा झटका लगा जब लद्दाख के नेताओं ने केंद्र की उच्चस्तरीय कमिटी से बाहर निकलने का फैसला किया। लद्दाख के इन नेताओं का आरोप है कि इससे अच्छे हालात तो तब थे जब लद्दाख जम्मू-कश्मीर के साथ जुड़ा हुआ था. इन नेताओं ने गृह मंत्रालय द्वारा गठित की गयी एक समिति जिसकी अध्यक्षता नित्यानंद राय कर रहे है उसके पैनल का हिस्सा बनने से भी इंकार कर दिया है.
मूर्ख बना रही केंद्र सरकार
लद्दाख और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस की सर्वोच्च संस्था ने आमराय से फैसला लेते हुए घोषणा की है कि समिति उस वक्त तक किसी भी कार्यवाही का हिस्सा नहीं बनेगी जब तक लद्दाख को राज्य के साथ विशेष दर्जा और दूसरी मांगों को एजेंडे का हिस्सा नहीं बनाया जाता. समिति में लद्दाख के उपराज्यपाल, सांसद, गृह मंत्रालय का एक वरिष्ठ अधिकारी और लेह, कारगिल डेमोक्रेटिक एलायंस के नौ प्रतिनिधि सदस्य शामिल हैं. लद्दाख बौद्ध संघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष चेरिंग दोरजे ने कहा कि हमें लगता है कि जब हम जम्मू-कश्मीर का हिस्सा थे तब ही बेहतर थे. दोरजे ने केंद्र पर मूर्ख बनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि वो समझते हैं कि केंद्र उनकी मांगों के खिलाफ है.
केंद्र की कथनी और करनी में अंतर
उन्होंने कहा कि लद्दाख में एक साल से अधिक समय से लोग इन मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं. बता दें कि केंद्र और भाजपा ने लद्दाख को जब जम्मू-कश्मीर से अलग कर केंद्र शासित प्रदेश बनाने की घोषणा की थी तब इसे एक ऐतिहासिक कदम बताया था. उस समय लद्दाख में विकास करने और लोगों के साथ दशकों से हो रहे भेदभाव को दूर किये जाने के दावे किये गए थे. चेरिंग दोरजे ने आगे कहा कि बीते दो साल में यहां के लोगों को कथनी और करनी में अंतर मालूम पड़ गया. यही वजह है कि लेह और कारगिल के लोग केंद्र के खिलाफ संयुक्त रूप से उठ खड़े हुए हैं और नौकरशाही शासन को समाप्त करने की मांग कर रहे हैं.

