फर्जी आंकड़ों ने लटकाया अनलॉक

मेरठ रीजनफर्जी आंकड़ों ने लटकाया अनलॉक

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  • मेरठ के स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट में जमकर हुआ फर्जीवाड़ा
  • नहीं बता पा रहे मरीजों का पूरा ब्यौरा

मेरठ। जिले की स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी कोरोना संक्रमित मरीजों के आंकड़ों में भारी झोल मुसीबत बनता जा रहा है। विभाग की गड़बड़ी का खामियाजा आम जनता भुगत रही है। विभाग की ओर से जारी हो रहे फर्जी आंकड़ों की वजह से जिले का अनलॉक तक लटक गया। यहां तक कि स्वास्थ्य विभाग खुद मरीजों का पूरा ब्यौरा नहीं दे पा रहा है। जिले के स्वास्थ्य विभाग की कोरोना आंकड़ों में जमकर फर्जीवाड़ा हुआ है। ऐसा हम नहीं कह रहे खुद स्वास्थ्य विभाग की डेली रिपोर्ट इसकी तस्दीक कर रही है।


डेली रिपोर्ट दे रही गवाही

स्वास्थ्य विभाग की डेली रिपोर्ट कोरोना के आंकड़ों में गड़बड़ी की गवाही खुद दे रही है रिपोर्ट पर गौर करें तो बीते 7 जून को सही मायने में 600 से कम एक्टिव केस हो चुके थे, लेकिन ‘गायब’ मरीजों की वजह से विभाग का डाटा मिसमैच चल रहा है। जिला ज्यादा एक्टिव केसेस की काली लिस्ट में शामिल रहा और यही वजह रही कि फर्जी एक्टिव केसेज के चलते जिला पहले अनलॉक नहीं हो पाया।

हर रोज़ गायब हो रहे सैकड़ों मरीज
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार हर रोज सैकड़ों मरीज मरीज गायब हो रहे हैं बीते 7 जून की रिपोर्ट के अनुसार जिले में कुल एडमिट मरीजों की संख्या 176 थी जबकि होम आइसोलेशन में 382 मरीज दिखाए गए थे असल में 558 मरीज ही एक्टिव हुए, लेकिन विभाग की रिपोर्ट में एक्टिव केसेस की संख्या 690 दिखाई गई। अब बड़ा सवाल ये है कि बचे हुए 132 मरीज कहा गए। जबकि 6 जून की रिपोर्ट के अनुसार 370 मरीज गायब हुए है। इस दिन अस्पताल में एडमिट 190 मरीज थे जबकि 417 मरीज होम आइसोलेशन में थे। इस हिसाब से कुल 607 एक्टिव मरीज हुए लेकिन रिपोर्ट में कुल एक्टिव 977 मरीज दिखाए गए है।


डिस्चार्ज की भी संख्या गलत

स्वास्थ्य विभाग की आंकड़ों में सिर्फ एक्टिव केस में ही झोल नहीं है बल्कि डिस्चार्ज के के आंकड़ों में भी भारी झोल चल रहा है। कौनसे मरीजों को डिस्चार्ज किया जा रहा है, कितने मरीजों को असल में डिस्चार्ज किया जा रहा है इसकी गिनती भी विभाग ठीक से नहीं कर पा रहा। रिपोर्ट के अनुसार 6 जून को विभागीय रिपोर्ट के अनुसार 977 एक्टिव केस थे। वहीं 7 जून को डिस्चार्ज मरीज का आंकड़ा 287 था, यानी कुल जोड़ बचा 690। अब 3 मरीज की मौत भी दिखाई गई, यानी कुल एक्टिव मरीज हुए 687। स्पष्ट है कि विभाग ख़ुद ही जोड़-तोड़ कर मरीजों की संख्या प्रस्तुत कर रहा है।

नहीं पता कहा गए मरीज

शासन के निर्देशों के अनुसार मरीजों को या तो होम आइसोलेशन में ही रखा जा सक़ता है या अस्पताल में ही एडमिट किया जा सकता है। लेकिन मेरठ के स्वास्थ्य विभाग के रिपोर्ट में ऐसे मरीज भी शामिल हैं जिनका कोई अता-पता ही नहीं है। ये मरीज कहा से आये कहा गए कोई जानकारी नहीं है। ये मरीज कागजों में ही दिखाई दे रहे है।

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