ऐतिहासिक है ‘The President Bodyguard Estate’ से ‘आशियाना’ तक का सफर

उत्तराखंडऐतिहासिक है 'The President Bodyguard Estate' से 'आशियाना' तक का सफर

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देहरादून- देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के उत्तराखंड प्रवास के बाद उनके निवास “आशियाना” एक बार फिर चर्चाओं में है. लोगों की नजर से दूर इस आशियाने का अपना इतिहास है. देहरादून के राजपुर रोड पर 175 एकड़ में फैला हुआ आशियाना कभी प्रेसिडेंट बॉडीगार्ड स्टेट(The President Bodyguard Estate) के नाम से जाना जाता था. ब्रिटिश गवर्नर जनरल वायसराय यहां भ्रमण पर आया करते थे. बॉडीगार्ड की वजह से इस क्षेत्र को बारी घाट कहा जाता था. समय के साथ जनसंख्या के बढ़ते दबाव में यह बारी घाट एक तरह से विलुप्त हो गया. 1773 में ब्रिटिश गवर्नर जनरल वारेन हेस्टिंग्स ने बॉडीगार्ड की स्थापना की थी. 1859 में वायसराय लॉर्ड कैनिंग ने से बॉडीगार्ड का नाम दिया. जिसे बाद ने द प्रेसिडेंट बॉडीगार्ड के नाम से जाना जाने लगा.

द प्रेसिडेंट बॉडीगार्ड ( The President Bodyguard Estate) से आशियाना तक का सफर

ब्रिटिश काल में यह ब्रिटिश कालीन बंगला था.जहां गवर्नर जनरल वायसराय आकर ठहरते थे. बताया जाता है कि सहारनपुर अंबाला तक मोटर की व्यवस्था थी. किंतु ब्रिटिश अधिकारी देहरादून तक घोड़ा और बग्गी से बॉडीगार्ड देहरादून आते थे. ब्रिटिश अधिकारी रहन-सहन और खान-पान के बहुत शौकीन थे, शायद यही वजह है कि आज का ‘राष्ट्रपति आशियाना’ अपनी शान- ओ-शौकत के लिए जाना जाता है. आजादी के बाद इस बंगले को सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट सीबीआरआई ने रिनोवेट किया. पुराने समय में लोग बताते हैं कि ब्लाइंड स्कूल से लेकर नीचे कैनाल रोड तक यह क्षेत्र बारी घाट कहलाता था. इसके पास रिस्पना नदी बहती थी जो आज राजपुर से निकलती है. बताया जाता है कि बारी घाट का रेत, बजरी बहुत ही मजबूत मानी जाती थी.मकान निर्माण के लिए यहां की रेत और बजरी मेरठ और सहारनपुर तक ले जाया जाती थी.

राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद (President Fakhruddin Ali Ahmed) ने दिलाई आशियाना को पहचान

उत्तराखंड के देहरादून में राष्ट्रपति आशियाना आवास में प्रवास करने वाली राष्ट्रपति द्रौपदी मुरमू पांचवी राष्ट्रपति हैं. इसकी शुरुआत राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद ने की थी. लेखक और वरिष्ठ पत्रकार शीशपाल गुसाईं बताते हैं की 1975-76 मैं फखरुद्दीन अली अहमद ने शिमला को छोड़ देहरादून को ग्रीष्मकालीन का बॉडीगार्ड चुना था. जिसके बाद आशियाना के इर्द-गिर्द खड़े जंगल को साफ करा कराया गया और इसको राष्ट्रपति आशियाना नाम दिया. गया राष्ट्रपति फखरुद्दीन के बाद 1998 में तत्कालीन राष्ट्रपति केआर नारायणन कुछ समय के लिए यहां आए. फिर 2016 में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने आशियाने में प्रवास किया. उस समय आशियाने को बहुत चमकाया गया था. जिसके बाद यह पहला मौका था कि आशियाना लोगों के नजर में आया. 2018 में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने यहां प्रवास किया. जिसके ठीक 4 साल बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुरमू आशियाने में प्रवास करने पहुंची हैं

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