यूं ही नहीं किया पीएम मोदी ने सोतीगंज का जिक्र

मेरठ रीजनयूं ही नहीं किया पीएम मोदी ने सोतीगंज का जिक्र

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यूं ही नहीं किया पीएम मोदी ने सोतीगंज का जिक्र

  • चोरी किए गए वाहनों को काटकर पार्ट्स बेचने के लिए बदनाम है मेरठ का सोतीगंज

सुनील शर्मा

मेरठ। आज शाहजहांपुर में गंगा एक्सप्रेस-वे के शिलान्यास कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेरठ के सोतीगंज का नाम लेकर सबको चौंका दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने मंच से कहा कि देशभर में कहीं भी गाड़ी चोरी हो जाती थी तो वह मेरठ के सोतीगंज में कटती थी। दशकों से चले आ रहे काले कारोबार को बंद करने से पूर्व की सरकारों ने परहेज किया। लेकिन योगी सरकार ने मेरठ के सोतीगंज में चल रहे चोरी किये वाहनों के अवैध कटान के काले कारोबार को बंद कर दिया।

देश के प्रधानमंत्री का सार्वजनिक मंच से मेरठ के सोतीगंज का जिक्र करना बहुत लोगों को चौंका रहा है। पीएम मोदी ने सोतीगंज में चल रहे हैं वाहनों के अवैध कटान को रोकना योगी सरकार की उपलब्धि बताया और पीएम का यह कहना अतिशयोक्ति भी नहीं है। क्योंकि दशकों से चले आ रहे हैं अवैध वाहन कटान के काले कारोबार को रोकने की हिम्मत ना तो किसी सरकार ने दिखाई और ना ही पुलिस-प्रशासन इसको रोकने की कोशिश कर पाया। प्रधानमंत्री मोदी ने सोतीगंज का जिक्र आखिर क्यों किया इसके लिए हमें थोड़ा पीछे जाना होगा।

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कैची और रेवड़ी-गजक के लिए पूरे देश में मशहूर उत्तर प्रदेश के जिला मेरठ के माथे पर एक काले कारोबार का बदनुमा दाग भी लगा हुआ था। यह दाग था चोरी किए वाहनों का अवैध कटान। मेरठ ही नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश से जुड़े राज्यों जैसी दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड आदि से चोरी हुए वाहन भी मेरठ के सोतीगंज में ही कटने के लिये आते थे। कहा जाता है कि गाड़ी चाहे कितनी भी बड़ी क्यों ना हो सोतीगंज में आने के 10 मिनट के अंदर उसके पुर्जे-पुर्जे अलग कर दिए जाते हैं। इसके बाद वाहनों के स्पेयर पार्ट्स सोतीगंज में बिखरे कबाड़ियों के अलग-अलग गोदाम में पहुंचा दिये जाते हैं। यानी 10 मिनट के बाद गाड़ी का पता निकालना भूसे में सुई ढूंढने के बराबर हो जाता था। पूरे देश भर में जिस गाड़ी का स्पेयर पार्ट्स कहीं ना मिलता हो उसकी तलाश में लोग सोतीगंज तक आते थे और सोतीगंज का काला कारोबार उनको निराश भी नहीं करता था। गाड़ी चाहे पुराने माॅडल की हो चाहे लेटेस्ट टाॅप माॅडल हो, सभी के स्पेयर पार्ट्स सोतीगंज के कबाड़ियों के यहां मिल ही जाते थे।

90 के दशक में चंद दुकानों से शुरू हुआ वाहनों के स्पेयर पार्ट्स बेचने का सिलसिला आज 300 से अधिक दुकानों तक पहुंच चुका है। दिल्ली रोड पर एक किलोमीटर के दायरे में फैले सोतीगंज में हर साल अरबों रुपए के स्पेयर पार्ट्स बेचे जाते हैं। नंबर दो में चल रहे हैं इस काले कारोबार का ना तो कोई हिसाब रखा जाता है और ना ही सरकार को किसी प्रकार का राजस्व मिलता है। छोटी से छोटी दुकान लेकर बैठे कबाड़ी भी आज करोड़पति हो चुके हैं। योगी सरकार में सोतीगंज की कबाड़ियों पर की गयी कार्रवाई के तहत कुछ कबाड़ियों के घर की कुर्की की भी की गई। इन कबाड़ियों के घर की आलीशान साज-सज्जा देखकर अधिकारियों की भी आंखें खुली की खुली रह गईं। इन कबाड़ियों के मकान जाहिर कर रहे थे कि इस काले कारोबार में कितनी मोटी कमाई है।

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अब सवाल उठता है कि जब पूरे देश को यह बात पता थी कि सोतीगंज में वाहनों का अवैध कटान कर स्पेयर पार्ट्स खुलेआम बेचे जाते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई? इसकी वजह यह है कि सोतीगंज में स्पेयर पार्ट्स वाले लगभग सभी कबाड़ी अल्पसंख्यक समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। चोरी किए वाहनों के स्पेयर पार्ट्स बेचकर करोड़पति हो गए कबाड़ियों के संबंध सत्ताधारी नेताओं से हमेशा बने रहे। अल्पसंख्यक समुदाय के वोट बैंक का लालच कहें या इससे होने वाली मोटी कमाई में हिस्सेदारी, कारण चाहे जो भी हो लेकिन किसी भी राजनीतिक दल ने सत्ता में होने के बावजूद सोतीगंज पर कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं जताई। कभी-कभार किसी अधिकारी ने ऐसा करने की हिम्मत दिखाई तो चंद दिन बाद ही उसका ट्रांसफर कर दिया गया। ऐसे में सब कुछ जानते हुए भी पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने चुप रहना ही बेहतर समझा और यह काला कारोबार अपनी गति से चलता रहा। मेरठ-हापुड़ लोकसभा सांसद राजेन्द्र अग्रवाल ने संसद में सोतीगंज को लेकर अनेक बार सवाल उठाया मगर तत्कालीन सरकारों ने कोई कार्रवाई नहीं की गयी।

अब बात करते हैं इन कबाड़ियों पर कार्रवाई की। उत्तर प्रदेश में योगी सरकार अवैध कारोबार करने वालों पर लगातार शिकंजा कसती जा रही थी। अब योगी सरकार का कार्यकाल भी लगभग समाप्ति पर है। ऐसे में योगी सरकार ने अल्पसंख्यक समुदाय के कबाड़ियों पर कार्रवाई करने की हिम्मत दिखाई और प्रभाकर चौधऱी को एसएसपी बनाकर मेरठ भेजा। प्रभाकर चौधऱी ने एसएसपी का पद संभालते ही सोतीगंज की कबाड़ियों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया। इसकी शुरुआत उन्होंने सबसे पहले इन कबाड़ियों को संरक्षण देने वाले पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई कर की। इन कबाड़ियों को छापे की सूचनाएं पहुंचाने वाले, चोरी किए वाहन उपलब्ध कराने और उन्हें संरक्षण देने वाले पुलिसकर्मियों पर एनएसपी प्रभाकर चौधऱी ने कड़ी कार्रवाई करते हुए सस्पेंड तक कर दिया। एसएसपी के निशाने पर आये 170 पुलिकर्मियों पर कार्रवाई की गयी। इसके बाद कबाड़ियों का इतिहास खंगालना शुरू किया जो कमजोर कड़ियां सामने आती गईं।

सरकार के समर्थन और प्रबल इच्छाशक्ति से पुलिस ने सोतीगंज के कबाड़ियों के गोदामों पर छापे मारने शुरू कर दिए। पुलिस की कार्रवाई से सोतीगंज के कबाड़ियों में हड़कंप मच गया और वह इलाका छोड़कर भागने लगे। पुलिस की कार्रवाई यहीं तक नहीं थमी और सोतीगंज के कबाड़ियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। अनेक कबाड़ियों के घरों पर की गई कुर्की की कार्रवाई ने बाकी कबाड़ियों को दबाव में ला दिया। पुलिस ने इन कबाड़ियों को साफ तौर पर चेतावनी दे दी की या तो वाहनों के स्पेयर पार्ट्स भेजने का कारोबार पूरी तरह से लिखित में किया जाए अन्यथा वह कुछ और काम कर लें। पुलिस कार्रवाई में चार बड़े कबाड़ियों की 22 करोड़ की अवैध संपत्ति जब्त की गई है। वहीं अभी 23 कबाड़ियों की 70 करोड़ की अवैध संपत्ति जब्त होनी बाकी है। 62 कबाड़ियों पर 300 से ज्यादा मुकदमे हैं और पुलिस ने उनकी भी हिस्ट्रीशीट खोल दी है।

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पुलिस की कार्रवाई के खिलाफ फिलहाल सोतीगंज के बाजार बंद चल रहे हैं और यहां के लिए कबाड़ी पुलिस कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं। लेकिन योगी सरकार में उनकी एक नहीं चल रही है। सोतीगंज पर कार्रवाई योगी सरकार की उपलब्धि इसलिए भी है कि हर महीने करोड़ों रुपए के स्पेयर पार्ट्स बेचे जाने के बावजूद किसी भी तरह का रेवेन्यू सरकार को नहीं मिलता था। वहीं इस कारोबार से वाहन चोरों को भी प्रोत्साहन मिलता था। लेकिन योगी सरकार की इस कार्रवाई ने सोतीगंज के कबाड़ियों की नहीं बल्कि वाहन चोरों पर भी शिकंजा कर दिया है।

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