उत्तराखंड में बढ़ रहा कोरोना का खतरा

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उत्तराखंड में बढ़ रहा कोरोना का खतरा

  • कोरेाना संक्रमितों की संख्या 69 हजार के पार
  • कोरोना के 420 नए मरीज मिले, 09 की मौत

देहरादून। उत्तराखंड में कोरोना संक्रमण को रोकने और लोगों को जागरूक करने तमाम सरकारी प्रयासों के बावजूद कोविड-19 संक्रमण पर काबू पाना मुश्किल हो रहा है। कोरोना संक्रमितों की संख्या में आशातीत कमी न होने से राज्य सरकार भी चिंता जाहिर कर चुकी है।

बुधवार को कोरोना के 420 नए मरीज मिलने और नौ संक्रमितों की मौत हो जाने से लोगों में दहशत का माहौल है। इसके बावजूद लोग कोविड-19 के नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। बाजारों और सड़कों पर भीड़ लगी रहती है और लोग मास्क पहनने और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने में भी लापरवाही बरत रहे हैं।

उत्तराखंड में कोरोना का खतरा काफी समय से जनजीवन को प्रभावित किये हुए है। लंबे समय तक लगाये गये लाॅकडाउन के बाद जब बंदिशे हटाते हुए अनलाॅक की प्रक्रिया को शुरू किया गया तो आशा की गयी के लोग कोविड-19 की गाइडलाइन का पालन करेंगे और कोरोना संक्रमितों की संख्या मे कमी आयेगी। लेकिन अनलाॅक के दौरान लोगों की लापरवाही, प्रशासन के प्रयासों को नाकाम साबित करती दिखी। ऐसे में कोरोना संक्रमितों की संख्या और कोरोना के खतरे मे आशानुसार कमी नहीं आयी।

बुधवार को स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी हेल्थ बुलेटिन के अनुसार राज्य में कोरोना के 420 नए मरीज मिलने के साथ राज्य में कुल मरीजों की संख्या 69307 हो गई है। हालांकि 63420 मरीज कोरोना से मुक्ति पा चुके हैं और 4147 मरीजों का विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है। बुधवार को ही नौ संक्रमितों की मौत होने के बाद मृतकों का आंकड़ा भी 1128 हो गया है। मरीजों के ठीक होने की दर 91.51 प्रतिशत है।

कैदियों से लेकर सरकारी कर्मियों तक की हो रही जांच
कोरोना संक्रमण को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन द्वारा जेल में बंदियों से लेकर विभिन्न संस्थानो में कार्यरत सरकारी कर्मचारियों तक की कोरोना जांच करा रहा है। रुड़की के उपकारागार के बंदियों के कोरोना जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सैंपल लिए हैं। टीम ने जेल में 432 कैदीयों के सैंपल लेकर जांच के लिए भेज दिए हैं। वहीं सरकारी एवं गैर सरकारी सभी संस्थानों में काम करने वाले कर्मचारियों को भी कोरोना की जांच कराने के आदेश दिये गये हैं।

लोगों का भी जागरूक होना आवश्यक
कोरोना संक्रमण को रोकने के लिये सरकारी प्रयासों के बावजूद संक्रमण पर काबू न पाये जाने का मुख्य कारण लोगों में संक्रमण से बचाव के प्रति जागरूकता न होना है। कोविड-19 की नियमावली के अनुसार सोशल डिस्टंसिंग और मास्क पहनने जैसे नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। वहीं बाजारों से लेकर सड़कों तक लोगों की भीड़ से संक्रमण बढ़ने की आशंका बनी रहती है। ऐसे में आवश्यक है कि जब तक दवाई नहीं, तब तक ढिलाई नहीं का लोग पालन करें और अपने साथ समाज को भी संक्रमण मुक्त रखने के लिये प्रयास करें।

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