समाज में सिर्फ महिलाएं ही नहीं हैं जिनके साथ दुर्व्यवहार होता आया है, पुरुषों के साथ भी दुनियाभर में आए दिन कुछ न कुछ घटते ही रहता है। शोषण, पक्षपात, हिंसा, उत्पीड़न, असमानता इन सबका शिकार पुरुष भी होते हैं। हालांकि अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस मनाने के पीछे मुख्य उद्देश्य पुरुषों का मानसिक स्वास्थ्य, पुरुषत्व के सकारात्मक गुणों की सराहना, समाज में मौजूद पुरुष रोल मॉडल्स को मुख्यधारा में लाना, लैंगिक समानता आदि हैं। भारत में पहली बार 2007 में 19 नवंबर को अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस मनाया गया।

1923 में कुछ पुरुषों ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की तर्ज पर 23 फरवरी को अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस मनाए जाने की मांग की थी। इसके बाद 1968 में अमेरिकन जर्नलिस्ट जॉन पी. हैरिस ने एक आर्टिकल लिखते हुए कहा था कि सोवियत प्रणाली में संतुलन की कमी है। यह प्रणाली महिलाओं के लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस मनाती है लेकिन पुरुषों के लिए वो किसी प्रकार का दिन नहीं मनाती। इसके पश्चात 19 नवंबर 1999 में त्रिनिदाद और टोबैगो के लोगों द्वारा पहली बार अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस मनाया गया। डॉ. जीरोम तिलकसिंह ने पुरुषों के योगदानों को मुख्यधारा में लाने के लिए काफी प्रयत्न किये। तभी से 19 नवंबर को पूरे विश्व में उनके पिता के जन्मदिन पर अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस मनाया जाता है।
कैसे मनाएं अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस-
विदेशों में अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस विभिन्न तरीकों से मनाया जाता है। हालांकि भारत में अब जाकर इसे प्रसिद्धि मिली है। यदि आप अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस मनाना चाहते हैं तो शुरुआत अपने घर से करें। घर के पुरुष सदस्यों को खास महसूस करवाएं। उन्हें बताएं कि वे क्यों आपके और इस घर के लिए रोल मॉडल हैं। उनका पसंदीदा खाना बनाकर, उन्हें कोई हैंडमेड गिफ्ट देकर या कोई खूबसूरत से संदेश वाला कार्ड देकर भी अच्छा महसूस करवाया जा सकता है।

