आवारा कुत्तों से फैलने वाले वायरस से बाघों के संक्रमित होेने की आशंका
राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण ने 50 टाइगर रिजर्व को एसओपी जारी की
न्यूज डेस्क/देहरादून। बाघों से तो इंसान से लेकर सभी जानवर डरते हैं। बाघ के सामने आते ही जीवन को खतरा होना स्वाभाविक है। मगर जंगल में बेखौफ घुमते बाघ को कुत्तों से जान का खतरा हो क्या आप ऐसा सोच भी सकते हैं। मगर टाइगर रिजर्व में रहने वाले बाघों को आवारा कुत्तों से जान का खतरा पैदा हो गया है। क्योंकि कुत्तों से फैलने वाला एक वायरस, कैनाइन डिसटेंपर वायरस (सीडीवी) बाघों के लिए खतरा बन गया है।
ऐसे में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण ने देश के सभी टाइगर रिजर्व के लिए स्टेंडर्ड आपरेटिंग सिस्टम (एसओपी) जारी करते हुए टाइगर रिजर्व के आसपास के गांव में रह रहे आवारा कुत्तों का बंध्याकरण और टीकाकरण करने आदि निर्देश जारी किये हैं।
आवारा कुत्तों से बाघ और अन्य वन्य जीवों को संक्रमण होने की आशंकाओं के मद्देनजर देश में बाघों के संरक्षण और संवर्धन के लिए बनायी गई राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) ने देश के सभी 50 टाइगर रिजर्व को स्टेंडर्ड आपरेटिंग सिस्टम (एसओपी) जारी किया है।
कुत्तों से बाघ और वन्यजीवों को बीमारी फैलने का खतरा, वन्यजीवों के शिकार का खतरा और कुत्तों के अपनी नस्ल के जंगली जानवरों से प्रजनन के खतरे को देखते हुए जारी की गयी एसओपी में टाइगर रिजर्व के आसपास के गांव में रह रहे आवारा कुत्तों का बंध्याकरण और टीकाकरण करने समेत कई निर्देश जारी किये गए हैं।
दरअसल कुत्तों से फैलने वाला एक वायरस, कैनाइन डिसटेंपर वायरस (सीडीवी) बाघों के लिए खतरा बन सकता है। यह खतरनाक वायरस यदि टाइगर रिजर्व में फैल जाए तो बाघों के संरक्षण पर गंभीर असर पड़ सकता है। पूर्व में भी कुत्तों से बाघ तक बीमारी पहुंचने के काफी मामले सामने आ चुके हैं। जानकारी के अनुसार यूपी के दुधवा नेशनल पार्क और मध्य प्रदेश के पन्ना नेशनल पार्क में कुत्तों से पहुंची बीमारी के कारण बाघ की मौत भी हो चुकी है।
राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण ने इस खतरे को गंभीरता से लेने के निर्देश देते हुए एनटीसीए ने सभी राज्यों के मुख्य वन्यजीव प्रतिपालकों को इस एसओपी को लागू कराने और एनजीओ, पंचायतों व जानवरों को बचाने के लिए काम करने वाली संस्थाओं समेत वन अधिकारी आदि की मदद लेने को कहा है।

