नौ पर्वतीय जिलों में 24 घंटे में मिले 22 सौ से अधिक कोरोना संक्रमित
देहरादून। कोरोना की पहली लहर में अधिक प्रभावित होने से बचे उत्तराखंड के पर्वतीय इलाकों में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर खतरनाक होती जा रही है। राज्य के नौ पर्वतीय जिलों में 24 घंटों के दौरान मिले 2200 से अधिक नये कोरोना संक्रमितों ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। माना जा रहा है कि कोरोना संक्रमितों की संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है क्योंकि पर्वतीय इलाकों में कोरोना जांच की व्यवस्था नाकाफी है और इन इलाकों में रहने वाले लोग गंभीर स्थिति में आने के बाद ही मैदानी इलाकों में आकर कोरोना की जांच कराते हैं।
उत्तराखंड में फैल रहे कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर ने राज्य के पर्वतीय जिलों में संक्रमण का खतरा बढ़ा दिया है। स्वास्थ विभाग की रिपोर्ट के अनुसार शुक्रवार को नौ पर्वतीय जिलों मे 2269 नए कोरोना मरीज मिले हैं। अल्मोड़ा में 365, बागेश्वर में 117, चमोली में 314, चंपावत में 214, पौड़ी में 196, पिथौरागढ़ में 111, रुद्रप्रयाग में 96,, टिहरी में 325, उत्तरकाशी में 531 नये कोरोना मरीज मिले हैं।
उत्तराखंड के देहरादून, हरिद्वार, यूएसनगर और नैनीताल जिले पहले से ही कोरोना संक्रमण से जुझ रहे हैं। अब राज्य के पर्वतीय जिले में भी रिकार्ड कोरोना मरीज मिलने से स्वास्थ विभाग की चिंता बढ़ गयी है। सुदूरवर्ती उत्तरकाशी जिले में 24 घंटे में 531 नये कोरोना मरीज मिलना हालात की गंभीरता को दर्शा रहा है। पर्वतीय इलाकों में जहां आबादी कम होने के साथ खुला क्षेत्र अधिक होता है और यहां सामाजिक दूरी का पालन करना भी आसान होता है वहां कोरोना संक्रमण के इस कदर फैलने के कारण समझना भी मुश्किल हो रहा है। वहीं इन पर्वतीय जिलों में स्वास्थ सेवाओं का स्तर भी कोरोना संक्रमण से मुकाबला करने में सक्षम नहीं है। इन जिलों में रहने वाले लोगोें को आरटीपीसीआर जांच भी अधिकतर देहरादून और नैनीताल में होती है। यह कोरोना जांच भी वही लोग कराते हैं जो कोरोना संक्रमण से गंभीर रूप से ग्रसित होते हैं। ऐसे में पर्वतीय इलाकों में कोरोना संक्रमितों की संख्या प्राप्त आंकड़ों से कहीं अधिक होने की संभावना जतायी जा रही है।
स्वास्थ विभाग की चिंता यह है कि यदि पर्वतीय इलाकों में कोरोना संक्रमण इतनी तेजी के साथ बढ़ता गया तो कोरोना मरीजों को उपचार किस प्रकार उपलब्ध कराया जा सकेगा। पर्वतीय जिलों में आधुनिक चिकित्सा के संसाधन नहीं हैं और देहरादून, नैनीताल, हरिद्वार जैसे जिले पहले से ही कोरोना संक्रमण के सर्वाधिक शिकार हैं और यहां चिकित्सा सुविधाएं कम ही पड़ रही हैं। ऐसे में पर्वतीय जिलों के कोरोना मरीजों को उपयुक्त उपचार प्रदान करना बेहद चुनौतीपूर्ण होगा।

