देहरादून। उत्तराखंड में महिला सुरक्षा के भले ही कितने दावे किए जाए। लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। ये हम नहीं बल्कि उत्तराखंड पुलिस (Uttarakhand Police) के आंकड़े कह रहे हैं। महिला सुरक्षा (Women safety) के सरकारी दावों को खुद उसकी पुलिस के आंकड़े ही गलत साबित कर रहे हैं। प्रदेश में पांच साल में महिला उत्पीड़न के मामलों में 50 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इनमें सर्वाधिक मामले दुष्कर्म के सामने आए हैं। पुलिस की माने तो खुद पिछले पांच साल में महिला अपहरण और दहेज हत्या के मामले में भी बढ़े हैं। पांच साल पहले 2017 में दुष्कर्म के मामले 390 दर्ज किए गए थे। जबकि यह वर्ष 2021 में बढ़कर 741 हो गए। महिला अपहरण के मामले 2017 में 295 थे जो कि 2021 में बढ़कर 370 तक पहुंच गए। वहीं महिलाओं के खिलाफ दहेज हत्या के मामले में भी वृद्धि हुइ्र है। 2017 में दहेज हत्या के मामले 60 थे जो कि 2021 में बढ़कर 70 तक पहुंच गए।
सिर्फ महिला के खिलाफ मामले में ही अपराधिक मामले नहीं बढ़े बल्कि अन्य अपराधिक घटनाओं में भी वृद्धि हुई है। प्रदेश में डकैती व हत्याओं का ग्राफ तेजी से बढ़ा है। वर्ष 2017 में जहां डकैती की 11 घटनाएं दर्ज की गई थींं इस बार 2021 में यह बढ़कर 14 हो गई हैं। हत्या के मामलों की बात करें तो 2017 में हत्या के मामले 159 दर्ज किए गए थे। जबकि 2021 में इसकी संख्या बढ़कर 196 तक पहुंच गई। अपहरण फिरौती के मामले भी प्रदेश में बढ़े हैं। 2021 में अपहरण और फिरौती के 5 मामले दर्ज किए गए हैं। जबकि 2017 में अपहरण और फिरौती का मात्र एक ही मामला सामने आया था। पिछले पांच साल में लूट,वाहन चोरी और चेन स्नेचिंग के मामलों में कमी आई है। 2017 में वाहन लूट के 16 मामले सामने आए थ। जोकि 2021 में घटकर 13 रह गए। इसी तरह से चेन स्नेचिंग के 2017 में 37 वारदातें दर्ज की थी। जो कि 2021 में घटकर 26 पर पहुंच गई। वहीं लूट के मामले 2017 में 179 थे जो कि 2021 में मात्र 145 रह गई। इतने के बाद भी पुलिस अधिकारियों का मानना है कि राज्य में अपराध का रिकवरी रेट बहुत अच्छा है।

