Uttarakhand Disaster : उत्तराखंड में आई आपदा को लेकर विभाग एक-दूसरे पर थोप रहे जिम्मेदारी, अब तक मिले नौ शव

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देहरादूनउत्तराखंड में भारी बारिश से आई आपदा को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हुआ है। सवाल है कि क्या सरखेत में जानें बचाई जा सकती थीं। इसके जवाब से पहले विडंबना यह कि आपदा का ठीकरा अब विभाग एक-दूसरे पर फोड़ रहे है। मौसम विज्ञान केन्द्र उत्तराखंड के डायरेक्टर विक्रम सिंह ने आपदा प्रंबधन प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए है। उन्होंने कहा कि एडवाइजरी जारी करने के अलावा फोन किए गए। लेकिन चेतावनी पर लापरवाही वाला रवैया प्राधिकरण ने दिखाया। प्राधिकरण मौसम विभाग के दावों का खंडन कर रहा है। इस झगड़े के बीच बड़ा अपडेट है कि टिहरी ज़िले में पांच शव बरामद और बरामद हुए है। जबकि दून में चार शव मिल चुके हैं। अब भी करीब 10 लोगों के आपदा के मलबे में दबे होने की जानकारी है।  सरखेत में आई प्राकृतिक आपदा के बाद सवाल खड़ा हुआ कि मौसम विभाग ने जो अलर्ट जारी किया। उसमें देहरादून को शामिल नहीं किया था। इस पर मौसम विभाग के निदेशक ने कहा कि 19 और 20 को सरखेत में तेज़ बारिश को लेकर रात 9 बजे देहरादून जिला आपदा कंट्रोल रूम को फोन किया गया। अलर्ट भी किया गया। तीन घंटे के नॉउकास्ट में देहरादून सहित आसपास के इलाकों में ऑरेन्ज अलर्ट जारी किया था। इसके बावजूद प्राधिकरण की ओर से अलर्ट को गंभीरता से नहीं लिया।

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अगर अलर्ट को गंरीरता से लिया गया होता तो लोगों को अनाउंसमेंट के ज़रिये हटाया जा सकता था। मुख्य सचिव ने जब मौसम विभाग के डायरेक्टर विक्रम सिंह से अलर्ट को लेकर सवाल किया तो सिंह ने नाराजगी जताकर कहा कि आपदा को लेकर अलर्ट के बावजूद तैयारी पूरी नही रही थी। सिंह ने कहा कि आपदा कंट्रोल रूम में एडवाइज़री देने और मौसम केंद्र के डयूटी अधिकारी ने रात 9 बजे फोन पर जानकारी दी थी। आपदा कंट्रोल रूम का कहना है कि अलर्ट को गंभीरता से लिया जाता है और फिर पूरी तैयारी की जाती है। 19 और 20 अगस्त को मौसम विभाग ने यलो अलर्ट दिया था। रात में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया था। जिसके बाद चंद घंटों की बारिश से दून सहित कुछ और ज़िलों में इन्फ्रास्ट्रक्चर को नुकसान हुआ। उसे ठीक करने में समय लग सकता है। रिटायर्ड मौसम वैज्ञानिक एमएम सकलानी ने बताया कि बदलते मौसम का अंदाजा लगाने में मौसम विज्ञान केंद्र इस बार चूका है। पूर्वानुमान में देहरादून का जिक्र तक नहीं किया। प्रदेश में एडवांस टेक्नोलॉजी का भी अभाव है। पांच दिन का जो मौसम पूर्वानुमान बताया जाता है। वह न्यूमेरिकल वेदर प्रिडक्शन पर आधारित होता है। जिसकी सटीकता के बारे में किसी प्रकार का दावा नहीं किया जा सकता।

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