बुलंदशहर: भाजपा के लिए गढ़ बचाना बना अग्निपरीक्षा का सवाल

विधानसभा चुनावबुलंदशहर: भाजपा के लिए गढ़ बचाना बना अग्निपरीक्षा का सवाल

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बुलंदशहर: भाजपा के लिए गढ़ बचाना बना अग्निपरीक्षा का सवाल

लखनऊ/बुलंदशहर। बुलंदशहर न्यूज़ लाइव – सूबे और केंद्र की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के लिए विधानसभा चुनाव अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। जिले में भाजपा को अपना गढ़ बनाए रखने की चुनौती है। 2017 में जिले की सभी सातों सीटों पर भगवा लहराने वाली भाजपा क्या इस बार भी अपना वर्चस्व कायम रख सकेगी? यह सवाल हर किसी की जुबां पर है। क्योंकि सपा-रालोद गठबंधन ने भाजपा की राह रोकने का हरसंभव प्रयास किया है।

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बुलंदशहर जनपद 1991 की रामलहर से भाजपा का गढ़ बन गया। 1991 में 9 में से 6 सीटें भाजपा ने जीतीं। 1993 में 9 में से 7 सीटों पर भाजपा विजयी हुई। जबकि 1996 में भाजपा ने 9 में से 6 सीटें जीतीं। 2002 के चुनाव में जिले से जेवर सीट अलग होने पर जिले में सीटें घटकर 8 रह गईं। वर्ष 2002 में पूर्व सीएम कल्याण सिंह के भाजपा छोड़ने से भाजपा केवल दो सीटें बुलंदशहर और शिकारपुर ही जीत सकी। जबकि लोध बहुल दो सीटें डिबाई और स्याना से कल्याण सिंह की पार्टी राक्रांपा के दो विधायक चुने गए। वर्ष 2007 में भी भाजपा केवल दो सीटें स्याना और अगौता ही जीत सकी। 2012 के चुनाव में अगौता सीट खत्म होने पर जिले में मात्र 7 सीटें रह गईं। 2012 में भाजपा केवल एक सीट सिकंदरबाद ही जीत सकी।

पिछला इतिहास दोहराने की चुनौती

वर्ष 2017 के चुनाव में ऐसी लहर चली कि जिले की सातों सीटों पर भाजपा ने जीत हासिल कर विपक्ष का सूपड़ा साफ कर दिया। अब 2022 के चुनाव में भाजपा का जिले की सभी सातों सीटों पर मुख्य मुकाबला सपा-रालोद गठबंधन से माना जा रहा है। ऐसे में भाजपा के सामने 2017 का परिणाम दोहराने की चुनौती है। कुछ सीटों पर कांटे का मुकाबला होने से भाजपा को नुकसान हो सकता है। हालांकि भाजपाई फिर सभी सातों सीटें जीतने का दावा कर रहे हैं।

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टिकट बदलाव का क्या होगा असर

सिकंदराबाद से लक्ष्मीराज सिंह, खुर्जा से मीनाक्षी सिंह, डिबाई से सीपी सिंह और बुलंदशहर से प्रदीप चौधरी प्रत्याशी बनाए। वहीं, केवल तीन विधायकों पर भरोसा जताते हुए उन्हें फिर मैदान में उतारा है। इनमें अनूपशहर से विधायक संजय शर्मा, शिकारपुर से विधायक राज्यमंत्री अनिल शर्मा और स्याना से विधायक देवेन्द्र लोधी ने चुनाव लड़ा है। अब परिणाम का इंतजार है।

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