सपा के बाद अब बसपा ने भी पुरानी पेंशन लागू करने की बात कही

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सपा के बाद अब बसपा ने भी पुरानी पेंशन लागू करने की बात कही

लखनऊ: पुरानी पेंशन – समाजवादी पार्टी के बाद अब बहुजन समाजव पार्टी ने भी पुरानी पेंशन बहाल करने की बात कही है। शनिवार को बसपा सुप्रीमो मायावती ने एक रैली के दौरान जनता को संबोधित करते हुए कहा कि उनकी सरकार आती है तक कर्मचारियों के लिए एक आयोग का गठन किया जाएगा जिसमें उनकी सभी समस्याओं का हल होगा। उन्होंने कहा कि इसमें पुरानी पेंशन लागू करने से लेकर तमाम ऐसी समस्याएं जो कर्मचारियों को मौजूदा सरकारों की वजह से है उन सभी पर उनकी पार्टी कार्रवाई करेगी।

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दर पर पिछले दिनों समाजवादी पार्टी ने साल 2005 के बाद लागू नई पेंशन व्यवस्था की जगह पर पुरानी पेंशन व्यवस्था को फिर से लागू करने की बात कही थी। सपा मुखिया अखिलेश यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कार्य दूसरा किया था कि उनकी सरकार आने के बाद एक बार फिर से प्रदेश में पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू होगी। इसके बाद से पूरे प्रदेश में कर्मचारी और शिक्षक सपा के समर्थन में चुनाव प्रचार करने लगे थे। यहां तक कि कई कर्मचारियों ने अपने घर के दरवाजों पर यह नोटिस लगा दिया था कि जो भी पार्टी पुरानी पेंशन लागू करेगी वह तो उसको ही दिया। ऐसे में बसपा द्वारा पुरानी पेंशन की घोषणा करने के बाद समाजवादी पार्टी के लिए मुश्किल खड़ी हो सकती है। सपा को उम्मीद थी कि कर्मचारी संवर्ग उनके साथ आएगा लेकिन अब कर्मचारी संवर्ग बसपा के साथ भी जा सकता है। खासकर दलित सेक्टर से आने वाले वह कर्मचारी जो पहले से ही आरक्षण और प्रमोशन में आरक्षण की मांग कर रहे हैं वह बहुजन समाज पार्टी के साथ खड़े होकर खड़े हो सकते हैं।

12 लाख कर्मचारियों को मिलेगा फायदा

कर्मचारी संगठनों का दावा है कि पुरानी पेंशन व्यवस्था को कब लागू कर दिया गया तो कर्मचारी और शिक्षक मिलाकर करीब 1300000 लोगों को फायदा होगा। अटेवा पेंशन बचाओ मंच ने दावा किया था कि नई पेंशन में अधिकतम सैलरी 800 से लेकर 15000 तक की है। जबकि पुरानी पेंशन में कर्मचारियों को न्यूनतम 35 हजार से ज्यादा वेतन मिलने की संभावना। पुरानी पेंशन व्यवस्था के कर्मचारी साल 2035 के बाद से रिटायर होंगे।

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2007 से 2012 तक माया की सरकार

मायावती ने पुरानी पेंशन की बात जरूर की है लेकिन साल 2007 से लेकर 2012 तक प्रदेश में उनकी सरकार थी। उस दौरान मायावती प्रदेश की मुख्यमंत्री थी और केंद्र सरकार की तरफ से यह छूट था कि कोई भी प्रदेश अपने यहां कर्मचारियों के लिए पुरानी और नई पेंशन व्यवस्था में से किसी एक को लागू कर सकता है। अधिकार राज्य सरकारों को दिया गया था। लेकिन उसके बावजूद भी उन्होंने 5 साल तक पुरानी पेंशन लागू करने को लेकर कोई भी काम नहीं। उसी दौरान त्रिपुरा केरल और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में पुरानी पेंशन को ही बरकरार रखा गया था। हालांकि बाद के दिनों में केरल और त्रिपुरा से पुरानी पेंशन व्यवस्था को हटा दिया। मौजूदा समय केवल पश्चिम बंगाल में ही पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू है।

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