पांचवां चरण होगा निर्णायक, जानिये क्यों अहम हैं ब्राह्मण

विधानसभा चुनावपांचवां चरण होगा निर्णायक, जानिये क्यों अहम हैं ब्राह्मण

Date:


पांचवां चरण होगा निर्णायक, जानिये क्यों अहम हैं ब्राह्मण

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा (Uttarpradesh Assembly election) के चार चरण समाप्त होने के बाद पांचवे चरण की तैयारियां काफी तेजी हो चुकी हैं। सत्ता के गलियारों में कयास लगाया जा रहा हैं। इस बार योगी, प्रियंका, मायावती और अखिलेश कौन जीतेगा उत्तर प्रदेश। फिलहाल यूपी की सियासत में सबसे खास माने जाने वाले जातिगण समीकरणों से निष्कर्ष​ निकालने का जतन किया जा रहा है। खैर इन सबके बीच मतदाताओं को अपनी तरफ प्रभावित करने वाले ब्राह्मण वोट अपनी तरफ खींचा जा रहा हैं। यूपी में ब्राह्मणों की तादात मह​ज 12 फीसदी है लेकिन सत्ता किसी की हो इनका भी अपना अहम रोल रहा है। यही कारण है कि यूपी चुनावों में इस आबादी की भागीदारी खास होती है। विधानसभा चुनाव मिशन 2022 (Assembly Election Mission 2022) में ब्राह्मण मतदाताओं की डिमांड का असर दिखाई पड़ रहा है। क्षेत्रीय राजनैतिक दलों के अलावा बड़ी पार्टियों ने ब्राह्मण वोट को आ​कर्षित करने की कोई कसर नहीं छोड़ी है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर पूर्वी उत्तर प्रदेश तक ब्राह्मण का दबदबा रहा है।

Read also: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज करती दिखाई दे रही भाजपा : सर्वे

दरअसल, 60 सीटों पर निर्णायक आंकड़ो पर गैर फरमाए तो 403 विधानसभा सीटों में 60 क्षेत्र हैं। जहां ब्राह्मण वोट बैंक की भूमिका अहम है। बता दें कि ब्राह्मण मतदाताओं (Brahmin voters) की संख्या 20% से भी कहीं ज्यादा है। प्रयागराज सहित चार विधानसभा क्षेत्रों में ब्राह्मणों की संख्या 40% से भी कहीं अधिक है। लिहाजा उत्तर प्रदेश की सत्ता हासिल करने में सभी सियासी पार्टी ब्राह्मणों को अहमियत देती है। इस बार सबकी नजर ब्राह्मण वोट बैंक पर है। सूबे में ओबीसी, एससी और मुस्लिम वोट बैंक के बाद सबसे ज्यादा ब्राह्मणों की ही आबादी है। यूपी में 12% ब्राह्मण वोट है। ब्राह्मण वोट चुनाव में निर्णायक भूमिका नहीं बल्कि चुनावी माहौल को तेज करने में आगे हैं। जबकि यादवो के लिए सपा दलित वोट के लिए बसपा के साथ कई छोटे—बड़े दल मैदान हैं। पहले कांग्रेस में ब्राह्मणों का बाहुल्य था लेकिन नई पी​ढ़ी आने के बाद ये परम्परा सामाप्त हो चुकी है।

Read also: किस करवट बैठेगा ब्राह्मण वोट बैंक का ऊँट?

सूबे में ब्राह्मण वोट 12% है। जबकि प्रदेश में 6 ब्राह्मण मुख्यमंत्री बन चुके है। इनमें एनडी तिवारी सूबे के अंतिम ब्राह्मण मुख्यमंत्री थे। साल 2017 में बीजेपी की टिकट पर 46 ब्राह्मण विधायक बने। वहीं साल 2012 में समाजवादी पार्टी से चुनाव जीत 21 ब्राह्मण विधायक बने। साल 2007 में बसपा से 41 ब्राह्मण विधायक बने थे। आमतौर पर ठाकुर और ब्राह्मणों में मतभेद होने की बात समाने आती है, लेकिन कई मुद्दों पर ब्राह्मण और ठाकुर की एकता दिखाई पड़ती है। साल 2007 के विधानसभा चुनाव में बसपा ने 63 ब्राह्मण उम्मीदवारों को महासंग्राम में उतारा था। इनमें 41 ब्राह्मणों ने जीत हासिल की थी। इस समीकरण की बदौलत मायावती को उत्तर प्रदेश की कुर्सी मिली थी। इस जीत के बाद मायावती ने स्लोगन ​दिया था जो हाथी नहीं गणेश है, ब्रह्मा, विष्णु, महेश है। साल 2012 में बीजेपी ने 62 ब्राह्मण प्रत्याशियों को टिकट दिया था। जबकि बसपा ने 58, सपा ने 38 और कांग्रेस ने 52 ब्राह्मणों को विधानसभा क्षेत्रों (Assembly constituencies) का टिकट देकर सियायी दांव चला था, लेकिन ब्राह्मण वोट में बंदर बांट होने की स्थिति में सपा को लाभ मिला और सपा की सरकार बनी। हालांकि साल 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के 312 विधायकों में से 58 ब्राह्मण विधायक बने। यूपी में करीब नौ ब्राह्मण मंत्री हैं।

Share post:

Subscribe

Popular

More like this
Related