मेरठ। प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 (State Assembly Elections 2022) कई मामलों में इस बार कुछ नेताओं लिए प्रतिष्ठा और उनके जीवन के राजनैतिक करियर का प्रश्न बना हुआ है। पांच चरणों का मतदान समाप्त हो चुका है अब छठे और उसके बाद अंतिम चरण यानी सातवें की बारी होगी। छठें और सातवें चरण में पूर्वांचल की 110 सीटों पर मतदान होना है। इसमें भाजपा और सपा के अलावा दोनों ही दलों के छोटे गठबंधन दल भी शामिल हैं। इनमें प्रमुख रूप से निषाद पाटी, अपना दल और सुभासपा हैं। इन दोनों चरणों में अधिकांश प्रत्याशी इन्हीं दलों से हैं। जिससे पिछड़ी जातियों का नेतृत्व करने वाली इन पार्टियों का भी सब कुछ दांव पर लगा हुआ है। निषाद पार्टी के संजय निषाद,अपना दल की अनुप्रिया पटेल इस बार स्वयं चुनाव मैदान में नहीं हैं। लेकिन ओमप्रकाश राजभर (Omprakash Rajbhar) जो कि सुभासपा के अध्यक्ष हैं। वे और अपना दल कमेरावादी की कृष्णा पटेल जीत के लिए जी तोड़ कोशिश कर रही हैं। दोनों ही दलों ने चुनाव प्रचार अभियान में अपने जातियों के नेताओं को लगा दिया है। अब चुनाव में अगर पार्टियों की जीत होती है तो ये क्षेत्रीय क्षत्रप बादशाह कहलाने के हकदार होंगे अगर हार जाते हैं तो राजनैतिक करियर तक खत्म हो सकता है। पिछड़ा वर्ग के प्रमुख नेता सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष और विधायक ओम प्रकाश राजभर जहूराबाद सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। भाजपा ने यहां पर उनके खिलाफ कालीचरण राजभर को उतारा है। जो वोटों में सेंध लगा रहे हैं।
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केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल (Union Minister Anupriya Patel) की पार्टी अपना दल कुर्मी-जात का प्रतिनिधित्व का दावा करती हैं। भाजपा गठबंधन के साथ अपना दल प्रत्याशी कई सीटों पर चुनाव मैदान में हैं। अपना दल को भाजपा ने 19 सीटें दी हैं। लेकिन अपना दल के प्रत्याशियों को सत्ता विरोधी लहर का भी सामना करना पड़ रहा है। जिससे चुनाव काफी भारी पड़ रहा है। यह चुनाव अगर किसी के लिए करो और मरो की स्थिति में है तो वह है. निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद। भाजपा के साथ गठबंधन में निषाद पार्टी का प्रदर्शन आने वाले भविष्य में रिश्तों की डोर को मजबूत करेगा। निषाद पार्टी को भाजपा ने 16 सीटें छोड़ी हैं।

