नोएडा। प्रदेश की हाइटेक सिटी नोएडा के साथ चला आ रहा सियासी अभिशाप भाजपा को मिली भारी सफलता से धूल गया है। पिछले लगभग 3 दशकों से यह अंधविश्वास फैला हुआ था कि नोएडा में आने वाले मुख्यमंत्री को अपनी सीट गंवानी पड़ती है लेकिन प्रदेश की सत्ता संभालने के साथ ही योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने ना सिर्फ अपना कार्यकाल पूरा किया, बल्कि भाजपा की स्पष्ट बहुमत के साथ दोबारा सरकार भी बन रही है।
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बताया जाता है कि नोएडा में इस सियासी अभिशाप की शुरुआत 1988 से तब हुई जब नोएडा में वीर बहादुर उनके हटने के बाद नारायण दत्त तिवारी मुख्यमंत्री बने। वह भी नोएडा के सेक्टर 12 स्थित नेहरू पार्क का उद्घाटन करने वर्ष 1989 में आए। उसके कुछ समय बाद वह भी मुख्यमंत्री पद से गए। समय-समय पर हुए मध्यावर्ती चुनाव में नारायण दत्त तिवारी, कल्यण सिंह और मुलायम सिंह यादव सभी नोएडा आने के बाद इसी तरह से का सामना करना पड़ा।
वर्ष 1994 में मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव (Chief Minister Mulayam Singh Yadav) नोएडा सेक्टर 40 मि खेतान पब्लिक स्कूल का उद्घघाटन करने आए। उन्होंने मंच से कह वह इस मिथक को तोड़ कर जाएंगे जो मुख्यमंत्री नोएडा आता है उन् कुर्सी चली जाती है। इसके कुछ बाद ही उनको मुख्यमंत्री पद से हटना पड़ा। वर्ष 2000 में जब नोएडा के डीएनडी फ्लाईओवर का उद्घाटन हुआ तो तत्कालीन मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह ने नोएडा आने के बजाय दिल्8ली 2011 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने नोएडा में दलित प्रेरणा स्थल का उद्घाटन करने पहुंचे और 2012 मैंने हार का सामना करना पड़ा । सपा प्रमुख अखिलेश यादव अपने कार्यकाल में एक बार भी नोएडा नहीं आये।
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लेकिन योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने इस राजनीतिक अभिशाप क को नहीं माना मुख्यमंत्री योगी अपने 5 साल के कार्यकाल 19 बार इस जिले आ चुके हैं उन्होंने मन से इस बात का बार-बार ऐलान किया है कि वह इस अंधविश्वास को नहीं मानते हैं और इसे तोड़ के रहेंगे

