लखनऊ। देश भर में बिजली संकट के बीच यूपी से एक और बड़ी समस्या निकलकर सामने आई है। बताया जा रहा है कि मात्र पांच दिनों का ही कोयला बचा है। जिसकी वजह से बिजली का संकट अभी और भी गहरा सकता है। उत्पादन निगम की चार इकाईयों के पास एक से पांच दिन का ही कोयला बचा है। कोयले की कमी का असर यह हुआ है कि अप्रैल महीने में 303 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन प्रभावित हुआ है। जबकि, प्लांटों के पास भी कोयले का स्टॉक खत्म होने की कगार पर आ गया है।
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उत्पादन निगम की चार इकाईयों में से अनपरा के पास पांच दिन, ओबरा के पास चार दिन, हरदुआगंज के पास तीन दिन और पारीछा पावर प्लांट के पास सिर्फ एक दिन का ही कोयला है। शनिवार को जितनी मांग कोयले की थी, उतनी सप्लाई नहीं हो पाई है। जिसमें अनपरा को एक दिन में 40 हजार मीट्रिक टन कोयले की जरूरत होती है, लेकिन मात्र 30 हजार मीट्रिक टन कोयला ही मिल पाया है। वहीं ओबरा को 15700 मीट्रिक टन की जगह मात्र 12500, पारीछा को 19 हजार मीट्रिक टन की जगह 15500 ही कोयला मिला है। हरदुआगंज को भी कम आपूर्ति हुई है।
डिमांड तोड़ रही रिकॉड
यूपी में बिजली की डिमांड दिन पर दिन बढ़ती जा रही है। 30 अप्रैल को सबसे ज्यादा बिजली की डिमांड देखने को मिली है। यूपी में स्थिति यह है कि 23 हजार मेगावॉट तक बिजली की मांग पहुंच गई है। जबकि सप्लाई 19366 मेगावॉट तक ही है। देखा जाए तो मांग और सप्लाई में ही 3634 मेगावॉट का अंतर दिख रहा है। यूपी हाईड्रो से 366 मेगावॉट की बिजली मिली है।
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कटौती का भी बन रहा रिकॉर्ड
यूपी में करीब दस करोड़ से ज्यादा आबादी को बिजली संकट की मार का सामना करना पड़ा रहा है। ग्रामीण इलाकों का हाल तो बद से बदतर हो गया है। गांवों को 18 घंटे की जगह किसी तरह नौ घंटे ही बिजली मिल रही है।
वहीं नगर पंचायतों को साढ़े 21 घंटे की जगह साढ़े 14 घंटे और तहसीलों को भी मात्र 15 घंटे ही बिजली उपलब्ध हो पा रही है। शहरों का भी हाल बदतर होता जा रहा है, यहां पर सात घंटे तक की बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है।

