मेरठ। प्रदेश के सबसे मीट कारोबारी हाजी याकूब कुरैशी के इन दिनों बुरे दिन चल रहे हैं। बंदी पड़ी मीट फैक्ट्री में अवैध रूप से मीट की पैकिंग करा रहे याकूब पर पुलिस और प्रशासन ने शिकंजा कस दिया है। याकूब के अस्पताल को भी स्वास्थ्य विभाग ने सील कर दिया है। ये वहीं याकूब कुरैशी है जो कभी एक झटके में चुटकियों में डीएम से लेकर आईजी तक का ट्रांसफर कराने की औकात रखता था। कभी याकूब का रूतबा ऐसा हुआ करता था कि उसके सामने खडे होने की हिम्मत भी कोई नहीं करता था। याकूब कुरैशी की प्रदेश के सत्ता गलियारे से ऐसी यारी थी कि वह एक इशारे पर जो चाहे वह कर देता था। अफसरों का एक झटके में ट्रांसफर तो उसके बाए हाथ का खेल हुआ करता था।
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लेकिन आज मुख्यमंत्री योगी के हंटर से प्रदेश का सबसे बड़ा मीट कारोबारी और मीट माफिया डरकर भाग रहा है। बता दें कि याकूब कुरैशी सबसे बड़ा मीट कारोबारी है। वह देश ही नहीं विदेशों में भी मीट की सप्लाई करता है। कहते हैं मीट कारोबारी तो वह देखने भर को है। आज वह प्रदेश ही नहीं देश का सबसे बड़ा मीट माफिया है। लेकिन प्रदेश में 2017 से मीट माफिया याकूब कुरैशी के दिन लदने शुरू हो गए। जब भाजपा की सरकार बनी। उसके बाद से याकूब पर शिकंजा कसना शुरू हुआ और आज याकूब प्रदेश का भगोड़ा बन गया है। जो अधिकारी कभी याकूब के आगे पीछे घूमते थे आज वहीं अधिकारी याकूब और उसके परिवार की तलाश में दबिश दे रहे हैं। याकूब कुरैशी अपने परिवार के साथ फरार है। पुलिस उसकी गिरफ्तारी के लिए अभियान चला रही है।
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हारने के बाद भी मेहरबान रहती थी मैडम माया :
बता दें याकूब कुरैशी बसपा सुप्रीमो मायावती के खासमखास में से एक रहा है। मायावती के करीबी नेताओं में याकूब कुरैशी की गिनती होती थी। यहीं कारण था कि याकूब कुरैशी चुनाव हारने के बाद भी बार—बार बसपा से टिकट ले आता था। याकूब कुरैशी मुरादाबाद से लोकसभा का चुनाव लड़ा। लेकिन वहां से चुनाव हारा। याकूब का बेटा इमरान 2017 विधानसभा चुनाव सरधना से लड़ा लेकिन वह भी हार गया। बताते चले कि याकूब कुरैशी का विवादों से काफी पुराना नाता रहा है।

