देश में इन दिनों मुग़ल कालीन इमारतों पर काफी विवाद चल रहा है, हिन्दू संगठनों का मानना है कि यह हिन्दू पौराणिक स्थल हैं, यहाँ हिंदू देवी देवता वास करते थे लेकिन मुग़ल शासकों ने वहां पर ताजमहल और कुतुबमीनार जैसी इमारतें बना दी हैं। ऐतिहासिक इमारतों में सबसे ज़्यादा विवाद दुनिया के सातवें अजूबे आगरा में स्थित ताज महल को लेकर है जिसके तहखानों को खोलने को लेकर आजकल बड़ी चर्चा चल रही है।

हिन्दू संगठन की मांग है कि इन तहखाने के बने 22 बंद कमरों को खोला जाय और देश के सामने सच्चाई लाई जाय। इस बीच ASI ने अपना एक न्यूज़ लेटर जारी किया है जिसमें तहखाने की कुछ तस्वीरों को भी साझा किया है। ASI ने यह तस्वीरें अपने 9 मई के न्यूज़ लेटर में प्रकाशित की है जिसके कैप्शन में लिखा है तहखाने के नदी के किनारे वाले हिस्से के रख-रखाव के तहत ख़राब हो चुके चुने के प्लास्टर को हटाकर पारंपरिक चूने के प्लास्टर को प्रसंस्करण के द्वारा प्रतिस्थापित किया गया।
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बता दें कि ताजमहल को कुछ हिन्दू संगठन शिव मंदिर मानते हैं, कुछ इसे तेजो महालय के नाम से पुकारते हैं, भाजपा की एक सांसद ने तो ताजमहल को अपनी संपत्ति भी घोषित कर दिया है, उनका दावा है कि ताजमहल को बादशाह शाहजहां ने उनके पूर्वजों से ज़बरदस्ती ज़मीन छीनकर बनवाया था और उसका कोई मुआवज़ा भी नहीं दिया था। वहीँ कुछ दिन पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट में भाजपा नेता द्वारा ताजमहल के तहखाने के बंद कमरों को खोलने की मांग की थी जिसे अदालत याची को फटकार लगाते हुए याचिका ख़ारिज कर दी थी और रिसर्च करने का सुझाव दिया था।

