कौन कांग्रेस का वजूद बचाने आगे आएगा?

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कौन कांग्रेस का वजूद बचाने आगे आएगा?

  • कांग्रेस का अंदरूनी संकट फिर चर्चा में
  • सामूहिक नेतृत्व की मांग का पत्र वायरल

अमित बिश्‍नोई

कांग्रेस मौजूदा दौर में अपने वजूद बचाने को लेकर संघर्ष कर रही है. कुछ साल पहले तक इस पार्टी को नंबर 1 पार्टी का तमगा हासिल था. लेकिन पिछले कुछ वर्षों में कांग्रेस संकट के दौर से गुजर रही है. कांग्रेस की नैया कौन पार लगाएगा इसको लेकर लगातार मंथन चल रहा है. बिहार इलेक्शन करीब है. इस बीच कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर संकट बरकरार है. दरअसल, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी पहले ही कांग्रेस अध्यक्ष बनने से इनकार कर चुके हैं. सोनिया गांधी का भी स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता है.

14 महीनों से नेतृत्व संकट
कांग्रेस पार्टी पर नेतृत्व का संकट लगभग 14 महीनों से चल रहा है. जुलाई 2019 में तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने लोक सभा चुनावों में पार्टी की हार के बाद पद से इस्तीफा दे दिया था और पार्टी को नया अध्यक्ष चुनने को कह दिया था. उसके बाद उनकी मां और पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी को ही अंतरिम अध्यक्ष बना दिया गया था और कहा गया था कि पार्टी जल्द ही पूर्णकालिक अध्यक्ष चुन लेगी.लेकिन साल भर का वक्त गुजर जाने के बाद पार्टी को आज भी कोई पूर्णकालिक अध्यक्ष नहीं मिला है और इस दौरान पार्टी पर कई संकट आए.पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया पार्टी छोड़ कर बीजेपी में शामिल हो गए और उसके तुरंत बाद मध्य प्रदेश में पार्टी की सरकार गिर गई. इसी तरह की अंदरूनी कलह राजस्थान में भी सामने आई जहां पार्टी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उप-मुख्यमंत्री के अलग अलग नेतृत्व में दो खेमों में बंट गई. करीब महीने भर तक दोनों खेमों के बीच रस्साकशी चली, जिस दौरान संवैधानिक संकट उत्पन्न हो गए. अभी भी वहां हालात नाजुक ही माने जा रहे हैं.

सामूहिक नेतृत्व की मांग
कांग्रेस पार्टी की शीर्ष समिति की सोमवार को होने वाली बैठक से ठीक पहले पार्टी के कम से कम 23 वरिष्ठतम नेताओं द्वारा लिखे गए पत्र के मीडिया में लीक होने से पार्टी का अंदरूनी संकट एक बार फिर चर्चा में आ गया है.कांग्रेस के जिन नेताओं के इस पत्र पर हस्ताक्षर करने की खबर है, उनमें राज्य सभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद, सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा, कपिल सिब्बल, मनीष तिवारी, शशि थरूर; पार्टी संगठन में वरिष्ठ पदाधिकारी मुकुल वासनिक, जितिन प्रसाद; पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री भूपिंदर सिंह हूडा, वीरप्पा मोइली, पृथ्वीराज चव्हाण, पी जे कुरियन, रेणुका चौधरी, मिलिंद देवड़ा; पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर, अरविंदर सिंह लवली; दिल्ली विधान के पूर्व अध्यक्ष योगानंद शास्त्री और पूर्व सांसद संदीप दीक्षित जैसे नाम शामिल हैं.पूर्व कांग्रेस प्रवक्ता संजय झा ने दावा किया है कि पत्र में 23 नेताओं के अलावा, पूरे देश से करीब 300 अतिरिक्त नेताओं ने भी हस्ताक्षर किए हैं.
मीडिया में आई खबरों में दावा किया जा रहा है कि इस पत्र में ने नेताओं ने मांग की है संगठन में कई बदलाव लाए जाएं और “सामूहिक नेतृत्व” की स्थापना की जाए. कांग्रेस सूत्रों ने डीडब्ल्यू को बताया कि ये सभी नेता चाहते हैं कि पार्टी की मौजूदा अंतरिम राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी ही पार्टी की कमान अपने हाथ में संभाल लें और पूर्णकालिक अध्यक्ष बन जाएं. माना जा रहा है कि पत्र लगभग 15 दिनों पहले लिखा गया था.

पत्र के लीक होने से पहले सोनिया ने इस्तीफे की पेशकश की
इन्हीं घटनाओं की पृष्ठभूमि में इस पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले नेताओं ने पार्टी में व्यापक सुधारों की मांग की है. मीडिया में आई खबरों में दावा किया जा रहा है कि पत्र के लीक होने के बाद होने वाली अहम बैठक के पहले ही सोनिया गांधी ने इस्तीफे की पेशकश कर दी है और उसके बाद कई नेताओं ने सार्वजनिक रूप से मांग की है कि या तो वो खुद या राहुल गांधी पूर्णकालिक अध्यक्ष बन जाएं. अब देखना होगा कि बैठक में पार्टी क्या फैसला लेती है.

पूर्व प्रवक्ता संजय झा ने किया ट्वीट

राहुल ने कहा, 23 नेताओं की बीजेपी से साठगांठ
कांग्रेस वर्किंग कमेटी की आज अहम बैठक हो रही है. इस बैठक के एक दिन पहले 23 कांग्रेस नेताओं की ओर से सोनिया गांधी को लिखा पत्र सामने आया है. इस पर राहुल गांधी ने इन सभी 23 नेताओं की आलोचना की है. राहुल गांधी ने कहा है कि इन सभी नेताओं की बीजेपी से साठगांठ हैं. सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी ने कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक में कहा कि जब हम राजस्थान एवं मध्य प्रदेश में विरोधी ताकतों से लड़ रहे थे और सोनिया अस्वस्थ थीं तो उस समय यह पत्र क्यों लिखा गया?नेतृत्व के मुद्दे पर कांग्रेस के दो खेमों में नजर आने की स्थिति बनने के बीच पार्टी की सर्वोच्च नीति निर्धारण इकाई सीडब्ल्यूसी की बैठक वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से हो रही है. गौरतलब है कि सीडब्ल्यूसी की बैठक से एक दिन पहले रविवार को पार्टी में उस वक्त नया सियासी तूफान आ गया जब पूर्णकालिक एवं जमीनी स्तर पर सक्रिय अध्यक्ष बनाने और संगठन में ऊपर से लेकर नीचे तक बदलाव की मांग को लेकर सोनिया गांधी को 23 वरिष्ठ नेताओं की ओर से पत्र लिखे जाने की जानकारी सामने आई थी.हालांकि, इस पत्र की खबर सामने आने के साथ ही पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और पार्टी के कई अन्य वरिष्ठ एवं युवा नेताओं ने सोनिया और राहुल गांधी के नेतृत्व में भरोसा जताया और इस बात पर जोर दिया कि गांधी परिवार ही पार्टी को एकजुट रख सकता है.

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