आगामी पांच अक्टूबर को दशहरा यानी विजयादशमी का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन पूरा दिन शुभ मुहूर्त है। जिसमें संकल्प, शुभारम्भ, नूतन कार्य, सीमोल्लंघन के लिए विजय मुहूर्त दोपहर 02:26 से 03:13 तक रहेगा। जिसमें गुरु-पूजन, अस्त्र-शस्त्र-शमी वृक्ष-आयुध-वाहन पूजन किया जा सकेगा। दशहरा के दिन शाम को सूर्यास्त होने का समय और आकाश में तारे उदय होने का समय हो वो सर्व सिद्धिदायी विजय काल कहलाता है| इस समय घूमने-फिरने नहीं जाना चाहिए। दशहरे के दिन शाम को घर पर स्नान आदि करके, दिन के कपड़े बदल के शाम को धुले हुए कपड़े पहनकर ज्योत जलाकर बैठ जाये। इसके बाद ” राम रामाय नम: । “मंत्र जपते हुए विजयादशमी है ना तो रामजी का नाम और मन-ही-मन, गुरुदेव को प्रणाम करके गुरुदेव सर्व सिद्धिदायी विजयकाल चल रहा है की हम विजय के लिए इस मंत्र का जाप करें। “ॐ अपराजितायै नमः। इस मंत्र की एक या दो माला जप करना और इस काल में हनुमानजी का सुमिरन करते हुए इस मंत्र की एक माला जप करें।
“पवन तनय बल पवन समाना, बुद्धि विवेक विज्ञान निधाना।कवन सो काज कठिन जग माहि, जो नहीं होत तात तुम पाहि॥ पवन तनय समाना की भी १ माला कर ले उस विजय काल में। गुरुमंत्र की माला कर ले। फिर देखो अगले साल की दशहरा तक गृहस्थ में जीनेवाले को बहुत अच्छे परिणाम देखने को मिल सकते है।

