कपोल कल्पित विकास को धर्मिक उन्माद की चाशनी में लपेट कर पेश करती है भाजपा
सन 1925 से लेकर आज तक आरएसएस/जनसंघ/भाजपा सभी राजनेताओं/संगठनों पर हिन्दू विरोधी होने और मुस्लिम तुष्टिकरण का आरोप लगाते हुए ही अस्तिव में आई है। इसी तरह के अनर्गल एवं मनगढ़ंत आरोपों को आधार बनाकर गाँधी जी की हत्या तक को जायज ठहरा दिया गया।

जिस मसले को लेकर हमारी पुरानी 2-3 पीढियां इन्हें बहस करके चुप/खत्म नही कर पाई तो अब समय है जब हमें इनसे लड़ने के पैटर्न के बारे में सोचना होगा।
थोड़ा सा पीछे जाओगे और गौर करोगे तो पाओगे के 2013, 2017, 2018, 2019 के चुनाव में क्या भाजपा ने अपना पैटर्न बदला ? जवाब मिलेगा नही ।
हर चुनाव में भाजपा द्वारा कपोल कल्पित विकास को धर्मिक उन्माद की चाशनी में लपेट कर जनता के सामने रखा गया। इसी तरह की फोटो के साथ भ्रामक मनगढ़ंत पोस्ट डालकर हम जैसे सोशल मीडिया के कलम वीरों को असल मुद्दों से भटका कर चुनाव जीतने की कोशिश की गई । इस कला में महारथ हासिल है इन लोगों को । इसलिए जब भी कोई विपक्षी दल या समूह इनकी पिच पर जाकर खेला तो हर बार हार का सामना करना पड़ा ।
याद करो कैराना उपचुनाव में एक नौजवान नेता ने हिम्मत दिखाते हुए इन संघियों की पिच पर खेलने से साफ मना कर दिया और तेज आवाज में एक नारा बुलन्द किया और कहा, मेरे क्षेत्र में जिन्ना नही गन्ना चलेगा ।
मजबूर होकर भाजपा को गाँव, गरीब किसान, मजदूर की पिच पर खेलना पड़ा । पीएम , सीएम, केंद्रीय मंत्री, राज्य मंत्री, साँसद, विधायक शासन प्रशासन की पूरी फौज एक मात्र लोकसभा क्षेत्र के उपचुनाव में उतार दी गयी ।
इन सबके बावजूद किसान मसीहा चौधरी चरण सिह एवं चौधरी अजित सिंह की परवरिश पाया एक नौजवान जयन्त चौधरी नितान्त अकेला अपनी साधारण सी गंवारू फौज के साथ मैदान में उतर पड़ा। जिस क्षेत्र में वोट कट जाने के डर से अन्य कोई दल या नेता अपने मंच से मुस्लिम को भाई बोलने से भी परहेज कर रहा हो, एक मुस्लिम महिला को ध्रुवीकरण का केंद्र रहे कैराना से जीता कर लाने में कामयाब हुआ । जिन्ना नही गन्ना चलेगा इस नारे की गूँज पूरी दुनिया ने सुनी।
कैराना उपचुनाव जीत के माध्यम से जयन्त जी ने पूरे देश के राजनैतिक दलों एवं जनता को एक संदेश देने का काम किया था।। अभी भी आप लोगों को वही समझाने का प्रयास है इग्नोर करना सीख लो। उनकी पिच पर खेलना बन्द कर दो ।
अपने मुद्दों को तय करो उस पर बहस करो और भाजपा समेत तमाम विरोधी दलों के लोगों को भी अपने मुद्दों पर बात करने के लिए मजबूर करना सीख लो । आप ऐसी भ्रामक और नफरत फैलाने वाली पोस्ट पर कमेंट करना छोड़कर तो देखिए।। इन नफरत पसंद लोगों ने इस तरह की पोस्ट करना बन्द न कर दिया तो कहना ।
अंत में फिर वही
जय जयन्त, जय राष्ट्रीय लोकदल
चौधरी नवनीत (भैंसा)
प्रदेश सहसंयोजक, आईटी प्रकोष्ठ, राष्ट्रीय लोकदल

