बिगड़ती छवि व चुनावी चिंताओं ने किया ‘‘बैचेन’’

आर्टिकल/इंटरव्यूबिगड़ती छवि व चुनावी चिंताओं ने किया ‘‘बैचेन’’

Date:


बिगड़ती छवि व चुनावी चिंताओं ने किया ‘‘बैचेन’’

-फरीद वारसी

बिगड़ती छवि व चुनावी चिंताओं ने किया ‘‘बैचेन’’

अपनी सरकार के कार्यकाल की दूसरी वर्षगांठ से पहले ही प्रधानमंत्री मोदी के आंसू बहाने का विधिवत कार्यक्रम सम्पन हुआ। जहां तक प्रधानमंत्री के भावुक होने की बात है तो यह उनके संवेदनशील होने या न होने के सवाल से जुड़ा हुआ है। माना जाता है कि आंसू बहाना संवेदनशील होने का प्रमाणपत्र नहीं, बल्कि चुपचाप आंसू पी जाना संवदेनशील और मानसिक रूप से मजबूत होने की निशानी होता है। यह साफ है कि कुम्भ और बंगाल की चुनावी सरगर्मियों के कारण ही कोरोना की दूसरी लहर विकराल हुई। ऐसे में प्रधानमंत्री तब तो संवेदनशील नहीं हुए,?

बहरहाल, प्रधानमंत्री के भावुक होने पर देश इस बार भावनाओं में नहीं बहा, उलटे पीड़ितवर्ग की नाराजगी सोशल मीडिया सहित दूसरे अन्य माध्यमों से जब प्रकट हुई तो भाजपा-संघ के खेमे में बैचेनी बढ़ गई। जिसके बाद सरकार, पार्टी की छवि व यूपी के चुनाव की चिंता पर मंथन के लिए भाजपा-संघ के शीर्ष नेतृत्व की एक बैठक हुई। यह सर्वविदित है कि कोरोना की दूसरी लहर से जो जनहानि हुई है और खासतौर से इससे निपटने में योगी-मोदी सरकार के कुप्रबंधन का जो शर्मनाक प्रदर्शन हुआ है उसको लेकर सिर्फ आम आदमी ही नहीं, बल्कि भाजपा के कोरवोटरों में भी भाजपा सरकारों के खिलाफ आक्रोश चरम सीमा पर हिलोरे मार रहा है।

इसके अलावा कोरोना से निपटने में आमजनता के साथ-साथ भाजपा सरकार व संगठन के अपने लोग भी मुख्यमंत्री योगी से नाराज बताए जाते हैं। कईयों ने पत्र लिखकर अपनी नाराजगी का इजहार किया। बहुत से खामोश है, वह भी भाजपा के लिए कम चिंता की बात नहीं है। भाजपा के खिलाफ लोगों के गुस्से का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि गतदिनों मथुरा से भाजपा सांसद हेमामलिनी ने सांसद के तौर पर सात साल पूरे हो जाने पर सोशल मीडिया पर लोगों का आभार व्यक्त किया। जिसकी प्रतिक्रिया में लोगों ने कहा पिछली बार आपको चुनने में गलती हो गई थी, इस बार अपनी गलती सुधारेंगे। क्योंकि संकट के समय आप गायब थीं। इस तरह के संकेत इस बात का प्रतीक है कि भाजपा के लिए राह आसान नहीं है। वह भी तब जब यूपी चुनाव में मात्र सात महीने ही बचे हैं।

भाजपा-संघ की बैठक में आगामी चुनाव में आमलोगों की नाराजगी भाजपा के खिलाफ सुनामी में न परिवर्तित हो, इस पर चर्चा के बाद सूत्रों के अनुसार यह तय हुआ कि सरकार व संगठन स्तर में बड़ा बदलाव किया जाएगा व एक व्यापक अभियान चलाकर लोगों की नाराजगी को दूर किया जाएगा। जिसमें संघ भी भाजपा का सहयोग करेगा। चुनाव हों और संघ, भाजपा का साथ न दे, यह मुमकिन नहीं। उसके बाद छाती पीट कर यह कहा जाता है कि हम कोई राजनैतिक संगठन नहीं है, बल्कि सामाजिक संगठन है। समाज के चरित्र निर्माण का काम करते हैं।

कोरोना के कारण समाज और देश का क्या हाल हुआ है शायद संघ को इसकी गंभीरता का एहसास नहीं है। बस चुनाव जीतने की चिंता में सब दुबले हुए जा रहे हैं । जहां तक भाजपा-संघ के संभावित उपरोक्त अभियान चलाए जाने का सवाल है तो इसका लाभ भाजपा को चुनाव में कितना मिलेगा, यह तो चुनाव परिणाम ही बताएंगे। हालाँकि पंचायत चुनाव परिणामों ने यह तो संकेत दे ही दिया है कि हवा किस दिशा में बह रही है। लेकिन इतना तय है कि जल्द ही चुनाव से पूर्व यूपी के लोगों को भाजपा की ओर से एक नया नारा मिलेगा। 2014 के लोकसभा चुनाव में ‘‘अच्छे दिन’’ का नारा दिया गया था। सात साल गुजर गए अच्छे दिन आने तो दूर की बात अब तो रातें ही काली और डरावनी हो गईं हैं।

वैसे भाजपा-संघ का शीर्ष नेतृत्व यह क्यों सोच रहा है कि सिर्फ कोरोना से न निपट पाने से लोग भाजपा से नाराज है। इस बार नाराजगी का विस्तार रूप है जैसे आसमान छूूती महंगाई, फिसलती अर्थव्यवस्था, बढ़ती बेरोज़गारी और सबसे बड़ी बात बेहाल चिकित्सा तंत्र। यह वे ज्वलंतशील मुद्दे हैं जिनका सामना चुनावों में भाजपा को करना पड़ेगा। पर इससे भी इंकार नहीं किया जा सकता है कि उक्त सवालों से बचने के लिए अपनी फितरत के अनुसार भाजपा की ओर से चुनाव में लोगों को गुमराह करने के लिए उसके कथित राष्ट्रवाद व हिन्दुत्व से जुड़े मुद्दों को उठाने का काम किया जाएगा। जैसाकि पिछले 2017 के विधानसभा चुनाव में हुआ था कि अखिलेश के विकास के मुद्दे से बचने के लिए प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भाजपा ने श्मशान-कब्रिस्तान, दीवाली-रमज़ान, अवैध कत्लखानों का शोर मचा कर लोगों का भावनात्मक रूप दोहन किया था। वहीं इधर योगी सरकार के बुरी खबर एक यह है कि गांवों में वैक्सीन को लेकर ग्रामीणों में डर बैठा हुआ है। लोग वैक्सीन लगवाने से परहेज कर रहें हैं। कोरोना शहरों में तबाही मचाने के बाद अब गांवों की ओर रूख कर चुका है। बेहतर यही होगा कि योगी सरकार चुनाव की चिंता और राजनीतिक नुकसान से बचने की बातें छोड़ कर वैक्सीनेशन के काम में युद्धस्तर पर प्रयास करें । पहले भी वैक्सीनेशन का काम पूरा न होने का कारण कोरोना की दूसरी लहर लोगों पर कहर बन कर टूटी और तीसरी लहर के आने की चेतावनी पहले ही मिल चुकी है।

Share post:

Subscribe

Popular

More like this
Related