तीन दामादों का दुरूपयोग कब तक?

आर्टिकल/इंटरव्यूतीन दामादों का दुरूपयोग कब तक?

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भाजपा के तीन दामाद, ED, सीबीआई, इनकम टैक्स। यह बात राजद नेता तेजस्वी यादव ने उस समय कही जब एक तरफ विधानसभा में भाजपा से बिछड़ी नितीश सरकार अपना विश्वासमत हासिल कर रही थी और दूसरी तरफ बिहार से लेकर झारखण्ड तक सीबीआई की टीमें राजद नेताओं के घरों और ठिकानों पर छापे मारा रही थी. बिहार में अभी भाजपा और नितीश के बीच तलाक़ हुए समय ही कितना बीता था. मुश्किल से 15 दिन, वैसे लोगों को काफी हैरानी थी कि छापों के बिना यह 15 दिन भाजपा ने गुज़ारे कैसे? क्योंकि जो भी भाजपा से नाता तोड़ता है या फिर विरोध की आवाज़ बुलंद करता है, ED-सीबीआई और इनकम टैक्स जैसी केंद्रीय एजेंसियां सक्रीय हो जाती हैं. इन एजेंसियों की सक्रियता बड़ी तेज़ी से बढ़ती जा रही है, इतनी तेज़ी से कि अब इनके छापों के बारे बच्चा बच्चा भी बता देता हैं कि कब छापा पड़ने वाला है.

आज हर राजनीतिक दलों को मालूम है कि ED-सीबीआई या इनकम टैक्स की टीमों का केंद्र की भाजपा सरकार उनपर कब प्रयोग कर सकती है, लिहाज़ा वो कोई भी विरोधी कदम उठाने से पहले अपने को कील कांटे से पहले ही दुरुस्त कर लेती हैं और यही वजह है कि इन एजेंसियों को बार बार मुंह की खानी पड़ रही है. वह कहते हैं अधिकता हर चीज़ की वैल्यू को खो देती है, यही हाल अब इन एजेंसियों का हो रहा है. केंद्र में बैठी सरकार इन एजेंसियों का इतना दोहन कर रही है कि छापों की प्रासंगिकता ही ख़त्म होती जा रही है. दरअसल अब इस सरकार को इस बात की कोई परवाह नहीं कि ED-सीबीआई या इनकम टैक्स विभागों के दुरूपयोग पर जनता क्या सोचती होगी, उसे अदालतों की फटकारों से भी कोई वास्ता नहीं। अब तो ऐसा लगता है कि सरकार के पास अपने विरोधियों से निपटने का कोई अन्य तरीका ही नहीं है. 

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वह कहते हैं न कि किसी को इतना मत डराओ कि उसके दिल से डर का खौफ ही निकल जाए. ED-सीबीआई और इनकम टैक्स को लेकर आजकल यही हो रहा है, सरकार इन एजेंसियों का इतना उपयोग/दुरूपयोग कर रही है कि यह एजेंसिया मज़ाक बनकर रह गयी हैं. दरअसल सत्ता के खेल में केंद्र में बैठी भाजपा सरकार ने इन एजेंसियों को विपक्ष को डराने का हथियार बना लिया है. सरकार को इन छापों में अपने लिए बदनामी जैसी कोई बात नहीं लगती, उसे तो बस भाजपा के विरोधियों को इन एजेंसियों के माध्यम से सिर्फ भ्रष्ट साबित करना है, उसे इससे मतलब नहीं कि इन एजेंसियों के ज़रिये विरोधियों को फंसाने की उसकी कोशिश अक्सर नाकाम होती है क्योंकि वह झूठ पर खड़ी होती है, उसे तो सिर्फ इस बात से मतलब रहता है कि आरोपियों को सजा मिले न मिले बदनामी ज़रूर मिले। भाजपा बदनामी का यह खेल 2014 से पहले से ही कर रही है. 2 जी घोटाला सबको याद होगा, उस कथित घोटाले को उजागर करने वाले विनोद राय भी सबको याद होंगे। बता दें कि उस वक्त जितने का 2 जी ऑक्शन में घोटाला बताया गया था 2022 में 5 जी कितने में बिका, भाजपा और विनोद राय से ज़रूर सवाल करना चाहिए। खैर बाद में साबित हो गया 2 जी तो कोई घोटाला ही नहीं था, लेकिन विनोद राय की मदद से भाजपा तो यूपीए सरकार को बदनाम करने और भ्रष्ट साबित करने में तो कामयाब हो ही गयी. भाजपा का वही खेल अब भी जारी है, इन एजेंसियों की मदद से विरोधियों को इतना बदनाम कर दो, इतना भ्रष्ट साबित कर दो कि लोग भाजपा की नीयत पर सवाल ही न उठा सकें, क्या फर्क पड़ता है कि बाद में सब बरी हो जायँ। 

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बात बिहार की तो जैसे ही वहां सत्ता बदली, नितीश ने भाजपा को त्यागा, ट्वीटर पर ट्रेंड चलने लगा कि पटना के लिए सीबीआई, इनकम टैक्स और ED की टीमें रवाना हो चुकी हैं. खैर उस वक्त तो वह सब एक मज़ाक था लेकिन ऐसा सच्चा मज़ाक था जो बिहार और झारखण्ड में 15 दिनों बाद सच साबित हुआ. बड़ा अजीब सा लगता है कि देश की यह संवैधानिक एजेंसियां लोगों में एक हंसी का पात्र बनकर रह गयी हैं. कभी सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई के दुरूपयोग पर उसे पिंजरे में बंद तोता कहा था. 2014 से पहले भाजपा नेता अक्सर सुप्रीम की इस टिप्पणी को मनमोहन सरकार पर हथियार के रूप में इस्तेमाल करते थे लेकिन आज इन एजेंसियों की क्या हुक्म है मेरे आका वाली जैसी हालत बना दी गयी है, उसके बारे में क्या कहा जा सकता है, क्या उपमा दी जा सकती है?सुप्रीम कोर्ट की अब इन एजेंसियों के बारे में क्या राय है. आखिर में फिर यही कहूंगा कि आज आप विरोधियों के लिए इन एजेंसियों की मदद से जो गड्ढे खुदवा रहे हैं , कभी यही एजेंसियां आपके लिए भी गड्ढे खोद सकती हैं. आज आप अमृतकाल का जश्न मना रहे हैं लेकिन याद रखना चाहिए कि कोई भी राजनीतिक दल अमर नहीं होता। समय बड़ा बलवान भी होता है और क्रूर भी. वो आज आपके साथ है तो कल किसी और के साथ.

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