अमित बिश्नोई
देश में आज से 5G की सेवाएं शुरू हो गयीं। प्रधानमंत्री मोदी ने औपचारिक रूप से इसकी लॉन्चिंग। अभी ये सेवा देश के शेरोन में शुरू की है और अगले साल या कह लीजिये अगले लोकसभा चुनाव से पहले इसका विस्तार पूरे देश में किया जायेगा। इस लॉन्चिंग के साथ ही दावा किया जा रहा है 10 गुना तेज़ अल्ट्रा-हाई-स्पीड इंटरनेट स्पीड का. बकौल प्रधानमंत्री मोदी समाज के लिए यह एक परिवर्तनकारी शक्ति है जिसका आर्थिक और सामाजिक लाभ सबको मिलेगा। बेशक भारत के लिए 5G बड़ी बात है. 2G, 3G और 4G भी बड़ी बात थी, ऐसे प्रधानमंत्री जो करते हैं बड़ा ही करते हैं. जब वो कुछ नया करते हैं तो यह नहीं देखते कि पिछ्ला जो बड़ा काम किया था वो वहीँ पर है या कुछ आगे बढ़ा. मोदी जी को तो बस आगे देखना है, 5G के बाद अब 6G की कोशिश होगी, वैसे दुनिया तो 7-G के पास पहुँच गयी है. बड़ा अच्छा लगता है यह सुनकर अब नेटवर्क 10 गुना बेहतर होगा, 4-G के समय भी ऐसा ही कुछ कहा गया था. देश के दूरदराज़ इलाकों में बेहतर नेटवर्क और स्पीड की बातें की गयी थीं लेकिन क्या वो दावे, वो बातें सही थीं, क्या 4-G ने हमें कॉल ड्राप की समस्या से निजात दिला दी, क्या आये दिन नेटवर्क गायब होने की समस्या से छुटकार मिल गया, क्या वाकई ग्रामीण इलाकों में वीडियो स्ट्रीमिंग के दौरान कोई गोलाकार आकृति ने घूमना बंद कर दिया है.
आप सोच रहे होंगे कि देश में आज इतना बड़ा इवेंट हुआ है, हम 5-G के दौर में प्रवेश कर गए हैं, लेकिन सवाल ये है कि क्या हम 4-G के दौर से बाहर निकल पाए हैं, 4-G को तो छोड़िये, देश के बहुत से इलाकों में मामला तो 2G और 3G से भी बदतर है. अभी तो हम 4-G की समस्याओं से जूझ रहे हैं, अब 5-G का झुनझुना थमा दिया गया है. अच्छा तो यह होता कि हम जो पहले सेवाएं दे रहे हैं उसको पूरी तरह से बेहतर बन जाने देते। अभी देश में क्या होने वाला है, एक होड़ चलने वाली है 5-G के नाम पर. नए सिम, नए मोबाइल। एक बाज़ार खुलेगा और नौजवान नस्ल उसके पीछे दौड़ेगी। पुराने फ़ोन बदले जायेंगे, नए खरीदे खरीदे जायेंगे। लोगों की जेबें हलकी होंगी। दूसरी कम्पनियाँ भी इस रेस में दौड़ेंगी, वहां भी वही सबकुछ होगा जो जियो के कस्टमर के साथ अब होगा। बल्कि शुरू हो चूका है. एक बिलकुल ताज़ा घटना, एक व्यक्ति ने जियों का सिम लिया, व्यक्ति थोड़ा अनजान टाइप और उम्रदराज़ था, उसने उस सिम को अपने फीचर फोन में डाला, मगर नेटवर्क नहीं आया, बहुत जतन कर डाले मगर कुछ नहीं हुआ. जियो स्टोर पहुंचा, समस्या बताई तो पता चला जियो का सिम चलाने के लिए उसे स्मार्ट फ़ोन खरीदना पड़ेगा, क्योंकि यह 5-G सिम फीचर फ़ोन में काम ही नहीं करता है. उस व्यक्ति की औकात स्मार्टफोन खरीदने की नहीं थी, मजबूरन उसने सिम तोड़ दिया और वोडा के पास चला गया.
कहने का मतलब सिर्फ इतना है कि भारत की आबादी 130 करोड़ से ज़्यादा है, सबकी औकात नहीं स्मार्ट फ़ोन की या बार बार स्मार्ट फोन बदलने की. इसलिए नया लाने का ये मतलब नहीं कि पुराने को ख़त्म कर दिया जाय. और अगर 5-G देश के एक विशेष वर्ग के लिए है जो शहरों में रहता है तो फिर प्रधानमंत्री जी यह समाज के लिए परिवर्तनकारी कैसे हुआ. देश का 80 प्रतिशत समाज तो गाँव देहात में बसता है जहाँ आपकी पुरानी सेवाएं अभी तक बदहाल हैं. न नेटवर्क है, न स्पीड और कॉल ड्राप की समस्या जस की तस. ग्रामीण इलाकों की तो छोड़िये शहरों के बाहरी इलाकों में भी यह सारी समस्याएं आज भी बदस्तूर कायम हैं. अच्छा होगा कि पहले जो पुराना नेटवर्क है उसे मज़बूत करें, उसे सुधारें वरना 5-G भी 2G, 3G और 4-G की तरह एक टोटल टाइम और money वेस्ट बनकर रह जायेगा। 5-G से आपको वाहवाही और जियो को पैसा ज़रूर मिल जायेगा मगर consumer को क्या मिलेगा? एक और नेटवर्क। माना कि लोकसभा चुनाव से पहले इसका पूरे देश में विस्तार भी हो जायेगा, आपकी सरकार की उपलब्धियों में एक और पन्ना जुड़ जायेगा, चुनावी भाषणों के लिए एक बढ़िया मसाला भी बन जायेगा, आप 5-G को लेकर विपक्ष पर हमले भी करेंगे मगर जब तक कॉल ड्राप, नेटवर्क और स्पीड की प्रॉब्लम दूर नहीं होगी आप चाहे जितने भी G और ले आइये, मोबाइल यूज़र यूँ ही यूज़ टू रहा है, आगे भी रहेगा।

