ज़ीनत सिद्दीकी
सम्राट डंकेश्वेर के साम्राज्य की प्रजा आजकल बहुत दुखी है, दुखी तो सम्राट भी हैं और अपने इस दुख का सार्वजनिक प्रदर्शन उन्होंने हाल ही में अपनी भरभराती आवाज में किया भी है. अब बात जहां दुखों की है तो जनता कोरोना महामारी,चढ़ती महंगाई, बढ़ती बेरोजगारी से दुखी है तो वही सम्राट के सामने इन सबके अलावा और भी चिंताएं हैं जो आजकल उन्हें काफी दुःख पहुंचा रही हैं. सबसे बड़ी चिंता तो उन्हें चुनावों की ही रहती है यह सभी जानते हैं, एक राज्य के बाद दूसरे राज्य में होने वाले चुनावों के कारण उन्हें दो घड़ी चैन के नसीब नहीं हो पाते। इन कमबख्त चुनावों के कारण ही प्रजा की भलाई के लिए ढंग से कुछ सोच पाने का मौका नहीं मिल पाता, यही कारण है कि इरादों के वादों से अब तक काम चलाया जा रहा है. मगर प्रजा भी धीरे-धीरे समझने लगी है, धीमे-धीमे बोलने भी लगी है, यही सब बातें सम्राट डंकेश्वेर की चिंता का कारण हैं. इन्हीं चिंताओं पर कुलगुरु आश्रम में भी चिंतन-मनन चल रहा है.
इन सब चिंतन-मनन और मंथन का केंद्र साम्राज्य का सबसे बड़ा राज्य है जहां कुछ महीनों बाद जन मत होना है. कोरोना माई ने जबसे साम्राज्य में डेरा जमाया है सब कुछ प्रतिकूल ही हो रहा है, लगता है जैसे साढ़ेसाती का योग चल रहा है, हवाएं उल्टी दिशा में बहने लगी हैं. पुरुष प्रधान समाज में एक महिला से मिली चोट बहुत सालती है. यह घाव अभी ताज़ा हैं और सम्राट डंकेश्वेर इन घावों को और गहरा नहीं होने देना चाहते।
यही कारण है कि इस राज्य में जनमत में जाने से पहले सब कुछ ठोक बजा कर देख लेना चाहते हैं. कुलगुरूआश्रम भी हमेशा की तरह इस मामले में भी उनका भरपूर साथ और समर्थन दे रहा है. भले ही राज्य के मुखिया राजा योगेश्वर सम्राट के आज्ञाकारी हैं और राज्य में 4 वर्षों से ज्यादा शासन चलाकर कीर्तिमान भी बना चुके हों मगर दूध का जला छाछ भी फूंक फूंक कर पीता है यही कारण है कि सम्राट डंकेश्वेर ने अपने दूतों को जमीनी हकीकत जानने के लिए राजा योगेश्वर के राज्य में भेजा। दूतों ने भी योगेश्वर के सेनापतियों और संगठन के अधिकारियों से बंद कमरे में अकेले अकेले वार्तालाप की. अफवाह है कि कुछ ने खुसफुसाहट भरा विरोध भी दर्ज कराया, दूतों ने उनका विरोध दर्ज भी कर लिया और इस निर्देश के साथ कमरे से बाहर जाने का निर्देश दिया कि चेहरे की बतीसी दिखनी चाहिए, कोई फुसफुसाहट कमरे से बाहर नहीं जानी चाहिए। हुआ भी ऐसा ही, बाहर निकलते ही भरपूर जनमत के साथ सत्ता में वापसी का सब ने जयकारा लगाया।
बहरहाल दूत ज़मीनी सच्चाई जानकर चले गए और कुलगुरु आश्रम में जाकर रिपोर्ट भी सौंप आये, अब उस रिपोर्ट पर कुलगुरु आश्रम में मंथन जारी है. जाहिर सी बात है कि इस मंथन में सम्राट डंकेश्वेर और उनके मुख्य सेनापति लंकेश्वर भी शामिल होंगे ही. उड़ती उड़ती हुई खबर मिली है कि मामला अब 56 इंच पर अटक गया है. दरअसल सम्राट डंकेश्वेर सत्ता प्राप्ति के लिए स्वयं ही 56 इंच की नाप का मापदंड बना चुके हैं और आज की स्थिति यह है कि कोरोना माई की कृपा से सबके सीने सिकुड़ चुके हैं. कुलगुरु ने सम्राट डंकेश्वेर, मुख्य सेनापति लंकेश्वर और राजा योगेश्वर तीनो के सीनों की नाप ले कर देखा तो पाया कि अभी 56 इंच पूरा नहीं हो रहा है और यही चिंता की असली वजह है. अब सारा मंथन इसी बात को लेकर हो रहा है कि कैसे पूरा हो 56 इंच का मापदंड? खैर, जनमत में तो जाना ही है, और शायद इसीलिए मंथन में राजा योगेश्वर पर ही दांव लगाना तय हुआ है. जनमत में अभी थोड़ा समय है और इस समय का उपयोग सिकुड़े हुए सीनों को फुलाने के लिए किया जाएगा ताकि जब जनमत के लिए प्रजा के बीच पहुंचा जाय तो सीना 56 इंच का हो चूका होना चाहिए।

