- दीक्षा लेने के बाद पतित पावनी मां गंगा में लगायी डुबकी
- अदभुत नजारे को देखने के लिये ललायित रहे लोग
हरिद्वार। कुंभनगरी हरिद्वार में चल रहे कुुंभ मेले के दौरान आज 500 से अधिक साधुओं ने नागा संन्यासी के तौर पर दीक्षा लेने के बाद पवित्र गंगा में डुबकी लगाई। इस अदभुत नजारे को देखने के लिये ललायित लोग गंगा तट के दूसरी ओर खड़े थे। जीवन में भाग्य से ही इस दर्शनीय पलों को देखने का अवसर मिलता है। दरअसल कुंभ मेले के दौरान ही साधुओं को नागा सन्यासी के तौर पर दीक्षा दिये जाने की परंपरा है।
तीर्रनगरी हरिद्वार के महाकुंभ में सोमवार को गंगा नदी के तट पर 500 साधुओं को श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा की ओर से श्री दुखहरण हनुमान मंदिर में अखाड़ा धर्म ध्वजा के नीचे दीक्षा दी गई। जूना अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी ने दीक्षा कार्यक्रम कराया। दीक्षा लेने के बाद सभी 500 साधुओं ने गंगा नदी में स्नान किया। नागा संन्यासियों की दीक्षा का यह आयोजन महाकुंभ में ही किया जाता है। श्री पंचायती निरंजनी अखाड़ा ने भी कुछ साधुओं को बर्फानी नागा संन्यासी की पहचान देने का ऐलान किया है। महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरी ने बताया कि निरंजनी अखाड़ा ने आने वाले दिनों में हजारों साधुओं को नागा संन्यासी के तौर पर दीक्षा लेने का फैसला लिया है।
बेहद कठिन होती है नागा सन्यासी को दीक्षा देने की प्रक्रिया
नागा सन्यासी को दीक्षा देने की प्रक्रिया बेहद कठिन होती है। हर साधु नागा सन्यासी नहीं होता और हर साधु को नागा सन्यासी की दीक्षा नहीं दी जा सकती। यह धार्मिक प्रक्रिया है और नागा सन्यासी बनने के पात्र का चयन बड़ी सावधानी और कठिन परीक्षाओं से गुजरने के बाद किया जाता है। महाकुंभ के दौरान नागा सन्यासियों को दीक्षा दी जाती है। इन अविस्मरणीय पलों को अपने चित्त में संजोने के लिये लोग ललायित रहते हैं। मगर यह अदभुत पल देख पाना बेहद सौभाग्यशाली के लिये ही संभव होता है।

